यहां पर यज्ञ की अग्नि से निकल रहे शिवलिंग, लोगों में फूटा भक्ति का सैलाब

यहां लगता शिव धाम जैसा पूरी होती है हर मनोकामना, महाशिवरात्रि पर होता है भव्य आयोजन

विवेक जगताप@ धरमपुरी. श्री बिल्वामृतेश्वर महादेव मंदिर बेंट संस्थान लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां शिव सरिता (नदी) के किनारे निवास करते हंै। नर्मदा नदी की दो धाराओं के मध्य बेंट टापू पर भगवान श्री बिल्वामृतेश्वर महादेव का विशाल मंदिर स्थित है।

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सदियों से नहीं बल्कि युगों से धरमपुरी की धरा पर भगवान श्रीबिल्वामृतेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है। महाशिवरात्रि पर जिले का सबसे बड़ा आयोजन यहीं होता है। यहां आकर शिव भक्तों को लगता है, जैसे शिव धाम में पहुंच गए हों।

 

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ऐसे हुआ था बिल्वामृतेश्वर महादेव का उद्भव
सूर्यवंशी राजा रंतिदेव की तपस्या के परिणामस्वरूप श्रीबिल्वामृतेश्वर महादेव का प्राकट्य हुआ था। गुरु वशिष्ठ के निर्देश व सिद्धि प्राप्ति की कामना से सूर्यवंशी राजा रंतिदेव नर्मदा किनारे स्थित कुब्जा तीर्थ पर आए थे। जब उन्होंने यज्ञ प्रारंभ करवाया तो वेद ऋ चाओं की ध्वनि सुनकर महाबाहु और सुबाहु नामक राक्षस आए और यज्ञ का विध्वंश करने लगे। देवता भयभीत होकर वेद की ऋ चाएं भूलने लगे। यह देख राजा ने अपने मंत्र बल के पराक्रम से राक्षसों को पराभूत किया। राजा भगवान शंकर के परम भक्त थे। उन्होंने जब यज्ञ में बिल्व पत्र, बिल्व फल और आम्रफल की आहुतियां दी तो भगवान शंकर ने उन्हें दर्शन दिए। बिल्व और आम्रफल की आहुति के फलस्वरूप इस शिवलिंग का उद्भव होने से ये बिल्वामृतेश्वर कहलाए। भगवान बिल्वामृतेश्वर पुण्य सलिला नर्मदा नदी के सुरम्य बेंट टापू के उन्नत भाग पर स्थित है। टापू पर 30 हजार वर्गफीट पर यह मंदिर स्थित है।

 

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महाशिवरात्रि पर निकलती है शाही सवारी
प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के एक दिन पूर्व भगवान् श्री बिल्वामृतेश्वर महादेव के रजत मुकुट चांदी के स्वरूप को शाही सवारी के रूप में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में तहसील परिसर से नर्मदा के मध्य बेंट टापू स्थित बिल्वामृतेश्वर महादेव मंदिर तक लाने की प्राचीन परंपरा है। शाही सवारी में विभिन्न झांकियां, नृत्य दल, डीजे, हाथी, घोड़े, ऊंट, ढोल, ताशे, मलखंब, व्यायाम आदि का प्रदर्शन करने वाले समूह आदि शामिल रहते हैं। सवारी के अगले दिन महाशिवरात्रि पर देर रात से ही नर्मदा में स्नान व महादेव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का बेंट पहुंचने का सिलसिला प्रारंभ हो जाता है। महाशिवरात्रि पर सुबह से शाम तक करीब डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं।

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अर्जुन रिछारिया Incharge
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