1 हजार में लेकर 10 हजार में बेचते थे मार्कशीट, पूछताछ में हुआ खुलासा

बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला

इंदौर. फर्जी मार्कशीट के जरिए लाइसेंस व उम्र सर्टिफिकेट बनाने के मामले में पुलिस तीन स्कूलों की भी जांच कर रही है। आरोपियों के पास इन स्कूलों के नाम की ही मार्कशीट मिली हैं। आरोपी आरटीओ एजेंट एक हजार रुपए में मार्कशीट लेकर उसे दस हजार रुपए में बेच देता था।

टीआइ हीरा नगर राजीव भदौरिया ने बताया, सिका स्कूल कर्मचारी अनिल पाल के अपहरण मामले में गिरफ्तार किशोर खंडारे, मेघा खंडारे, रोनी शेख, लीमा हलधर के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी व नकली नोट बनाने का केस दर्ज किया है। इन चारों को पुलिस ने कोर्ट में पेश कर 16 फरवरी तक रिमांड पर लिया गया। इनमें से मेघा उर्फ बेगम खातून, रोनी व लीमा बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं।

 

आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने फर्जी मार्कशीट बनाने वाले अशोक अग्रवाल, शिवकुमार यादव व मार्कशीट इस्तेमाल करने वाले आरटीओ एजेंट बाबूलाल गौड़ को पकड़ा। अशोक के पास से तीन स्कूलों के नाम की फर्जी मार्कशीट मिली। पुलिस इन स्कूलों की भूमिका भी देख रही है।

ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए 5वीं व 8वीं की मार्कशीट जरूरी होती है। जिन लोगों के पास ये मार्कशीट नहीं होती, उनके लिए बाबूलाल एक हजार रुपए देकर अशोक से नकली मार्कशीट तैयार करवाता और जरूरतमंदों से इसके बदले दस हजार रुपए ले लेता। ड्राइविंग लाइसेंस की फीस भी 1500 रुपए अलग से लेता था। हीरा नगर पुलिस ने आरटीओ को पत्र लिखकर पूछा है कि बाबूलाल ने किन लोगों के लाइसेंस बनवाए हैं। इन लोगों से पूछताछ के साथ ही लाइसेंस निरस्त भी कराए जाएंगे।

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