मरीज जमा नहीं कर सका 2.5 लाख का बिल तो अस्पताल ने साढ़े तीन महीने तक नहीं दी छुट्टी

मरीज जमा नहीं कर सका 2.5 लाख का बिल तो अस्पताल ने साढ़े तीन महीने तक नहीं दी छुट्टी

By: हुसैन अली

Updated: 29 Mar 2019, 05:57 PM IST

इंदौर. शहर के निजी अस्पताल बॉम्बे हॉस्पिटल की अमानवीयता सामने आई है। बुजुर्ग मरीज ठीक होने के बाद इलाज के दो लाख से ज्यादा का बिल जमा नहीं कर सका तो अस्पताल ने उसे जनरल वार्ड में 113 दिन (करीब 3.5 महीने) तक भर्ती रखा। पत्नी अस्पताल प्रबंधन से मिन्नतें करती रही, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। गुरुवार को हंगामा मचने पर अस्पताल प्रबंधन ने बिना बिल जमा करवाए मरीज को घर भिजवा दिया। पति को अचानक घर आया देख पत्नी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

जानकारी के अनुसार नर्मदा विकास संभाग क्र. 8 में चौकीदार चंद्रशेखर शर्मा की तबीयत खराब होने पर 2 नवंबर 2018 को उन्हें बॉम्बे अस्पताल में भर्ती किया गया। भर्ती करते ही परिजनों से 20 हजार रुपए जमा करवाए गए। एक महीने बाद 6 दिसंबर को ठीक होने पर जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। 8 दिसंबर को अस्पताल ने 2 लाख ५8 हजार रुपए बकाया का बिल थमा दिया। परिजन ने मुख्यमंत्री सहायता योजना से 75 हजार रुपए की सहायता ली। बेटे राहुल शर्मा ने बताया कि घर में रखे एक लाख रुपए गोली-दवाई में खर्च हो गए। पिताजी के दिसंबर में रिटायर होने पर राशि चुकाने को कहा, लेकिन अस्पताल ने छुट्टी नहीं दी। जनरल वार्ड में भर्ती रहने पर दोनों टाइम खाना और चाय दी जा रही थी। मरीज शर्मा को अस्पताल में भर्ती रहने के कारण तीन माह से वेतन भी नहीं मिल पाया। मरीज का 28 मार्च तक का जनरल वार्ड का बिल ही 51 हजार रुपए हो गया।

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85 हजार डॉक्टर की फीस

मरीज को 2 लाख ५8 हजार 649 रुपए का बिल दिया गया है। बिल में 2 नवंबर से जनरल वार्ड में पहुंचने तक डॉक्टर की फीस ही 85 हजार 900 रुपए जोड़ी है। इसके अलावा 53 हजार 200 रुपए आईसीयू चार्ज लगाया है। वहीं सरचार्ज भी 33947 रुपए, मेडिकल गैस 24720 रुपए के अलावा अन्य फीस जोड़ी गई है।

विभाग ने भी लिखकर दिया, उसे भी नकारा

कार्यपालन यंत्री नर्मदा विकास क्रमांक 8 सनावद की तरफ से भी अस्पताल को पत्र लिखा गया। इसमें चंद्रशेखर शर्मा के अनुभागीय अधिकारी नर्मदा विकास उपसंभाग क्र. पीपलगोन जिला खरगोन में चौकीदार के पद पर कार्यरत होना बताया। उनके दिसंबर 2019 में सेवानिवृत्त होने पर मिलने वाली राशि से भुगतान करने की बात कही गया। अस्पताल ने इसे फर्जी लेटर बताकर डिस्चार्ज से मना कर दिया।

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सीएमएचओ से गुहार

मरीज की पत्नी माया शर्मा ने बताया कि हमने रिटायरमेंट की राशि से भुगतान करने की बात कही लेकिन अस्पताल ने मना कर दिया। जनरल वार्ड में ही भर्ती रखा। इसे लेकर सीएमएचओ से भी मिलने गई थी।

मरीज खुद नहीं जाना चाहते थे - जीएम

बॉम्बे अस्पताल के जीएम राहुल पाराशर का इस मामले में कहना है कि यह मरीज हमारे यहां पर भर्ती थे। 20 हजार रुपए जमा किए थे। दो से ढाई लाख रुपए बिल होने पर परिजन मरीज को छोडक़र चले गए। हम लगातार फोन पर संपर्क करते रहे लेकिन कोई सही जवाब नहीं मिला। इनके विभाग में भी बात कर जितना बिल दे सके, उतना भरने को कहा। चार दिन पहले आर्मी के कोई रिटायर्ड पर्सन आकर अस्पताल में हंगामा करने लगे। हमने उनकी शिकायत पुलिस में भी की है। मरीज के साथ वाले कोई नहीं थे। इसलिए वे खुद भी अस्पताल से नहीं जाना चाहते थे। हमने अब उन्हें डिस्चार्ज कर दिया है।

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