उद्योग की जमीन पर बसा हुआ है अवैध सर्वानंद नगर

उद्योग की जमीन पर बसा हुआ है अवैध सर्वानंद नगर

Hussain Ali | Updated: 20 Jul 2019, 05:18:09 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

आठ साल से हो रहे अवैध निर्माण, नहीं दिया ध्यान

इंदौर.सर्वानंद नगर जिस जमीन पर बसा है, वह मास्टर प्लान में उद्योग के लिए आरक्षित है। उसके बावजूद संस्था ने प्लॉट काटकर सदस्यों को बेच दिए। नगर निगम से नक्शे पास भी नहीं हो सकते थे, फिर भी पूरी कॉलोनी में होस्टल बनकर तैयार हो गए। ये सारा खेल आठ साल में हुआ और वह भी निगम अफसरों की आंखों के सामने, क्योंकि बिलावली जोन सामने ही है।

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मंगलवार को नगर निगम की जनसुनवाई में शिवमपुरी और ब्रह्मपुरी रहवासी संघ के लोग निगमायुक्त आशीष सिंह से मिले थे।

उन्होंने शिकायत की थी कि क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध होस्टलों का निर्माण हो रहा है खासतौर पर सर्वानंद नगर में। ऐसी स्थिति हो गई है कि पूरा क्षेत्र होस्टलों का दिखाई दे रहा है। इसको लेकर सिंह ने जांच के साथ तोडऩे के आदेश दे दिए। कार्रवाई दुरुस्त रहे, जिसको लेकर टीम एसडीएम शाश्वत शर्मा और उपायुक्त महेंद्रसिंह के नेतृत्व में सर्वानंद नगर पहुंची। जांच के दौरान 70 होस्टल पाए गए तो कई होटलें भी मिलीं। जब शर्मा ने रिपोर्ट पेश की तब सिंह के साथ में कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव भी मौजूद थे।

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आयुक्त सिंह ने तुरंत भवन अधिकारी विवेश जैन को सस्पेंड कर दिया। इस पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि सिर्फ जैन ही क्यों? उद्योग की जमीन पर बसे सर्वानंद नगर में आठ साल से अवैध निर्माण चल रहा है। देखते ही देखते १०० से अधिक निर्माण हो गए हैं जिसमें होस्टल, होटल और मकान भी शामिल हैं। जब नगर निगम से नक्शा पास नहीं था तो अवैध निर्माण कैसे हो गए, जबकि जोन कार्यालय सामने है। आठ साल में इस जोन पर पदस्थ सभी भवन अधिकारी इसके लिए दोषी हैं। उन पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए।

अफसरों ने शिकायत कर दी खत्म

धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण को देखते हुए आसपास के रहवासियों ने सीएम हेल्पलाइन में कई बार शिकायत की। निगम के अफसर मान लेते थे कि अवैध निर्माण हो रहा है, लेकिन अपर लेवल पर फाइल जाने के बाद मामला ठंडा पड़ जाता था। बाद में गलत तरीके से शिकायतों का निराकरण कर दिया जाता था।

आश्वस्त हैं होस्टल संचालक

गौरतलब है कि सर्वानंद नगर के होस्टल संचालक पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि कोई कार्रवाई नहीं होगी। उन्हें विश्वास है कि हमेशा की तरह माहौल बनेगा और सरकार की ओर से दबाव आने पर निगम के अफसर अपने कदम पीछे ले लेंगे।

ये है कॉलोनी का इतिहास

सर्वानंद गृह निर्माण सहकारी संस्था ने पीपल्याराव की जिस जमीन पर सर्वानंद नगर नाम की कॉलोनी काटी है, उसका मास्टर प्लान में भू उपयोग औद्योगिक है। संस्था के पास करीब 15 एकड़ जमीन थी, जिस पर जमीन के जादूगर बॉबी छाबड़ा का कब्जा रहा। सैकड़ों सदस्य प्लॉट लेने के लिए लाइन में लगे रहे, लेकिन नए सदस्य बनाकर जमीन बेच दी गई। विवाद के दौरान छाबड़ा ने रातोरात पूरी कॉलोनी में अवैध झोपड़े तैयार करवा दिए थे। उसे देख पुराने सदस्यों ने पीछे हटना मुनासिब समझा। जब सब गायब हो गए तो बस्ती को भी गायब करवा दिया। कॉलोनी अवैध होने से नगर निगम अधिकृत तौर पर नक्शा पास नहीं कर सकता।

नगर निगम जवाबदार

निर्माण की अनुमति मिलना संभव नहीं है। इसके बावजूद कॉलोनी के कई प्लॉटों पर मकान बन गए। दो-तीन बड़े होटल भी तन गए। लोगों ने मकान बनाकर होस्टल का कामकाज शुरू कर दिया, जिसमें मोटी रकम हर माह उनके हाथ लग रही है। लगातार इमारतें बन रही हैं, लेकिन सरकारी महकमे की ओर से देखने वाला कोई नहीं है, जबकि अवैध निर्माण न हों, ये देखने के लिए जवाबदार नगर निगम है।

जोन के सामने ही है कॉलोनी

कॉलोनी के ठीक सामने बिलावली जोन का कार्यालय है। कॉलोनी में एक के बाद एक मकान, मल्टी, होटलें और होस्टल तन गए, वह भी बिना नक्शे के। इस पर न तो अफसरों ने आपत्ति ली और न अवैध निर्माण पर कार्रवाई की। कई बार शिकायतें भी की गईं, लेकिन सांठगांठ के चलते मामले को रफा-दफा कर दिया गया। कई बार तो शिकायतकर्ता को भी धमकियां मिलीं।

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