औद्योगिक क्षेत्र पर 600 से ज्यादा आपत्तियां, किसानों को चाहिए चार गुना मुआवजा

पीएमओ की निगरानी में बन रहा प्लान

इंदौर. प्रदेश में मेक इन इंडिया की तर्ज पर मेक इन एमपी कार्यक्रम को साकार करने के लिए प्रधान मंत्री कार्यालय की निगरानी में प्रदेश में पहली बार औद्योगिक क्षेत्र का मास्टर प्लान बन रहा है। एकेवीएन द्वारा 12500 हैक्टेयर के प्रकाशित प्लान पर 600 से अधिक जमीन मालिकों ने आपत्ति लेते हुए चार गुना मुआवजा व आवासीय उपयोग का प्रतिशत बढ़ाने की मांग की है।
दरअसल, प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण बिना किसी मास्टर प्लान के किया जा रहा था, जिससे वहां पर सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास नहीं हो सका। फैक्ट्रियों के साथ ही सिर्फ पास की बसाहट व आसपास खेती की जमीनों पर कॉलोनियों का विकास हो रहा था। यह भी अवैध कॉलोनियों के रूप में। इन सभी को देखते हुए औद्योगिक केंद्र विकास निगम ने पीथमपुर के मास्टर प्लान की रूपरेखा तैयार कर प्रकाशित की है। इसमें 44 गांवों को शामिल किया गया है, जिसमें धार के 26 व इंदौर जिले के 18 गांव शामिल हैं। नगर पालिका क्षेत्र को छोड़ कर प्लान तैयार किया गया है। इस पर आपत्तियां बुलाई गई थीं। अब तक 600 आपत्तियां आई हैं। एकेवीएन एमडी कुमार पुरुषोत्तम के अनुसार आपत्तियां चार तरह के प्रारूप में हैं, जिन पर विचार कर निराकरण किया जाएगा।

8 सेक्टर में विकास
मास्टर प्लान के ड्रॉफ्ट के मुताबिक 44 गांवों का विकास 8 सेक्टरों में बांटकर किया जाएगा। हर सेक्टर उद्योगों के लिए जरूरी सुविधाओं से युक्त होगा। प्रारूप प्लॉन में जमीनों को उपयोग के आधार पर आरक्षित किया है। सुविधाओं, कनेक्टिविटी के लिए क्रॉस रोड, ग्रीन एरिया व हॉस्पिटल के लिए जमीनों का प्रावधान किया है।

मास्टर प्लान से फायदें
- मास्टर प्लान बनने के बाद क्षेत्र की सडक़ों का विस्तार हो सकेगा।
- नए क्षेत्रों में निर्धारित प्लान के अनुसार सडक़ें बनाई जाएंगी, जिससे औद्योगिक क्षेत्र से सटे राज्यों से कनेक्टिविटी में सुधार आएगा।
- जमीन होने पर सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर का भी विकास हो सकेगा, जिससे स्कूल, कॉलेज खुलेंगे।
- ड्रेनेज, कचरा निपटान, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, लोक सुविधा, लोक परिवहन का नेटवर्क बनाने में मदद मिलेगी।
- मास्टर प्लान लागू होने के बाद अनियंत्रित विकास पर रोक लगेगी।

इस तरह की आपत्तियां आईं
- जमीन मालिकों ने कहा, हमारी जमीन का अधिग्रहण नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत किया जाए। चार गुना मुआवजा मिले।
- पूरी जमीन का उपयोग औद्योगिक किया गया है, जिससे आवासीय कॉलोनियों की बसाहट दूर-दूर होगी। इसलिए इसका प्रतिशत अधिक होना चाहिए।
- सार्वजनिक उपयोग की जमीनों का प्रतिशत बढ़ाया जाए।
- हमारी जमीन खेती के लिए उपयुक्त है, इसका उपयोग ग्रीन बेल्ट ही रखा जाए।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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