निगम में बेवजह बन रहा बजट

जिनका काम पूरा और जो नहीं हो रहे उनके लिए भी बजट तय

By: रमेश वैद्य

Published: 05 Feb 2021, 07:30 PM IST

इंदौर. केंद्र सरकार के बजट में सीधे इंदौर को भले ही कोई सौगात नहीं मिली। वहीं, इंदौर के हर एक नागरिक को प्रभावित करने वाले नगर निगम के बजट की कवायद जरूर शुरू हो गई है। शहर सरकार के बजट में कई ऐसे मामलों के लिए पैसा तय कर रखा है, जिनमें बरसों से काम ही नहीं हो रहा है।
हर साल 4 हजार करोड़ से ज्यादा का बजट नगर निगम पारित करता है। इसमें शहर में सडक़, यातायात, पानी, बिजली, उद्यान, सफाई, ड्रेनेज आदि पर खर्च होने वाले पैसों का हिसाब तय किया जाता है। लेकिन इसी बजट में कुश्ती स्पर्धा, निगम झुलाघर जैसी कई ऐसी सुविधाएं हैं, जो बरसों पहले ही बंद कर दी गई हैं, लेकिन इनके नाम पर बजट में अभी भी लाखों रुपए की राशि रखी जा रही है।
जेएनएनयूआरएम में अभी भी पैसा : ६ साल पहले केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीनिकरण अधोसंरचना मिशन को बंद कर दिया गया था। केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत फंडिंग बंद करने के साथ ही अमृत प्रोजेक्ट लांच किया था। वहीं नगर निगम में भी जेएनएनयूआरएम के तहत चल रहे काम २०१६ में लगभग पूरे हो गए थे। लेकिन नगर निगम के बजट में जेएनएनयूआरएम के लिए अभी भी पैसा तय किया जा रहा है। जबकि अमृत प्रोजेक्ट पर भी अलग से पैसा तय किया जा रहा है।

जो हैं ही नहीं वह भी बजट में
शहर से भले ही कचरा पेटियां पूरी तरह से गायब हो गई हैं, लेकिन नगर निगम के बजट में अभी भी कचरा पेटियां मौजूद हैं। न सिर्फ कचरा पेटियां, बल्कि उनके प्लेटफार्म भी मौजूद हैं। यही नहीं आवारा कुत्तों के काटने से जनता को होने वाली बीमारी का खर्चा, स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण पर खर्च भी निगम बजट में मौजूद है। इसी तरह से बरसों पहले ही डिब्बा बंद हो चुकी शांतीपथ से रामबाग मुक्तीधाम सस्पेंशन ब्रिज की योजना भी बजट में मौजूद है।
कई जरूरी मदों में पैसा रखकर भूले
नगर निगम के बजट में शहर के लिए कई जरूरी मदें रखी गई थी। लेकिन इस पर एक साल में कोई काम नहीं हुआ। निगम ने अग्रिशमन सेवा केंद्र के नाम पर १ करोड़़ और नई गौशाला बनाने के लिए १ करोड़ रुपए बजट में रखे थे, लेकिन इनमें से एक भी काम नहीं हुआ।
योजना और उन पर तय पैसा
हॉकर्स जोन का निर्माण
20 लाख
जेएनएनयूआरएम कीयोजनाओं के सर्वे के लिए
2 करोड़
जेएनएनयूआरएम के तहत पार्किग बनाने के लिए
75 लाख
गंगवाल सरवटे से मेंटेनेंस के रूप में मिलने वाली राशि
1.50 करोड़
गंदी बस्तियों में स्वास्थ्य शिविर लगाना
38 लाख (2 लाख प्रति जोन)
फायर हाइड्रेंट बदलना नए लगाना १ लाख
दुर्घटना बीमा योजना शहरवासियों के लिए
3 लाख
नाइट शेल्टर बनाना
50 लाख
निगमायुक्त कार्यालय में पीबीएक्स बोर्ड का रख-रखाव
2 लाख
मुशायरा आयोजन
5 लाख रुपए
पुर्वानुमान के चलते रखा जाता है पैसा
बजट में योजनाओं के हिसाब से पुर्वानुमान के चलते पैसा रखा जाता है। जो पैसा रखा गया है, वो केवल पुर्वानुमान के हिसाब से है। -वीरभद्र शर्मा, अपर आयुक्त

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