मिलिए लेडी यायावर से, जिन पर देश की महिलाएं करती है Proud

मिलिए लेडी यायावर से, जिन पर देश की महिलाएं करती है Proud
meet Lady Traveler dr kaynat kazi

डॉ. कायनात जितना अच्छा लिखती हैं, उतनी ही अच्छी फोटोग्राफी भी करती हैं। वे यात्राओं के दौरान ब्लॉग भी लिखती है, जो खासे प्रसिद्ध हैं।


इंदौर. तीन साल पहले देशभर की यात्रा पर अपना शौक पूरा करने के लिए निकल पडऩा सहज निर्णय नहीं था, लेकिन शुरुआत की तो मंजिल मिलती गई।
देशभर में कई जगहों पर मुझे महिलाएं देखती हैं और मेरे बारे में उन्हें पता लगता है मैं उनकी आंखों में चमकते सितारे देखती हूं। वहीं पुरुष मेरे बारे में जानते हैं, तो उनका नजरिया बदलता है, वे भी जानते हैं, कि लड़कियां भी ट्रेवल कर सकती हैं। लोगों का पहला सवाल होता हैं, कि सुरक्षा को लेकर कोई असहज बात महसूस नहीं होती। यह कहना है ब्लॉगर, ट्रेवलर डॉ. कायनात काजी का। दिल्ली निवासी डॉ. कायनात हनुवंतिया से लौटते वक्त इंदौर पत्रिका कार्यालय आईं। यहां उन्होंने अपनी देशभर की विभिन्न यात्राओं के अनुभव साझा किए।

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ट्रैवलिंग हमें बहुत कुछ सिखाती है। इसमें मिले अनुभव आपको ट्रांसफॉर्म कर देते हैं। ट्रैवलिंग अपने आप में यूनिवर्सिटी की तरह है। कायनात हिंदी में ट्रैवल ब्लॉग और कहानियां लिखती हैं। ट्रैवलिंग और फोटोग्राफी उनका जुनून है। देश-विदेश में यायावरी के दौरान करीब एक लाख किमी यात्रा कर चुकी हैं और 25 हजार से तस्वीरें ले चुकी हैं। मौलिक लेखन और दमदार कंटेंट की वजह से कायनात के ब्लॉग दूसरों से अलग हैं। उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद में एक पारंपरिक मुस्लिम परिवार में पली-बढ़ी कायनात भीड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहती थीं। इसलिए एेसा क्षेत्र चुना, जिसमें अभी तक पुरुषों का ही वर्चस्व है। दूरदराज इलाकों में यायावरी को वैसे भी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता, लेकिन कायनात कहती हैं कि यकीन खुद पर हो तो सब आसान हो जाता है।

हिंदी साहित्य में पीएचडी कायनात राहगिरी नाम से हिंदी का प्रथम ट्रेवल फोटोग्राफी ब्लॉग लिखती हैं। उन्होंने बताया कि मैंने महसूस किया कि ट्रेवल ब्लॉग भी बहुत सारे हैं, फोटोग्राफी के भी खूब है। लेकिन हिंदी में एक भी ब्लॉग ऐसा नहीं जिसका कंटेंट अच्छा हो और फोटोग्राफ भी शानदार हो। इसी की कमी के चलते मैंने इसे पूरा करने का निर्णय लिया। फिर मेरे फोटोग्राफी ब्लॉग राहगिरी का जन्म हुआ।

बाजार कौन मेरी भाषा तय करने वाला
डॉ. कायनात जितना अच्छा लिखती हैं, उतनी ही अच्छी फोटोग्राफी भी करती हैं। वे यात्राओं के दौरान ब्लॉग भी लिखती है, जो खासे प्रसिद्ध हैं। खास बात यह है कि वे अंग्रेजी लेखन के बाजारवाद को ठोकर मारकर हिंदी से जुड़े नाते को लगातार जारी रख रही हैं। उन्होंने बताया कि संभावनाओं को देखें तो अंग्रेजी में अधिक मौके हैं, लेकिन बाजार मेरी भाषा तय नहीं कर सकता। पाठक हिंदी के सबसे अधिक है।

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देश की रगों में है अपनेपन का प्यार
देश के कोने-कोने की यात्रा के दौरान कई अपनेपन के वाक्ये सामने आए। डॉ. कायनात ने बताया कि मैं एक गांव में एक महिला से मिली। दोपहर का वक्त था, भोजन का भी समय हो गया था। उस महिला ने पूछा खाना कहां खाओगी, मैंने तपाक से जवाब दिया, मैं मैनेज कर लूंगी। फिर अचानक से उस महिला ने मेरा हाथ पकड़ लिया और अपनी रसोई में ले गई। उसने अपने हाथों से बाजरे की रोटी बनाई। वे रोटियां देश की रगों में अपनेपन के प्यार का अहसास करवा रही थीं, जो मैं कभी नहीं भूल पाउंगी। यात्रा के दौरान मैंने देखा कि भारत की सभ्यता में ही है, यात्रियों की मदद करने की परंपरा।

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मिल जाते हैं ट्रैवल एंजल
उन्होंने बताया, 'ट्रैवलिंग में कई मौके एेसे आते हैं जब स्थानीय व्यक्ति मदद करता है। कई बार वह हमारी भाषा नहीं समझ पाते, फिर भी मदद करते हैं। अपने घर में ठहराते हैं, खाना खिलाते हैं। एेसे ही ट्रैवल एंजल्स की मदद से टै्रवलिंग आसान हो जातीे है। हमारी संस्कृति मुसाफिर की मदद करना सिखाती है और गावों में ये बात आज भी है।'

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खुद को सुपीरियर न समझें
कायनात ने कहा, 'जब भी घुमक्कड़ी के लिए निकलें तो खुद को सुपीरियर न समझें। गांवों में जाएं तो वहां के लोगों के बीच दूध में शकर की तरह घुल जाएं। कोशिश करें कि उनके जैसे नजर आएं तब वे भी आप पर भरोसा करेंगे और आपकी मदद भी करेंगे।'

साहित्य से खोजें रास्ता
हिन्दी साहित्य में पीएचडी कर चुकी कायनात खुद भी कहानियां लिखती हैं। उनका कहना है, 'ट्रैवलिंग से पहले यात्रा संस्मरण खूब पढ़ें। हिन्दी में राहुल सांकृत्यायन के संस्मरण अदभुत हैं। अज्ञेय, कृष्णा सोबती ने भी अच्छा यात्रा साहित्य लिखा है।'

भारत दर्शन पर किताब

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कायनात कहती हैं, 'कहीं जाने से पहले योजना तो नहीं बनाती, लेकिन किसी जगह को जानने के लिए उनके त्योहार सबसे बड़े मददगार होते हैं। त्योहारों के जरिए वहां का खान-पान, रहन-सहन समझ में आता है। भारत दर्शन के अपने अनुभवों पर जल्द की एक किताब पूरी करने वाली हूं।'

ट्रैवलिंग में ये रखें पास
यायावरी परिवार के साथ या ग्रुप में नहीं हो सकती। अकेले जाना चाहिए, लेकिन कुछ चीजें साथ जरूर रखें। महिला हैं तो सुरक्षा के लिए पेपर स्प्रे की बॉटल। बेसिक मेडिकल किट, कुछ सूखी खाद्य सामग्री, फोल्डिंग चटाई। सर्दी में इनर थर्मल वियर, पतली लेयर वाले कपड़े, सुई-धागा, बेसिक मोबाइल, बैटरी बेकअप, कम्फर्टेबल जूते। सामान कम हो तो बेहतर रहेगा। कैप्सूल पैकिंग सीखें। सुनसान जगह पर न जाएं। कहीं कुछ भी गलत लगे तो वो जगह तुरंत छोड़ दें।

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