शुभ नहीं आरंभ...नर्मदा-शिप्रा यात्रा फ्लॉप

शुभ नहीं आरंभ...नर्मदा-शिप्रा यात्रा फ्लॉप

Mohit Panchal | Updated: 21 Aug 2018, 11:00:57 AM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

मंत्री रहे प्रकाश सोनकर के बेटे विजय यात्रा फ्लॉप

इंदौर। नर्मदा-शिप्रा यात्रा के जरिए सांवेर में पैठ बनाने उतरे मंत्री रहे प्रकाश सोनकर के बेटे विजय कमल का बोनीबट्टा ही बिगड़ गया। गांव-गांव जाकर न्योता बांटा, लेकिन यात्रा फ्लॉप हो गई। विधानसभा के जवाबदार भाजपाई भी नहीं पहुंचे। समापन पर दो हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई थी, लेकिन उसमें भी २५० ही पहुंचे।

नर्मदा को शिप्रा से जोडऩे के लिए पूर्व वन मंत्री प्रकाश सोनकर ने वर्षो तक यात्रा निकाली, जिसमें भारी भरकम लवाजमा रहता था। पूरी विधानसभा के कार्यकर्ता पहुंचते थे। सोनकर के नहीं रहने पर यात्रा निकलती जरूर थी, पर उस दम से नहीं। हालांकि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नर्मदा-शिप्रा लिंक परियोजना लाने के बाद वह बंद हो गई, जो तर्क संगत भी थी।

अचानक इस साल सोनकर के बेटे विजय कमल ने यात्रा निकालने की घोषणा कर दी। अंदर ही अंदर पूरी ताकत लगाकर तैयारियां भी की। सांवेर विधानसभा के सभी प्रमुख भाजपाइयों को न्योता दिया गया ताकि माहौल बन जाए। ढाई हजार कार्ड बांटने के बावजूद कल जब शिप्रा उद्गम स्थल से यात्रा शुरू हुई तो संख्या का इंतजार करना पड़ रहा था।

थोड़े बहुत जब आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से लड़के इकट्ठा हुए, तब यात्रा शुरू हुई। बकायदा डीजे की गाड़ी तैयार की गई थी तो उसके पीछे बर्फ से बने भोलेनाथ भी थे। यात्रा को १५ किमी का सफर तय करना था। कुछ लोगों ने आग्रह पर मंच लगाकर स्वागत किया, लेकिन उनकी भी संख्या गिनी चुनी थी। रास्तेभर ऐसा ही माहौल रहा।

पर्दे के पीछे की कहानी ये है कि यात्रा के जरिए विजय खुद को स्थापित करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन फ्लॉप हो गए। बताते हैं कि निमंत्रण देते समय विजय को कुछ लोगों ने समझाया भी था कि जब नर्मदा-शिप्रा लिंक परियोजना शुरू हो गई तो यात्रा का क्या तात्पर्य है? यात्रा निकालना बचकानी हरकत होगी। इसके बावजूद वे नहीं माने, जिसका अहसास यात्रा के बाद हुआ। हालत ये थी कि दो हजार से अधिक लोगों का भोजन बनाया गया था, जिसमें अरण्या गांव के लोग को मिलाकर ढाई सौ लोग पहुंचे।

पांच मंडल, साठ जवाबदार... सभी रहे नदारद
सांवेर विधानसभा से जुड़े भाजपा के सभी जवाबदार नेताओं को न्योता दिया गया था। साथ में मंत्री रहे सोनकर से जुड़े कार्यकर्ताओं को भी विशेष तौर पर बुलाया गया था, लेकिन कल कोई भी नहीं पहुंचा। सांवेर में पांच मंडल हैं और प्रत्येक में 60 कार्यकारिणी के जवाबदार हैं जबकि मोर्चा प्रकोष्ठ अलग है। मजेदार बात ये है कि जितने विधानसभा में होर्डिंग लगाए गए, उतनी संख्या भी नहीं थी।

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