विरोध के बाद पीएससी ने वापस ली कई गुना फीस वृद्धि, आरक्षित और सामान्य वर्ग को देना होंगे इतने रुपए

  • मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी बताया था अनुचित कदम
  • इडब्ल्यूएस पर असमंजस बरकरार

इंदौर. मप्र लोक सेवा आयोग (एमपी पीएससी) ने भर्ती परीक्षाओं में कई गुना आवेदन फीस वृद्धि का फैसला वापस ले लिया है। इसे लेकर पीएससी को भारी विरोध झेलना पड़ रहा था। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस फैसले को युवाओं के साथ कुठाराघात और अनुचित कदम बताते हुए पुनर्विचार का आग्रह किया था।

विरोध के बाद पीएससी ने वापस ली कई गुना फीस वृद्धि, आरक्षित और सामान्य वर्ग को देना होंगे इतने रुपए

पीएससी ने लंबे इंतजार के बाद हाल में राज्य सेवा परीक्षा-2019 की घोषणा की है। इसमें आवेदन की फीस सीधे तीन गुना बढ़ा दी गई। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 500 की जगह 1500 रुपए और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों से 250 की जगह 750 रुपए वसूले जाने का चौतरफा विरोध शुरू हुआ। परीक्षा की तैयारी करने वालों का कहना था कि पीएससी समय पर परीक्षाएं नहीं कराकर पहले ही तनाव बढ़ा चुकी है। आवेदन की राशि बढ़ाकर आर्थिक बोझ भी थोप दिया। आखिरकार पीएससी ने सोमवार को आनन-फानन में बैठक बुलाकर फैसला वापस ले लिया।

अध्यक्ष भास्कर चौबे और सदस्य चंद्रशेखर रायकवार ने आवेदन फीस में संशोधन का प्रस्ताव पारित कर दिया। बैठक में निर्णय लिया कि सभी परीक्षाओं में पिछली परीक्षा का ही फीस स्ट्रक्चर लागू होगा। राज्य सेवा परीक्षा के लिए अब आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार 250 और सामान्य वर्ग के उम्मीदवार 500 रुपए में आवेदन कर सकेंगे। इसी तरह कृषि विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर पद के आवेदन की फीस में भी कटौती की गई। इसमें आरक्षित वर्ग वालों को 500 रुपए और सामान्य वर्ग वालों को एक हजार रुपए में आवेदन का मौका मिलेगा। पीएससी ने ये राशि बढ़ाकर 1250 और 2500 रुपए की थी।

विरोध के बाद पीएससी ने वापस ली कई गुना फीस वृद्धि, आरक्षित और सामान्य वर्ग को देना होंगे इतने रुपए

खाते में जमा होगी अंतर की राशि

दोनों भर्ती परीक्षा के आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कृषि विभाग के आवेदन १ नवंबर और राज्य सेवा परीक्षा के आवेदन 14 नवंबर से हो रहे है। आयोग ने अब तक आवेदन करने वालों को अंतर की राशि लौटाने का भी निर्णय लिया है। ये राशि उनके बैंक खाते में ही ट्रांसफर की जाएगी।

100 से 150 पद बढऩे की उम्मीद

कई विभागों ने अब तक मांगपत्र पीएससी को नहीं भेजा। इस वजह से इन विभागों के पद शामिल नहीं किए हैं। परीक्षा की घोषणा के बाद कुछ विभाग अब पीएससी से संपर्क कर रहे है। सप्ताहभर के भीतर वे मांगपत्र जारी कर सकते हैं। पीएससी सूत्रों के अनुसार इसी राज्य सेवा परीक्षा में 100 से 150 नए पद शामिल होने की उम्मीद है।

आरक्षण पर स्पष्ट नहीं स्थिति

भर्ती में 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) कोटे का पालन नहीं होने पर भी पीएससी चिंतित है। इसी साल से सरकार ने ये कोटा लागू किया। खाद्य और वित्त विभाग ने एक भी सीट ईडब्ल्यूएस में नहीं रखी है। इस वजह से 330 पद में से सिर्फ 19 पद ही इस कोटे में आरक्षित हो सके। सूत्रों के अनुसार पीएससी इन विभागों से भी स्थिति स्पष्ट करने के लिए संपर्क कर रही है। पीएससी की कोशिश है कि पद बढऩे के साथ ही ईडब्ल्यूएस के पद भी संशोधित कर दिए जाए।

हुसैन अली
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