scriptPatwaris lost their senses, there was a stir | पटवारियों के उड़ गए होश, मचा हड़कंप | Patrika News

पटवारियों के उड़ गए होश, मचा हड़कंप

भारी गड़बड़ी : वेब जीआईएस सॉफ्टवेयर में आई खराबी ने बढ़ा दी धड़कन
- पटवारियों के आईडी पर आए प्रदेशभर के बैंक बंधक प्रकरण
- दिनभर होते रहे परेशान, विभाग से की शिकायत

इंदौर

Published: March 31, 2022 11:38:02 am

इंदौर. जमीन का रिकॉर्ड रखने वाले वेब जीआईएस सॉफ्टवेयर में भारी गड़बड़ी सामने आई है। प्रदेश के कई जिलों के बैंक बंधक प्रकरण इंदौर के पटवारियों के खाते में दर्ज हो गए। कुछ का आंकड़ा तो हजार से दो हजार तक चला गया, जिसे देखकर उनके होश उड़ गए। शिकायतों का दौर चला तो हड़कंप मच गया।
पटवारियों के उड़ गए होश, मचा हड़कंप
पटवारियों के उड़ गए होश, मचा हड़कंप

कृषि भूमि पर जब भी बैंक लोन देती है तो सरकारी रिकॉर्ड में उसकी एंट्री हो जाती है ताकि भविष्य में जब खरीद-बेच करना हो तो लेने वाले को सारी जानकारी रहे। जब किसान लोन चुका देता है तो तुरंत एंट्री हट भी जाती है। बैंक बंधक प्रकरण की एंट्री सरकार के जमीन संबंधित सॉफ्टवेयर यानी वेब जीआईएस में होती है। इसके अलावा जमीन के नामांतरण से लेकर बटांकन और अन्य प्रकार की जानकारी भी उसके माध्यम से ही दर्ज की जाती है।

दर्ज हो गए 2088 केस
सोमवार को इंदौर के कई पटवारियों के होश फाख्ता हो गए। हुआ यों कि वेब जीआईएस में गड़बड़ी आ गई। प्रदेश के कई जिलों में बैंक बंधक के प्रकरण पटवारी आईडी पर चले गए। आंकड़ा धड़ाधड़ बढ़ रहा था। पटवारी सत्यार्थ शर्मा के खाते में तो 2088 प्रकरण दर्ज हो गए। जब आंकड़ा देखा तो वे भी चौंक गए। उन्हें लगा कि अचानक इतने केस उनके क्षेत्र में कैसे आ गए, जबकि क्षेत्र में सालभर में भी इतने केस नहीं आते हैं। इसके अलावा सभी पटवारियों के खाते में धड़ाधड़ इन प्रकरणों की एंट्री हो गई। जब जांच की गई तो चौंक गए। समझ आ गया कि बैतूल, विदिशा, सीहोर, आष्टा, धार और खरगोन के भी प्रकरण आ रहे हैं, जिनसे उनका कोई लेना-देना नहीं है। आखिर में मामले की जानकारी एडीए व भू-अभिलेख अधीक्षक कार्यालय के माध्यम से शिकायत कराई गई। ऐसे ही हाल प्रदेश के अन्य जिलों के हो रहे हैं।
ऐसे होता है काम
वेब जीआईएस सॉफ्टवेयर में मध्यप्रदेश के सभी जमीन संबंधित रिकॉर्ड होते हैं। खरीदने पर नामांतरण, बंटवारा होने पर बटांकन किया जाता है। इसके अलावा एक बड़ा काम बैंकों का बंधकनामा भी उसके माध्यम से होता है। किसान किसी भी बैंक से लोन लेता है तो जमीन को गिरवी रखा जाता है, तब बैंक खसरे में एंट्री करने के लिए उसकी सूचना वेब जीआईएस के माध्यम से आवेदन करता है। उसके बाद वह लिंक पटवारियों के खाते पर जाती है। जांच कराने के बाद तहसीलदार रिकॉर्ड में एंट्री करता है।

खड़े हो रहे अनेक सवाल
बैंक बंधक प्रकरणों के प्रदेश में इधर-उधर होने के बाद वेब जीआईएस सॉफ्टवेयर की विश्वसनीयता पर संकट खड़ा हो गया है। अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि ऐसे कभी जमीन मालिकों के नाम बदल गए तो, जमीन मालिकों के साथ खासा धोखा हो जाएगा।

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