दो नए कॉलेजों की जुगाड़ में एमजीएम, मेडिकल कॉलेज की सीटों पर खतरा

दो नए कॉलेजों की जुगाड़ में एमजीएम, मेडिकल कॉलेज की सीटों पर खतरा

Amit Mandloi | Publish: Jul, 13 2018 05:08:16 PM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

लापरवाही की हद : जिम्मेदार समस्या का हल निकालने के बजाय करते रहे लीपापोती

रणवीरसिंह कंग. इंदौर. प्रदेश सरकार ने चुनावी वर्ष में ही 7 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए पूरा जोर लगाया, पर केवल दतिया कॉलेज को ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) से अनुमति मिल पाई। अब सुप्रीम कोर्ट में एमसीआइ के दौरों में ही खामियां गिनाकर दोबारा खंडवा, रतलाम और विदिशा मेडिकल कॉलेज में दौरा कराने की अनुमति ली गई है। इंदौर सर्कल में रतलाम और खंडवा मेडिकल कॉलेज में स्टाफ दिखाने के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज से स्टाफ भेजा जा रहा है। इससे नए सत्र में यहां बढऩे वाली 100 सीटों पर खतरा मंडराने लगा है। दरअसल, रतलाम और खंडवा मेडिकल कॉलेज को एमसीआइ की मान्यता नहीं मिलने पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पर्याप्त सुविधाएं और स्टाफ होने की बात कहकर एमसीआइ के दौरे पर ही सवाल उठाया गया। कोर्ट ने तीन मेडिकल कॉलेजों में दोबारा निरीक्षण के निर्देश दिए हैं, जो अधिकारियों के लिए चुनौती बन गया है। आला अफसरों ने जमीनी हकीकत पर ध्यान नहीं दिया और भर्ती प्रक्रिया समय रहते पूरी नहीं किी।

कमिश्नर हुए सक्रिय

खंडवा मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. संजय दादू ने ७० फीसदी भर्ती होने की बात भोपाल में कही थी, इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी गई। अब पता चला कि ५० फीसदी पद भी नहीं भर पाए हैं। इस पर कमिश्नर राघवेन्द्रसिंह ने पूरी प्रक्रिया अपने हाथ में लेते हुए भर्ती प्रक्रिया शुरू कराई। गुरुवार को सुबह से रात तक कमिश्नर कार्यालय में भर्ती प्रक्रिया जारी रही। नए भर्ती किए गए प्रोफेसर्स को शुक्रवार को ही चार्ज सौंपा जाएगा, ताकि एमसीआइ के दौरे में संख्या पूरी हो पाए।

तो नहीं होती फजीहत

- मार्डन, अरबिंदो, अमलतास मेडिकल कॉलेज का स्टाफ सरकारी कॉलेजों में आने को तैयार था, लेकिन जिम्मेदारों ने अपने परिवार और रसूखदारों की भर्ती करने को तवज्जो दी।
- भर्ती प्रक्रिया में रिटायर्ड प्रोफेसर्स को शामिल किया, लेकिन समय रहते संविदा नियुक्ति नहीं दी।
- मार्च में शुरू भर्ती प्रक्रिया अब तक पूर्ण नहीं कर पाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की।
- सीनियरटी के हिसाब से प्रमोशन देने की बजाए, मनमानी की गई। इससे सीनियर प्रोफसर्स में रोष पैदा हुआ और गुटबाजी हावी हो गई।

हर पांच साल में रजिस्ट्रेशन कराना होगा डॉक्टरों को

इंदौर. प्रदेश में प्रैक्टिस के लिए रजिस्ट्रेशन और एनओसी देने वाली मप्र मेडिकल काउंसिल ने स्थायी रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था बंद कर हर पांच साल में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। डॉक्टर्स एमपी ऑनलाइन के जरिए भोपाल स्थित दफ्तर जाए बिना नया रजिस्ट्रेशन या पुराना रजिस्ट्रेशन रिन्यू करवा पाएंगे। इसके लिए जरूरी दस्तावेज फाइल करना होंगे। प्रदेश में करीब 45 हजार डॉक्टर्स काउंसिल में रजिस्टर्ड हैं, जबकि १० हजार कम प्रैक्टिस कर रहे हैं। हर साल करीब 1600 नए डॉक्टर्स रजिस्टर्ड होते हैं।

दिसंबर तक एमआइसी की दीम करेगी दौरा

एमजीएम मेडिकल कॉलेज सहित प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों में अगले सत्र में १००-१०० सीट बढऩा है। इसके लिए दिसंबर तक एमसीआइ की टीम दौरा करेगी। दूसरे कॉलेजों में यहां से भले ही प्रोफेसर भेजे जा रहे हैं, लेकिन प्रमुख आधा दर्जन विभागों में 5 से 6 प्रोफेसर अब भी कम हैं। यहां तक की विस्तार के लिए चल रहा १५० करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट भी समय से पिछड़ चुका है।

- खंडवा मेडिकल कॉलेज के लिए भर्ती प्रक्रिया की जा रही है। एमसीआइ के सभी मापदंड पूरे कर लिए जाएंगे। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में विस्तार का प्रोजेक्ट चल रहा है, एमटीएच महिला अस्पताल की ओपीडी भी प्रस्तावित दौरे से पहले शुरू कर लेंगे।
डॉ. शरद थोरा, डीन एमजीएम मेडिकल कॉलेज

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