नोएडा, गुवाहाटी और महाराष्ट्र में ठगी के कॉल सेंटर बंद होने के बाद इंदौर बना नया ठिकाना

नोएडा, गुवाहाटी और महाराष्ट्र में ठगी के कॉल सेंटर बंद होने के बाद इंदौर बना नया ठिकाना

Hussain Ali | Updated: 12 Jun 2019, 01:46:26 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

78 आरोपी गिरफ्तार, इंटनेशनल कॉल सेंटर की आड़ में ठगी का धंधा

इंदौर. सायबर सेल ने अमरीकी नागरिकों को धमकाकर ठगने वाले दो इंटनेशनल कॉल सेंटर पकड़े। यहां काम करने वाले 19 युवतियों समेत 78 लोगों से गिरोह का सरगना अमरीकी सोशल सिक्योरिटी और एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के नाम से सोशल सिक्योरिटी नंबर ब्लॉक करने का झांसा देकर ठगता था। एसपी जितेंद्रसिंह ने बताया धोखाधड़ी व आइटी एक्ट की धाराओं में कॉल सेंटर से 78 आरोपियों को गिरफ्तार किया। उन्होंनेे बताया, अधिकतर आरोपी मुंबई, नोएडा, गुवाहाटी और महाराष्ट्र में ठगी करने वाले कॉल सेंटर में काम कर चुके हैं। वहां कॉल सेंटर बंद हुए तो यहां आ गए। इसी कारण इंदौर नया ठिकाना बनता जा रहा है। गिरफ्त में आए 75 आरोपियों को अमरीकी एक्सेन्ट का ज्ञान है। वे आसानी से अमरीकियों को जाल में फंसा लेते थे। जावेद और राहिल ऐसे लोगों को यहां लाकर पिनेकल ड्रीम्स व श्रीराम पैलेस कॉलोनी में रखते थे। कॉल करने वाले को 22 हजार रुपए महीना वेतन, रहने खाने की व्यवस्था और ठगी पर एन्सेंटिव दिया जाता था। सितंबर 2018 में भोपाल में ऐसा ही एक कॉल सेंटर पकड़ा गया था, जो लोन सेटलमेंट के नाम पर ठगी करता था।

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ऐसे करते थे वसूली

1. गिफ्ट कॉर्ड: संबंधित व्यक्ति से 50 से 100 डॉलर का गिफ्ट कार्ड खरीदने के बाद स्क्रैच कर उसका गोपनीय नंबर हासिल करते। यह नंबर वेंडर को बेचते जो कार्ड की कीमत का 60त्न हवाला करता।
2. बिट क्वाइन: अवैध कारोबार में बिट क्वाइन चलता है, जिसका कोई हिसाब नहीं होता। यहां भी 60 प्रतिशत पैसा ही मिलता है।
3. वायर ट्रांसफर: इसमें फर्जी सामान खरीदने के एवज में पैसा ट्रांसफर किया जाता है।
4. बैंक अकाउंट: अमरीकी अकाउंट नंबर से राशि वसूलते थे। अकाउंट नंबर कैसे मिलते, इसकी जांच की जा रही है।
10 लाख अमरीकी लोगों का डाटा

आरोपियों के पास करीब 10 लाख अमरीकियों का डाटा बैस उपलब्ध है। पहले वे वेबसाइट से डाटा मिलने की बात कह रहे थे पर बाद में पता चला वेंडर्स के जरिए नंबर मिले। अमरीका की सोशल सिक्योरिटी एंड एंडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट के नाम से सोशल मीडिया के जरिए टारगेट नंबर पर मैसेज भेजते, जिसमें कहा जाता संबंधित व्यक्ति की ड्रग डिलिंग, मनी लांड्रिंग में लिप्तता सामने आई है। सोशल सिक्योरिटी नंबर बंद हो सकता है। हेल्पलाइन नंबर पर फोन करें। मैसेज में हेल्पलाइन नंबर रहता था। यहां से ठगी की पूरी कहानी बुनते।

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लंबे समय से मिल रही थी शिकायत

गिरोह की लंबे समय से शिकायत मिल रही थी। इसके लिए हमने निरीक्षक राशिद अहमद, उप निरीक्षक आमोद राठौर, विनोद राठौर, संजय चौधरी, रीना चौहान, पूजा मूवेल, अम्बाराम, प्रधान आरक्षक प्रभाकर महाजन, आरक्षक राकेश, रमेश, विजय, विक्रान्त, आनंद, दिनेश और राहुल की टीम बनाकर गिरोह के दो अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और जप्त रिकॉर्ड की छानबीन के आधार पर काफी सबूत और मिलने की संभावना है।

सी 21 मॉल के पिछले हिस्से की दो बिल्डिगों में कॉल सेंटर चल रहे थे। यहां रात होने पर अमरीका में दिन होता था, इसलिए रात में सारा काम होता था। पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद दो बसों में लेकर पेशी के लिए पहुंची। आरोपित गिरफ्तारी के बाद भी लोगों से अभद्रता कर रहे थे, उन्हें किसी तरह का अफसोस नहीं था।

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