गुंडों पर कार्रवाई का दंभ, नेताओं की गुंडागर्दी पर बगलें झांक रही पुलिस

रिवॉल्वर से धमकाने वाले विधायक प्रतिनिधि को नहीं किया गिरफ्तार, कई मामलों में ढीलपोल

इन पर कौन करेगा कार्रवाई...
इंदौर. गुंडों पर कड़ी कार्रवाई का दंभ दिखा रही पुलिस नेता व उनके समर्थकों की गिरफ्तारी की बात आते ही बचने का रास्ता खोजने लगती है। पहले तो किसी भी तरह की घटना में नेतागिरी सामने आते ही पुलिस केस ही दर्ज नहीं करती, दबाव में करना भी पड़े तो आरोपितों की गिरफ्तारी से बचने लगती है। जवाब मांगों तो बगलें झांकने लगती है या लीपापोती की कोशिश करती है।

ऐसे मामलों की लंबी फेहरिस्त है। ताजा मामला विधायक उषा ठाकुर के प्रतिनिधि वीरेंद्र रघुवंशी उर्फ गब्बर से जुड़ा है। 18 जनवरी को बिजली कंपनी के कार्यालय में अधिकारियों से मारपीट के साथ ही वीरेंद्र ने अफसर को रिवॉल्वर निकालकर धमकाया था। दो दिन बाद पुलिस ने वीरेंद्र के खिलाफ केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन शासकीय कार्य में बाधा की धारा नहीं लगाई।

दो दिन बाद यह धारा बढ़ी, लेकिन अब प्रावधानों का हवाला
देकर वीरेंद्र की गिरफ्तारी से बचा जा रहा है। इस बीच शासन ने वीरेंद्र को एल्डरमैन नामित भी कर दिया है। बाणगंगा पुलिस मामले में जांच जारी होने की बात कह कर पल्ला झाड़ रही है।

पुलिस को आईना दिखाते मामले
कुछ समय पहले कांग्रेस नेता सर्वेश तिवारी पर नगर निगम कर्मचारी से मारपीट का मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन जब विरोध हुआ तो इसे ठंडे बस्ते मेंं डाल दिया।

13 फरवरी 2017 को कांग्रेस नेता देवेंद्रसिंह यादव समर्थकों के साथ परदेशीपुरा थाने पर प्रदर्शन करने गए। वहां पार्षद चंदू शिंदे, जीतू यादव व अन्य भाजपाई ने कांग्रेसियों को पुलिस के सामने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था। दो दिन बाद पुलिस ने चंदू, जीतू यादव सहित 12 लोगों पर बलवे का केस दर्ज किया, गिरफ्तारी अब तक नहीं की। राजनीतिक दबाव में कांग्रेसियों पर भी केस दर्ज कर लिया। टीआई राजीव त्रिपाठी ने माना, चूंकि दोनों पक्षों पर केस दर्ज हुआ था इसलिए गिरफ्तारी नहीं कर जांच की जा रही है।

कांग्रेस से जुड़े विक्की रघुवंशी पर विजयनगर थाने में महिला ने धमकाने का केस एक साल पहले दर्ज कराया, लेकिन अब तक गिरफ्तारी नहीं की। विक्की पर पूर्व के भी मामले दर्ज हैं।

अक्टूबर 2017 में बिजली कनेक्शन काटने के दौरान बिजली कंपनी के अफसर के साथ भाजपा नेता स²ाम पठान ने मारपीट की। एक दिन बाद शासकीय कार्य में बाधा का केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के पीए रवि विजयवर्गीय के मामले में दो बार पुलिस दबाव में काम कर चुकी है। गाड़ी का हूटर बजाने पर मरीमाता चौराहे के पास डेढ़ साल पहले एएसआई बाबूलाल ने रवि को रोका तो उनसे विवाद किया था। राजनीतिक दबाव में रवि पर तो कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन एएसआई को अफसरों ने सस्पेंड कर दिया। ताजा मामले में फर्जी आम्र्स लाइसेंस के संदेही से पूछताछ करने गए क्राइम ब्रांच के सिपाही को रवि की शिकायत पर अफसरों ने तुरत-फुरत सस्पेंड कर दिया था।

सिपाही विवेक से मारपीट मामले में 2016 में केस दर्ज करने के बाद अन्नपूर्णा पुलिस ने महापौर मालिनी गौड़ के पुत्र एकलव्यसिंह का नाम शामिल किया था, लेकिन गिरफ्तारी का अब भी इंतजार है।

आरोपी के राजनीति से जुड़े होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। कई बार दूसरा पक्ष भी शिकायत करता है तो मामले में जांच कराना पड़ती है। कई मामलों में गिरफ्तारी भी हुई है। सभी मामलों को दिखवाकर गिरफ्तारी करेंगे।
हरिनारायणाचारी मिश्र, डीआईजी

अर्जुन रिछारिया Incharge
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