अपने ही पार्षद के घर से नहीं मिले भाजपा प्रत्याशी को वोट

अल्पसंख्यक मोर्चा के नेताओं की भूमिका पर उठे सवाल, भाजपा के अल्पसंख्यक पार्षद उस्मान पटेल का मामला, सिर्फ निगम चुनाव में ही मिलते हैं उन्हें वोट

By: Mohit Panchal

Published: 18 Dec 2018, 10:42 AM IST

इंदौर। ५० हजार से अधिक लोगों को सीधे सरकार की योजना का लाभ दिलाने वाले विधायक महेंद्र हार्डिया (बाबा) को जीतने में पसीना आ गया था। आखिरी राउंड तक उनका मैच फंसा हुआ था, जिसके फेर में बारीकी से मंथन हो रहा है। उसमें ये खुलासा हुआ कि भाजपा के एक अल्पसंख्यक पार्षद के परिवार ने ही उन्हें यानी भाजपा को वोट नहीं दिए। पांच नंबर में बड़े-बड़े दावे करने वाले अल्पंख्यक नेताओं के यहां भी यही हाल रहा।

पांच नंबर विधानसभा से विधायक महेंद्र हार्डिया लगातार चौथी बार जीत तो गए मगर मात्र ११०० वोटों से। उन्हें खुद समझ में नहीं आ रहा कि आखिर ऐसे हालात कैसे बन गए, जब उन्होंने सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इंदौर में सबसे ज्यादा ५० हजार हितग्राही कहीं हैं तो वे पांच नंबर में।

उसके बावजूद जीत इतने कम वोटों से हुई। इसको लेकर वे और टीम एक-एक बूथ की बारीकी से जांच कर रहे हैं। जोड़-घटाव लगाया जा रहा है कि आखिर हम कहां गच्चा खा गए, जो ऐसी परिस्थिति से सामना करना पड़ा। खजराना और आजाद नगर के बूथों की जांच के बाद उनकी जमीन हिल गई।

सबसे चौंकाने वाले आंकड़े खजराना में थे, जहां पर पार्षद और प्रदेश स्तर के अल्पसंख्यक नेता रहते हैं। खजराना से भाजपा पार्षद उस्मान पटेल का निवास बूथ नंबर १९६ पर आता है। उनके परिवार में ही ५० से अधिक मतदाता हैं और रिश्तेदार अलग शामिल हैं। इस बूथ से भाजपा को मात्र ३५ वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस के खाते में ५८८ वोट गए।

मजेदार बात ये है कि इस बूथ पर ५१ गैर मुस्लिम भी रहते हैं, जो परंपरागत भाजपाई वोटर हैं। अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि ३५ वोट में पटेल परिवार की कितनी भूमिका है? इसके अलावा बूथ नंबर १६१ में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश पदाधिकारी नासिर शाह रहते हैं। यहां से भाजपा को मात्र २८ वोट मिले हैं। इसके अलावा अन्नू पटेल के बूथ से ९ वोट मिले हैं, जिसमें १६ हिंदू रहते हैं, जो भाजपा से जुड़े हुए हैं। ऐसे ही हाल आजाद नगर के दिग्गज नेताओं के बूथों पर थे।

आजाद नगर में मिली थोड़ी राहत
खजराना से अच्छे वोट तो भाजपा को आजाद नगर में मिले अगर ये वोट नहीं मिलते तो हार्डिया की हालत खस्ता हो जाती। यहां पर कांग्रेस नेता शेख अलीम के भाई भाजपा नेता शेख असलम ने मेहनत की थी, जिसका असर भी दिखाई दिया। उन्होंने पहले ही हार्डिया को कुछ बूथों पर उनके द्वारा की गई मेहनत की जानकारी दे दी थी। उनके अलावा बाबू खां पंवार, डॉ. रज्जाक पटेल, असलम टीवी, शेख सज्जाद, वसीम खान, सुभान पटेल भी पुराने भाजपाई परिवार हैं।

वोट न गिरे तो फायदा
चलते चुनाव में भाजपा के कुछ मुस्लिम नेताओं ने माहौल को भांप लिया था। घर-घर जाकर कुछ लोगों ने कसमे-वादे कराए थे। इसके चलते उन्होंने विधायक हार्डिया व अन्य जवाबदार नेताओं को बोल दिया था कि वोट गिरेगा तो कांग्रेस को जाएगा। वोटिंग प्रतिशत कम रहने में ही हमारी भलाई है। फिर भी वोटिंग अच्छा हुआ और वे खुद के परिवार का वोट नहीं करा पाए, रिश्तेदार और पड़ोसी की बात तो दूर।

Mohit Panchal Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned