गांवों में दिख रहे नए विदेशी पक्षी, इन देशों से आ रहे हैं

Arjun Richhariya

Publish: Dec, 08 2017 01:17:41 (IST) | Updated: Dec, 08 2017 03:22:07 (IST)

Indore, Madhya Pradesh, India
गांवों में दिख रहे नए विदेशी पक्षी, इन देशों से आ रहे हैं

ये मेहमान परिंदे अपने पसंदीदा जगह तलाशने के लिए सर्वे कर रहे हो। देखना यह है कि इंदौर के आसपास के तालाब और जंगल इन्हें पसंद आते हैं या नहीं।

इंदौर. शहर में सिरपुर तालाब हिमालयन एरिया और यूरोप से आने वाले प्रवासी पक्षियों का सबसे बड़ा और प्रमुख हेबिटेट है पर अब प्रवासी पक्षी नए आशियाने भी तलाश कर रहे हैं। कई पक्षी कई बरस बाद इस तरफ आए हैं। हो सकता है ये मेहमान परिंदे अपने पसंदीदा जगह तलाशने के लिए सर्वे कर रहे हो। देखना यह है कि इंदौर के आसपास के तालाब और जंगल इन्हें पसंद आते हैं या नहीं।

 

birds

बर्ड वॉचर रवि शर्मा ने बताया कि इस बार खंडवा रोड पर माचल के तालाब और नेमावर रोड पर अंदर की ओर बुरानाखेड़ी के तालाब में कई एेसे पक्षी दिखे हैं जो क्षेत्र में कई साल बाद आए हैं। एेसे पक्षियो में ट्रफ्टेड डक, यूरेशियन करल्युन, ग्रे लेग्ड गूज और यूरेशियन हबी शामिल हैं। ब्लैक हेडेड गल तो इस क्षेत्र में पहली बार ही दिखे हैं। द नेचर वालंटियर के अध्यक्ष भालू मोंढे ने बताया कि कभी-कभी एेसा होता है कि प्रवासी पक्षी नई जगह के लिए सर्वे करते हैं और जब जगह पसंद आ जाती है तो फिर वहां नियमित रूप से आने लगते हैं। इन कम दिखने वाले पक्षियों के साथ ही वे सारे पक्षी भी यहां हैं जो हर साल नजर आते हैं, जैसे सुरखाब, मार्श हैरियर, पिनटेल डक, नॉदर्न शवलर और पोचार्ड आदि।

 

birds

बिलावली में भी नए पक्षी
इस बार बिलावली तालाब में भी कुछ एेसे पक्षी दिख रहे हैं जो आमतौर पर यहां कम दिखते है। बार हेडेड गूज यहां पहली बार दिखे हैं। पेंटेड स्टार्क और स्पून बिल भी यहां दिख रहे हैं जो यहां पहले कम ही दिखते थे।

पानी की कमी का असर
रवि शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने साथियों के साथ जब इन क्षेत्रों को दौरा किया तो ये पाया कि जिन तालाबों में ये पक्षी डेरा डाल रहे हैं वहां पानी बहुत कम बचा है। कुछ तालाब तो सूखने वाले हैं। जहां पानी है वहां भी गांव के किसान खेती के लिए मोटर लगा कर पानी खींच रहे हैं। पानी की कमी को देखते हुए ये पक्षी कितने दिन यहां रह पाएंगे यह कहना मुश्किल है। शायद उन्हें कोई नई जगह देखने को मिले। वैसे ये जगहें शहरी शोर शराबे से दूर हैं, इसलिए ये इन्हें पसंद आई हैं पर पानी की कमी इनकी मुश्किलें बढ़ा देगी। तालाब की केवल मछलियां ही नहीं बल्कि जलीय वनस्पति भी इनका भोजन हैं।


रवि शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने साथियों के साथ जब इन क्षेत्रों को दौरा किया तो ये पाया कि जिन तालाबों में ये पक्षी डेरा डाल रहे हैं वहां पानी बहुत कम बचा है। कुछ तालाब तो सूखने वाले हैं। जहां पानी है वहां भी गांव के किसान खेती के लिए मोटर लगा कर पानी खींच रहे हैं। पानी की कमी को देखते हुए ये पक्षी कितने दिन यहां रह पाएंगे यह कहना मुश्किल है। शायद उन्हें कोई नई जगह देखने को मिले। वैसे ये जगहें शहरी शोर शराबे से दूर हैं, इसलिए ये इन्हें पसंद आई हैं पर पानी की कमी इनकी मुश्किलें बढ़ा देगी। तालाब की केवल मछलियां ही नहीं बल्कि जलीय वनस्पति भी इनका भोजन हैं।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned