पायलेट की कमी होगी तो क्या रिक्शा चालक को बैठा देंगे

एनएमसी के विरोध में बोले आईएमए पदाधिकारी

इंदौर. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के गठन के लिए केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए बिल के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का विरोध जारी है। आईएमए पदाधिकारियों का कहना है, ब्रिज कोर्स कराकर आधुनिक इलाज के लिए आयुष डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन करना गलत है। कल पायलेट की कमी होने पर क्या सरकार रिक्शा चालक को ट्रेनिंग देकर प्लेन थमा देगी।
सोमवार को आईएमए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र ऐरन, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नटवर शारदा, इंदौर अध्यक्ष डॉ. अनिल विजयवर्गीय ने प्रेस वार्ता में यह बात कही। डॉ. ऐरन ने कहा, नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पूरी तरह से डॉक्टर विरोधी है। एक तरफ यूनिर्वसिटी 36 परीक्षा लेकर एमबीबीएस की डिग्री देती है, पर केन्द्र सरकार का कहना है कि एमबीबीएस की डिग्री तब तक नहीं मानेंगे, जब तक सभी डिग्रीधारी एक केन्द्रीय परीक्षा पास नहीं करेंगे। केन्द्रीय परीक्षा पास करने के बाद ही पता चलेगा कि कौन एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉक्टर अच्छा है या खराब। केन्द्रीय परीक्षा पास करने के बाद ही डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन होगा और सरकारी नौकरी और निजी प्रैक्टिस के लिए लाइसेंस मिलेगा। आंकड़े बताते हैं, ऐसी परीक्षा में यूनिवर्सिटी से मिले एमबीबीएस के 50 फीसदी डिग्रीधारी फेल हो जाते हैं। केन्द्र सरकार एक तरफ कहती है, डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्र में नहीं जाते हैं और दूसरी तरफ ऐसी परीक्षाओं के प्रावधान से 50 से 60 हजार बच्चे एमबीबीएस होने के बावजूद न तो सरकारी नौकरी कर पाएंगे और न ही निजी प्रैक्टिस कर पाएंगे।

राज्यों के अधिकार छिनने का आरोप
डॉ. शारदा ने कहा, अभी तक प्रत्येक राज्य से मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया में तीन प्रतिनिधि होते थे। एक चुनकर आते थे तो दूसरे मेडिकल यूनिवर्सिटी की ओर से और तीसरे राज्य सरकार द्वारा नामित होते थे, लेकिन नए बिल में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। बल्कि नए प्रावधान के मुताबिक देश के सभी राज्य मिलकर पांच प्रतिनिधि चुनेंगे और केन्द्र सरकार नियुक्त करेगी।

25 को महापंचायत
एनएमसी बिल के खिलाफ 25 मार्च को दिल्ली के इंदिरा गाधी स्टेडियम में देशभर के डॉक्टरों की महापंचायत बुलाई है। आईएमए की मांग है कि एनएमसी बिल को वापस लिया जाए। अगर सरकार आईएमए की मांग को नहीं मानती तो महापंचायत जो फैसला करेगा उसका पालन किया जाएगा।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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