scriptold woman got justice as wife from family court | अनोखा मामलाः पीछा छुड़ाने पति ने पत्नी को बताया बहन, ऐसे सामने आई हकीकत | Patrika News

अनोखा मामलाः पीछा छुड़ाने पति ने पत्नी को बताया बहन, ऐसे सामने आई हकीकत

राशन कार्ड सहित अन्य दस्तावेज से साबित हुआ पति-पत्नी का रिश्ता, भरण पोषण से बचने के लिए कोर्ट में नहीं माना था रिश्ता, अब हर महीने देना होंगे 4 हजार रुपए...।

इंदौर

Published: January 11, 2022 11:44:59 am

इंदौर. पांच साल तक कानूनी लड़ाई लडऩे के बाद 73 वर्ष की महिला ने 75 साल के पति से पत्नी होने का हक हासिल किया है। जीवन यापन के लिए हर माह भरण पोषण हासिल करने के लिए महिला ने 2016 में कुटुम्ब न्यायालय में केस दायर किया तो पति ने उसे पत्नी मानने से ही इनकार कर दिया और महिला को अपनी बहन बताया। कोर्ट ने राशन कार्ड, किराए के मकान के रसीद सहित अन्य दस्तावेज को सही पाते हुए महिला को पत्नी का हक दिया है। साथ ही महिला को चार हजार रुपए महीना भरण पोषण राशि देने के भी आदेश दिए हैं।

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अक्टूबर 2016 में केस दायर होने से लेकर अब की राशि भी 75 वर्षीय पति को चुकाना होगी, जो करीब 2.52 लाख रुपए है। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश प्रवीणा व्यास की कोर्ट से सोमवार को आदेश सुनाया गया है। महिला की वकील प्रीति मेहना ने बताया, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में आदेश दिया है कि लम्बे समय तक साथ में रहने के बाद पति-पत्नी के रिश्ते को नकारा नहीं जा सकता है।

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IMAGE CREDIT: Patrika

मेहना ने बताया, इंदौर में रहने वाली महिला का करीब 40 साल पहले महाराष्ट्र के यवतमाल में रहने वाले सुरेश (परिवर्तित नाम) के साथ विवाह हुआ था। शादी के बाद से 1997 तक दोनों इंदौर में ही रहते थे। 1997 में सुरेश की मां की तबीयत खराब होने पर वह पत्नी को छोड़कर वहां चला गया। हर तीन-चार माह में महिला को गुजारा भत्ता देता था। वह महिला को महाराष्ट्र नहीं ले गया। सास की देखभाल के लिए महिला कई बार महाराष्ट्र गई।

2007 में पति ने महिला को इंदौर भेजकर ससुराल आने से मनाकर दिया। 2008 से गुजारा भत्ता देना भी बंद कर दिया। वहां जाने पर पत्नी से विवाद किया। लगातार पैसे नहीं मिलने पर वकील के माध्यम से कई नोटिस भेजे, लेकिन भरण पोषण नहीं देने पर 2016 में कुटुम्ब न्यायालय में केस दायर किया था। सुनवाई के दौरान सुरेश ने पत्नी मानने से इनकार करते हुए कहा मैं तो बहन के रूप में साथ रखता था, यह मेरी पत्नी नहीं है। लेकिन महिला द्वारा पेश राशन कार्ड सहित अन्य दस्तावेजों से पति का झूठ सामने आ गया और कोर्ट ने भरण पोषण देने के आदेश दिए हैं।

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