LOKSABHA ELECTION : श्रीमतीजी के कंधों पर हैं महिलाओं को साधने की जिम्मेदारी

LOKSABHA ELECTION : श्रीमतीजी के कंधों पर हैं महिलाओं को साधने की जिम्मेदारी

Reena Sharma | Publish: May, 17 2019 11:52:16 AM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

चुनावी समर में पति की जीत के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं मिसेज लालवानी और मिसेज संघवी

इंदौर. घर का मैनेजमेंट तो उनके हाथ में है ही, अब वे चुनावी चौपालों में भी पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के प्रत्याशियों की पत्नियां इन दिनों महिलाओं को साधने में लगी हैं। मिसेज लालवानी हर रोज कम से कम तीन बैठकें ले रही हैं। साथ ही वे शंकर लालवानी के खाने का भी पूरा ध्यान रखती हैं। वे जहां भी होते हैं, दोपहर का खाना उन तक पहुंचा देती हैं। इसी तरह मिसेज संघवी भी सुबह 9 बजे से ही प्रचार के लिए निकल जाती हैं। वे सुबह 8 बजे पंकज संघवी की गाड़ी में छाछ और नारियल पानी रखवाना नहीं भूलतीं।

भाजपा प्रत्याशी शंकर लालवानी की पत्नी अमिता महिलाओं के समूह की बैठकें लेकर नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट की गुहार लगा रही हैं। वे बताती हैं, टिकट मिलने के बाद शुरुआती दिनों में तो नहीं, लेकिन 1 मई से रोज महिलाओं के ग्रुप के साथ कम से कम 3 बैठक ले रही हूं। सुबह करीब 10 बजे लालवानी जनसंपर्क के लिए रवाना होते हैं। घर के जरूरी काम के बाद करीब 12 बजे मैं भी बैठकों में हिस्सा लेने जाती हूं। करीब ३ बजे घर लौटकर कुछ देर आराम और शाम 5 से रात करीब 10 बजे तक फिर बैठकों का दौर होता है।

पहली बार पति के चुनाव में मैदान संभाल रही अमिता कहती हैं, बैठकों में महिलाओं की सबसे अधिक चिंता शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। आए दिन छोटी-छोटी बच्चियों से बलात्कार जैसी घटनाओं से महिलाएं चिंतित हैं। सभी कहती हैं, प्रदेश में शराब सहित अन्य नशों की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाई जाए। जनसंपर्क के दौरान लालवानी पत्नी के हाथ का बना खाना ही खाते हैं। अमिता बताती हैं, वे सुबह करीब 10 बजे नाश्ता कर घर से निकलते हैं। लंच के समय जहां भी होते हैं घर का खाना पहुंचाया जाता है। ग्राणीम क्षेत्रों में प्रचार होता है तो सुबह ही उनकी गाड़ी में पराठे रखे जाते हैं। लालवानी के प्रचार के लिए उनके लगभग सभी रिश्तेदार अलग-अलग शहरों से यहां आए हुए हैं।

कांग्रेस प्रत्याशी पंकज संघवी की पत्नी नीता महिला मित्रों के साथ विधानसभावार लगातार जनसंपर्क कर रही हैं। वे घर-घर दस्तक दे रही हैं, लोगों से चर्चा कर रही हैं, महिलाओं के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझने के साथ ही उनकी दिक्कतों को लेकर भी बात कर रही हैं। नीता बताती हैं, टिकट मिलने के बाद से ही वे अपने स्तर पर प्रचार में जुट गई थीं।

वे कहती हैं, महिलाओं के ग्रुप के साथ बैठक कर उनसे वोट देने का निवेदन कर रही हूं। ग्रामीणों से भी चर्चा करती हूं। शहरवासियों से कहती हूं कि इतने सालों में भाजपा की सांसद रहने के बाद भी अभी तक शहर की समस्याएं खत्म नहीं हो पाई हैं। संघवी के जनसंपर्क के लिए रवाना होने के बाद वे भी सुबह 9 बजे तक घर से निकल जाती हैं। वे दोपहर तक प्रचार करती हैं, फिर घर लौटते हैं और कुछ समय बैठकर आगे की स्थिति पर चर्चा करते हैं और उसके बाद शाम 4 बजे वापस रवाना हो जाते हैं तो रात को 10 बजे के बाद ही लौटते हैं। नीता कहती हैं पूरे शहर में सबसे बड़ा मुद्दा पानी है। जनसंपर्क के दौरान संघवी घर से बनी छाछ और नारीयल पानी ज्यादा से ज्यादा पी रहे हैं। सुबह करीब 8 बजे नाश्ता करने के बाद पंकज घर से निकलते हैं। सवेरे ही उनकी गाड़ी में छाछ और नारीयल पानी रखवा देती हूं। पूरा परिवार भी प्रचार में लगा है।

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