सरकारी गारंटी में उलझा रोड का लोन

मास्टर प्लान की चार सडक़ों के लिए निगम ने मांगा है 171 करोड़ का लोन

By: रमेश वैद्य

Updated: 03 Apr 2021, 07:12 PM IST

इंदौर. विकास योजना-2021 में प्रस्तावित पांच रोड में से चार का निर्माण नगर निगम करने जा रहा है। इसके लिए हुडको से 171 करोड़ रुपए का लोन राज्य सरकार के माध्यम से लिया जा रहा है। लोन का प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजे दो महीने होने को आए है, लेकिन न तो अभी तक लोन मंजूर हुआ और न ही पैसा निगम खजाने में आया है। सरकार की गारंटी में लोन उलझ गया है। इस कारण रोड का काम अटक गया है, जबकि इस रोड को बनाने की प्लानिंग निगम ने कर रखी है। निगम को उम्मीद है कि जल्द ही पैसा मिल जाएगा और काम शुरू होगा।
निगम एमआर-3, 5, 9 और आरई-2 रोड का निर्माण कर रहा है, जो कि विकास योजना-2021 में पहले से प्रस्तावित है। एमआर-11 का निर्माण जहां इंदौर विकास प्राधिकरण करेगा, वहीं एमआर-9 रोड का मामला अभी उलझ गया है। निगम अभी इस रोड को नहीं बनाएगा, क्योंकि रोड को लेकर तकनीकी पेंच फंस गया है। इससे निपटने में निगम लगा है। विकास योजना-2021 में प्रस्तावित इन 5 मार्गों में से जिन चार रोड को निगम बना रहा है, उसकी लागत 300 करोड़ रुपए के आसपास है। निगम के पास इतना पैसा नहीं है। इसलिए राज्य सरकार के जरिए हुडक़ो से लोन लिया जा रहा है, जो कि 171 करोड़ रुपए का है। बाकी का पैसा निगम अपने स्तर पर जुटाएगा। लोन के लिए निगम योजना शाखा के अफसरों ने प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेज दिया है। इस प्रस्ताव को भेजे दो महीने हो गए, लेकिन न तो लोन मंजूर हुआ और न ही राशि निगम खजाने में आई है। कारण लोन को लेकर निगम ने गारंटी राज्य सरकार को लेने का पत्र लिखा है। अगर किसी स्थिति में निगम लोन नहीं चुका पाए तो सरकार लोन का भुगतान करेगी। इस ग्यारंटी के चलते लोन उलझ गया है, लेकिन निगम अफसरों का दावा है कि लोन की प्रक्रिया पूरी होने के साथ हुडक़ों लोन देने को तैयार है। सरकार के गारंटी देते ही लोन की राशि जल्दी मिलेगी और काम शुरू होगा, क्योंकि रोड निर्माण को लेकर प्लानिंग करने के साथ टेंडर पहले ही जारी हो चुके हैं।
सडक़ निर्माण के लिए सीमांकन सर्वे भी हुआ
लो न राशि मिलते ही सबसे पहले आरई-2 रोड का निर्माण होगा, जो कि भूरी टैकरी से नेमावर रोड होते हुए नायता मुंडला स्थित नए आरटीओ ऑफिस तक 4.5 किलो मीटर लंबी और 45 मीटर चौड़ी सडक़ बनेगी। आरई-2 की निर्माण लागत 42 करोड़ रुपए है। पहले चरण में 24 मीटर तक सीमेंट क्रांकीट किया जाएगा। इस पर लगभग 35 करोड़ रुपए खर्च होंगे। आरई-2 का सीमांकन और डिटेल सर्वे पूरा हो गया है, लेकिन पैसों के अभाव में निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। निगम ने एमआर-9 को छोडक़र एमआर-3 और एमआर-5 रोड बनाने की प्लानिंग भी कर रखी है। मालूम हो कि मास्टर प्लान की इन पांच रोड को बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की है और वे खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। बावजूद इसके निगम को पैसा नहीं मिल रहा हो रहा है।
बाधक निर्माण हो रहे चिन्हित
आरई-2 रोड बनाने के लिए सीमांकन और डिटेल सर्वे पूरा होने के बाद अब बाधक निर्माण चिन्हित किए जा रहे हैं। इसके लिए बाधक निर्माण का सर्वे कर चिन्ह लगाए जा रहे हैं। रोड निर्माण में कितने मकान बाधक है। इनकी वर्तमान में स्थिति क्या है, जो बस्तियां बसी हुई है, उनमें निवासरत लोगों के पास पट्टे व अन्य कोई दस्तावेज है क्या। रोड किनारे खाली जमीन कितनी है और खेत कितने आ रहे हैं। इन सब बिंदुओं पर सर्वे कर बाधक निर्माण पर चिन्हित किए जा रहे हैं। रोड में बाधक निर्माण हटाकर नगर निगम लोगों को एफएआर और टीडीआर का लाभ देगी।
टैक्स के जरिये चुकाएंगे लोन
निगम द्वारा सडक की सीमा से दोनों तरफ 3 स्टेज में अलग-अलग प्रतिशत में बेटरमेंट टैक्स वसूल किया जाएगा। सडक़ सीमा से दोनों तरफ पहले 45 मीटर तक 5 प्रतिशत, इसके बाद 90 मीटर तक 3 प्रतिशत और बचे हुए हिस्से में 2 प्रतिशत के हिसाब से बेटरमेंट टैक्स वसूल किया जाएगा। आरई-2 सडक की दोनों तरफ बाधक निर्माण का चिन्हांकन होने के बाद टैक्स का आकलन किया जाएगा और फिर वसूली की आगामी कार्रवाई होगी। इस टैक्स के जरिये ही निगम लोन की किस्त भरेगा।
गारंटी मिलते ही होगा लोन
मास्टर प्लान में प्रस्तावित रोड निर्माण के लिए हुडको से लोन लिया जा रहा है। राज्य सरकार के गारंटी देते ही निगम को राशि मिलेगी, जिससे रोड का निर्माण शुरू होगा।
अभय राजनगांवकर, अपर आयुक्त, योजना शाखा नगर निगम

रमेश वैद्य Desk
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