पीनाज़ मसानी की शायरी में डूबा शहर

ग़ालिब से लेकर रघुनाथ सेठ की गजल पढ़ी

इंदौर पीनाज़ मसानी... नाम नहीं आवाज है। एेसी आवाज जो अल्लाह की रूहानियत का अहसास करवाती है। जब वे गजल गाती है तो लगता है कि गजलें गले से लिपट रही हो या फिर गुफ्तगू कर रही हो। कुछ गजलकारों ने कहा है कि गजल को मुकाम तक पहुंचाने में इनका जवाब नहीं। आवाज, बंदिशें, तलफ्फुज और ग्लैमराइज गायिकी के साथ भारतीयता का ‘पुट’ लिए हुए इनका व्यक्त्तिव पीनाज़ मसानी को सम्पूर्ण गजल गायिका बनाता है।
जानी-मानी गायिका मधुरानी की शिष्या पीनाज़ मसानी के शुक्रवार को डीएवीवी के आईएमएस ऑडिटोरियम में मंच पर पहुंचते ही श्रोताओं ने तालियों से स्वागत किया। इसके बाद शुरू हुआ गजलों का सिलसिला। शुरुआत में उन्होंने गजलकार इब्राहीम अश्क की गजल 'फिर हम तुम्हारे शहर में आकर’ पेश की। ढलती शाम के साथ कार्यक्रम परवान चढ़ता गया। उन्होंने मिर्जा गालिब की गजल ‘ये न हमारी किस्मत थी, मिसाल-ए-यार होता’ सुनाई। क्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने निदा फजली की दर्दभरी गजल ‘तनहा-तनहा दुख झेलेंगे, महफिल महफिल गाएंगे’ से समां बंधा। श्रद्धांजलि के तौर पर बेगम साहब अख्तर की ‘मोहब्बत तेरे आजम पर रोना आया’ सुना कर तालियां बटोरी। अपने अलहदा अंदाज को बरकरार रखते हुए उन्होंने तुम इतना क्यों मुस्कुरा रहे हो, आज जाने की जिद ना करो जैसी गजलों की शानदार प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की ताजगी को बरकरार रखते हुए उन्होंने रघुनाथ सेठजी की मशहूर गजल ‘दिल के आईने में यादों की चमक बाकी है, मेरी सांसों में अभी तेरी महक बाकी है’ से मोहब्बत का परिचय कराया। 14 से ज्यादा गजलों की बेहतरीन प्रस्तुति के साथ पीनाज़ ने कार्यक्रम का समापन ‘दमा दम मस्त कलंदर’ से किया।

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वार्षिक स्नेह सम्मेलन के उपलक्ष्य में कवि सम्मेलन
शासकीय निर्भयसिंह पटेल विज्ञान महाविद्यालय के वार्षिक स्नेह सम्मेलन के उपलक्ष्य में आयोजित कवि सम्मेलन में युवा कवियों ने अपनी राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं से मन में देशभक्ति के भाव जागृत किए। युवा कवियों ने अपनी कविता के माध्यम से वर्तमान समय की प्रमुख घटनाओं से भी अवगत करवाया। कार्यक्रम में देवास के कवि गोपाल मनहर ने श्रोताओं को गुदगुदाया। इसके बाद नादेल से आए कवि बलराम बल्लू ने कविताएं पेश की। राकेश दांगी ने अपनी कविताओं में कश्मीर की समस्या के साथ राष्ट्रवाद की ओर युवाओं का ध्यान आकर्षित किया। कवियों का स्वागत प्रिंसिपल डॉ. योगेंद्र नाथ ? शुक्ल व जनभागीदारी अध्यक्ष नरेंद्र सिरोहिया ने किया। मुख्य अतिथि शोभा चौहान थी।
ये हैं कुछ रचनाएं
मानवीयता के मंत्र को तार-तार कर दिया
कैसी है संस्कृति तेरी, कैसे संस्कार है
धोखेबाज दगे बाज यही तेरा काम ? काज
(कवि राकेश दांगी)
आज कलम कहती मुझसे, कवि तुम कड़वी बात लिखो ।
सच्चाई वाली राह चुन, तुम दुष्टों की जात लिखो ।
नहीं लिखो तुम पायल की रुन-झुन, न प्यार की सौगात लिखो ।
वतन पस्ती जान है, तो देश भक्ति जज्बात लिखो ।
(कवि मनहर गोपाल)

अर्जुन रिछारिया Incharge
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