scriptOrder secured on cancellation of lease of 42 acres land | हुकमचंद मिल की साढ़े 42 एकड़ जमीन की लीज निरस्ती पर आदेश सुरक्षित | Patrika News

हुकमचंद मिल की साढ़े 42 एकड़ जमीन की लीज निरस्ती पर आदेश सुरक्षित

- मजदूरों की 21 साल पुरानी लीज निरस्त करने की याचिका से जुड़े आवेदन पर करीब एक घंटे बहस

 

इंदौर

Updated: January 14, 2022 08:09:13 pm

नगर निगम के तर्क

1- मजूदरों के पैसे चुकाना हमारी जिम्मेदारी नहीं

2- उद्योग चलाने को दी थी जमीन3- उद्योग नहीं चल रहा तो कर सकते हैं लीज निरस्त

इंदौर. हुकमंचद मिल की करीब साढ़े 42 एकड़ जमीन की लीज नगर निगम निरस्त कर सकता है या नहीं, हाई कोर्ट ने इस बिंदु पर आदेश सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ में करीब एक घंटे तक मजदूरों से जुड़ी 21 साल पुरानी याचिका पर बहस हुई। मजदूरों के वकील का कहना था कि जब तक मजदूरों को उनके हक के 179 करोड़ रुपए नहीं मिल जाते हैं, तब तक जमीन की लीज निरस्त नहीं की जानी चाहिए। लीज निरस्त होने से मजदूरों को पैसा मिलने की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होगी। पूर्व में हाई कोर्ट भी लीज निरस्त नहीं करने को लेकर निर्देश जारी कर चुका है। नगर निगम के वकील का तर्क था कि मिल बंद होने से निगम को अधिकार है कि वह जमीन पर कब्जाकर उसकी लीज निरस्त कर सकता है। मजदूरों के पैसे को लेकर शासन के पास लंबित प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। परिसमापक के वकील भी लीज निरस्ती के खिलाफ थे। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है।
हुकमचंद मिल की साढ़े 42 एकड़ जमीन की लीज निरस्ती पर आदेश सुरक्षित
हुकमचंद मिल की साढ़े 42 एकड़ जमीन की लीज निरस्ती पर आदेश सुरक्षित
मजदूरों की परेशानी

कोर्ट ने नगर निगम को मजदूरों के पैसे चुकाने से जुड़ा टाइम बाउंड प्रोग्राम पेश करने के आदेश दिए थे, लेकिन इस बार भी निगम के वकील ने इसे पेश नहीं किया है। इसके अलावा मिल की जमीन को नीलाम कर मजदूरों सहित अन्य पक्षों की देनदारियां चुकाने के आदेश भी कोर्ट से दिए गए हैं, लेकिन कागजी खानापूर्ति के चलते इस पर अमल नहीं हुआ।
- अगले सप्ताह फैसले की उम्मीदमामले में अगले सप्ताह फैसला आने की उम्मीद है। करीब 30 वर्ष पहले हुकमचंद मिल बंद हुई थी। मिल के 5800 मजदूरों का 229 करोड़ रुपए बकाया था। अब तक सिर्फ 50 करोड़ रुपए मिले हैं। 179 करोड़ रुपए बाकी हैं। 2200 मजदूरों की मौत हो चुकी है और उनके वारिस हक के पैसों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
धीरज, मजदूरों के वकील

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