वायु प्रदूषण, दिल्ली में बिगड़ी आबोहवा, जानिए शहर में कैसा है पर्यावरण

वायु प्रदूषण, दिल्ली में बिगड़ी आबोहवा, जानिए शहर में कैसा है पर्यावरण
National Air Ambient Monitoring program air pollution measured in indore

Kamal Singh | Updated: 07 Nov 2016, 07:18:00 AM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

इंदौर की आबोहवा में नहीं आया बदलाव, स्थिति संतोषजनक, नेशनल एयर एंबियंट मॉनिटरिंग प्रोग्राम चलाकर शहर के तीन स्थानों पर मापा प्रदूषण का स्तर


इंदौर. दिल्ली की आबोहवा बिगडऩे की खबरों के बीच शहर के लिए ये अच्छी खबर है कि यहां का पर्यावरण बेहतर बना हुआ है। दिवाली पर भी इस बार प्रदूषण से जुड़े आंकड़े बेहतर आए थे तो उसके बाद भी स्थिति ठीक बनी हुई है। यह तब है, जब इंदौर वाहनों की संख्या के लिहाज से देश के टॉप शहरों में शामिल है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम में सुधार, डीजल से चलने वाले पुराने वाहनों के बाहर होने, कमर्शियल वाहनों में सीएनजी वाहनों की संख्या बढऩे जैसे कारणों से शहर की स्थिति संभली हुई है। देशभर में प्रदूषण को लेकर हंगामा मचने के दौरान प्रदूषण बोर्ड ने आंकड़ों की जांच की, तो स्थिति में बहुत बदलाव नहीं दिखा। अमूमन ठंड शुरू होने के बाद वायु प्रदूषण में थोड़ी बढ़ोतरी हो जाती है। नेशनल एयर एंबियंट मॉनिटरिंग प्रोग्राम में सांवेर रोड, कोठारी मार्केट और विजय नगर में तुलनात्मक रूप से प्रदूषण नियंत्रित नजर आ रहा है।

ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरा जलाने की घटना कम हुई : ट्रेचिंग ग्राउंड में कूड़ा जलाने की घटनाओं में कमी आई है, इससे भी पूर्वी शहर में धुएं की समस्या कम हुई है। कचरा निपटान की प्रोसेसिंग कर इसे लैंडफिल साइट में दबाया जा रहा है। प्लास्टिक कचरे का उपयोग सड़क बनाने में किया जा रहा है। कचरे में आग लगते ही बुझाने के लिए टैंकर तैनात कर दिए हैं।

air pollution

आरडीएस में कम मिले डस्ट पार्टिकल
बोर्ड सूत्रों का कहना है, चिह्नित केंद्रों में रिस्पायरेबल डस्ट सैंपलर (आरडीएस) से पीएम-10 और पीएम-2.5 के कण नापे जाते हैं। 10 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर के धूल के कण पीएम-10 और 2.5 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर के धूल के कण पीएम-2.5 हैं। आरडीएस से सल्फर डाई ऑक्साइड (एसओटू) और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड (एनओटू) नापते हैं। आंख से नहीं दिखने वाले 2.5 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर के धूल कणों को जांचने के लिए फिल्टर पेपर का उपयोग किया जाता है। हाल में हुई जांच में सबकुछ ठीकठाक रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो अरब सागर से हुई मॉइश्चर फीडिंग और अब ओस के कणों के कारण प्रदूषण के कण बैठ गए हैं।

air pollution
Show More

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned