विक्रम की तरह डीएवीवी में भी सीधी नियुक्ति के आसार

शासन और राजभवन में नहीं बन रही सहमति, जितनी देर होगी उतनी ही बढ़ती जाएगी नए कुलपति के सामने चुनौतियां

By: हुसैन अली

Updated: 01 Jul 2019, 02:41 PM IST

इंदौर. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में धारा-52 लगाना धीरे-धीरे शासन के ही गले की फांस बनता जा रहा है। पूरा सप्ताह बीतने के बावजूद नए कुलपति का नाम तय नहीं हो पाया। अब हालात ऐसे बन गए है कि शासन की पसंद के बजाय राजभवन सीधे कुलपति नियुक्त कर दें। इससे पहले उज्जैन की विक्रम यूनिवर्सिटी में भी धारा-52 लगने के बाद ऐसा कदम उठाया जा चुका है।

पिछले सोमवार से कुलपति की कुर्सी खाली रहने से यूनिवर्सिटी में करीब-करीब सभी काम ठप पड़े हैं। नियुक्ति में देरी की बड़ी वजह शासन और राजभवन के बीच खींचतान को माना जा रहा है। धारा-52 में नया कुलपति नियुक्त करने की प्रक्रिया के तहत शासन अपनी पसंद के तीन नाम की पेनल राजभवन को भेजता है। कुलाधिपति इनमें से किसी एक को कुलपति नियुक्त करते है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद सबसे पहले विक्रम यूनिवर्सिटी में धारा-52 लगाई गई। यहां के लिए शासन ने डॉ. मोरध्वज परिहार, डॉ.कमलेश मिश्रा व एक अन्य नाम राजभवन को भेजा, लेकिन कुलाधिपति ने तीनों को उपयुक्त नहीं बताते हुए फाइल लौटा दी।

कुलाधिपति की ओर से डॉ. शिवाकांत द्विवेदी, डॉ. बालकृष्ण शर्मा और डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव के नाम शासन को भिजवाए। मगर, शासन ने दोबारा पुराना पेनल राजभवन को इस आशा में भिजवाया कि देरी को देखते हुए कुलाधिपति की सहमति बन जाएगी। दोनों के बीच तालमेल नहीं बन पाने पर राजभवन ने पटना हाईकोर्ट के एक आदेश के साथ विधि विभाग के अभिमत को आधार बनाया और विक्रम यूनिवर्सिटी के डॉ. बालकृष्ण शर्मा को कुलपति बना दिया। डीएवीवी के लिए भी शासन और राजभवन के बीच खींचतान की स्थिति को देखते हुए पूरे आसार हैं कि कुलाधिपति अपनी पसंद के किसी शिक्षाविद् को सीधे कुलपति नियुक्त कर दें।

एक हजार से ज्यादा डिग्री, सैकड़ों फाइल पेंडिंग

कुलपति चयन में हो रही देरी से नए कुलपति के सामने कम चुनौती नहीं रहेगी। सोमवार से शनिवार तक एक हजार से ज्यादा डिग्री के आवेदन हुए हैं। डिग्री पर कुलपति के ही साइन जरूरी हैं। इसके अलावा सैकड़ों फाइलें पेंडिंग है। कुलपति के सामने हर प्रकरण और फाइल नई होने से इन्हें निपटाने में कई दिन लग जाएंगे।

सीईटी अधर में, नैक भी सिर पर

पहली प्राथमिकता अधर में अटकी सीईटी की रहेगी। सीईटी देने वाले कई छात्र देरी की वजह से अन्य संस्थानों में एडमिशन ले रहे हैं। इस सत्र में सेल्फ फाइनेंस विभागों की सीट खाली रहने के आसार है। अगर दोबारा से परीक्षा होती है तो रिजल्ट जारी करने से लेकर काउंसलिंग कराने तक में 15 दिन लगेंगे। छात्र सीईटी काउंसलिंग का इंतजार करेंगे तो दूसरे कॉलेज में एडमिशन का मौका भी छिन सकता है। सीईटी के साथ नैक की तैयारियों को भी समझना जरूरी होगा। नैक का दौरा अगले ही कुछ माह में प्रस्तावित है। प्रो. धाकड़ ने इसके लिए अलग-अलग कमेटियां बनाई थीं, जो उनके जाने के बाद से निष्क्रिय हो गई हैं।

हुसैन अली
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