तो गुंडे पीटते तहसीलदार और अफसरों को...

  • एमआर-9 शराब दुकान हटाने पर विवाद
  • गुंडों की फौज जमा कर रखी थी ठेकेदार ने

By: Pawan Rathore

Published: 24 May 2018, 12:00 PM IST

इंदौर।
एमआर-9 शराब की दुकान हटाने कल सुबह आईडीए का अमला पहुंचा तो ठेकेदार को इसकी खबर पहले से थी। कार्रवाई रोकने या यूं कहें कि बाधित करने के लिए उसने गुंडों की फौज जमा कर रखी थी। दुकान के बाहर ही नहीं बल्कि सड़क पर भी ठेकेदार के गुंडे मौजूद थे।
एमआर-9 शराब की दुकान को लेकर कलेक्टर के फोन के बाद आईडीए मोहलत देकर तो चला आया, लेकिन कलेक्टर का फोन ना आता तो भी कार्रवाई करना मुश्किल था। आईडीए के सहायक भूअर्जन अधिकारी तहसीलदार राजकुमार हलधर, कार्यपालन यंत्री घनश्याम शुक्ला टीम और जेसीबी लेकर मौके पर पहुंचे थे कि दुकान को हटा दिया जाएगा। ठेकेदार जसपाल सिंह भाटिया ने भी आईडीए टीम से निपटने का अपने स्तर पर पूरा इंतजाम कर रखा था।

प्राधिकरण टीम का मुकाबला करने के लिए उसने गुंडों और बाउंसरों की पूरी टीम लगा दी थी। दुकान के बाहर कम से कम एक दर्जन गुंडे कुर्सी डाले बैठे थे और बाहर सड़क पर खड़ी आधा दर्जन से अधिक गाडियों में भी जमे थे। चूंकि आईडीए अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की और मोहलत देकर लौट आए, नहीं तो लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बन जाती और मौके पर अप्रिय घटना भी हो सकती थी।
पुलिस बल और निगम अमला नहीं मिला
आईडीए को कल ना तो पुलिस बल मिला और ना ही नगर निगम का रिमूवल दस्ता। निगम ने तो यह कहकर मना कर दिया कि उनका पूरा अमला भूरी टेकरी पर लगा है, लेकिन कल जब वहां इतने गुंडे जमा थे, खजराना थाने से एक सिपाही तक वहां नहीं पहुंचा। जबकि आए दिन शराब पीने वालों की चेकिंग के लिए पूरी फौज खड़ी रहती है।
जमीन हमारी नोटिस कैसा
ठेकेदार जसपालसिंह तो मौके पर नहीं था, लेकिन खुद को उसका पुत्र बताने वाला रमणसिंह और उसके साथियों ने अधिकारियों से तीखी बहस की। वह लगातार लीगल नोटिस मांगता रहा। इस पर हलधर ने उसे आड़े हाथ लिया और साफ कर दिया कि जमीन उनकी है, वह अवैध रूप से कब्जा करके बैठा है। 31 मई तक नहीं खुद नहीं हटाया तो बुलडोजर चलवाकर साफ कर देंगे।
आबकारी विभाग करवाएगा एफआईआर
आबकारी विभाग के अफसरों की मौजूदगी में ही रमणसिंह आईडीए अफसरों को धमकाता रहा कि वह खुद तो एक-एक के खिलाफ नामजद पुलिस रिपोर्ट दर्ज करवाएगा और आबकारी विभाग भी उनके खिलाफ ऐसी एफआईआर दर्ज करवाएंगे। आबकारी विभाग की तरफ से एफआईआर करवाने की धमकी का विभाग के अफसरों ने जरा भी विरोध नहीं किया, बल्कि ठेकेदार का पक्ष लेकर आईडीए अफसरों को धमकाने में लगे रहे।

Pawan Rathore
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