कर्ज व पारिवारिक विवाद में हिम्मत हार रहे लोग

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस आज: काउंसलिंग व निगरानी से बचा सकते है जान

प्रमोद मिश्रा
इंदौर। कोरोनाकाल में बेरोजगारी व कर्ज एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रहे है। वर्ष 2021 में जान देने के मामलों में करीब 70 प्रतिशत के पीछे कर्ज व पारिवारक कारण बड़ा कारण बनकर उभरे है। ऐसे में विशेषज्ञों का मत है कि परिवार के लोगों को ज्यादा अपनों की ज्यादा निगरानी करना होगी। तनाव की स्थिति में सदस्य को अकेला नहीं छोड़े अन्यथा वे गलत कदम उठा लेते है।
वर्ष 2021 के शुरुआती आठ महीने में 163 आत्महत्या के मामले सामने आ चुके है। आत्महत्या के मामलों की समीक्षा से पता चलता है कि कोरोनाकाल में मामूली तनाव जानलेवा साबित हो रहा है इसलिए जरूरी है एक दूसरे की मदद करना, लगातार संपर्क बनाए रखा। सामाजिक संस्था उम्मीद का संचालक अुविनाश यादव के मुताबिक, कोरोना काल में लोगों की नौकरी, व्यापार-व्यवसाय पर बहुत असर पड़ा है। कई लोगों की नौकरी गई, धंधे खत्म हो गए है। ऐसे में कर्र्ज की परेशानी बढ जाती है। व्यापार के लिए लिया कर्ज नहीं चुका पाने पर मानसिक तनाव होता हैै और लोग आत्महत्या का कदम उठाते है। नौकरी व कर्ज का परिणिती पारिवारक विवाद में भी हो रही है। इन दो कारणों से लोगों ने ज्यादा आत्महत्या की हैै इसलिए इन मसलों पर ध्यान देना जरूरी है।

70 प्रतिशत आत्महत्या में पारिवारिक विवाद व कर्ज कारण
पुलिस व सामाजिक संस्था के लोग आत्महत्या के मामलोंं को लेकर लगातार काउंसलिग करते है। जिस व्यक्ति के डिप्रेशन में होने की बात सामने आती है या सूचना मिलती है तो पुलिस के प्रकोष्ठ संजीवनी की टीम अपने काउंसलर के जरिए मदद करते है।

आत्महत्या के तीन साल के मामले
वर्ष पारिवारिक विवाद कर्ज दोस्ती पढ़ाई प्रापर्टी आपसी विवाद बच्चों के विवाद कुल
2019 188 21 29 180 27 12 5 462
2020 101 76 119 6 67 7 3 279
2021 42 73 11 8 19 7 3 163 (अगस्त 2021)

कैसा तनाव: डांटने, बात नहीं मानने जैसे मामूली विवाद बन रहे
हाल ही में कुछ ऐसे मामले सामने आए जिसमें बच्चों ने आत्महत्या का कदम उठा लिया। 15 साल के बच्चे ने इसलिए जान दे दी कि उसे परिजनों ने ऑनलाइन गेम खेलने से रोका था।
- मनपसंद वस्तु नहीं दिलाने पर भी एक किशोर अपनी जीवन लीला समाप्त कर चुका है।
- फरवरी में गांधीनगर निवासी हार्दिक ने पत्नी से विवाद के बाद तीन मासूम बेटियों के सामने जहर खाकर जान दे दी।
- आटा फैक्टरी के मालिक की जहरीली वस्तु खाने से मौत हुई। मौत के पीछे कर्ज कारण सामने आया था।

सक्रियता का असर: पटरी तक पहुंच गई थी जान देने, बचाया
हाल ही में राऊ पुलिस ने दो महिलाओं को बचाकर फिर से परिवार के बीच पहुंचाया। पिछले सप्ताह ही यह दोनों मामले सामने आए है। दोनों ही मामलों में महिलाएं घरेलू विवाद के कारण जान देने के लिए रेलवे पटरी पर पहुंच गई थी। सजग पुलिस टीम ने उन्हें देख लिया और पटरी से हटाकर जान बचाई। काउंसलिंग के बाद विवाद का निपटारा कर दोनों को सकुशल घर पहुंचाया।

संजीवनी हेल्पलाइन-7049108080

कर्ज बन रहा परेशानी, परिवार को एकजुट होकर निपटना होगा
कोविड के कारण गतिविधियां सिमित हुई है। लोगों आर्थिक परेशानी ने घेर लिया है, जिसके कारण मामले बढ़े है। हाल ही में एक व्यक्ति का मामला सामने आया। व्यवसाय बढ़ानेे के लिए उन्होंने बढ़ा कर्ज लिया लेकिन किस्त नहीं दे पाने से डिप्रेेशन में थे। उन्हें व परिजनों को समझाइश दी गई कि अभी सभी के साथ समस्या है। एकजुट होकर निपटा जा सकता है। काउंसलिंग के बाद वे डिप्रेशन से बाहर भी आए। परिजनों को ध्यान देना होगा कि अगर कोई डिप्रेशन में है तो उसे अकेला न छोड़े।
राजश्री पाठक, काउंसलर

संजीवनी के जरिए कर रहे काउंसलिंग, परिजनों को भी ध्यान देने की जरूरत
पुलिस ने संजीवनी इकाई बनाई है जो डिप्रेशन में रहने वालोंं की काउंसलिंग करती है। कई लोगों की जान भी बचाई जा चुकी है। परिजनों की सूचना पर तुरंत कार्रवाई कर पुलिसकर्मी संबंधित व्यक्ति को लाते है। हाल ही में हीरानगर में एक व्यक्ति घरेलू विवाद में फांसी लगाने जा रहा था जिसे पुलिस टीम ने रोका। काउंसलिंग कर विवाद खत्म किया। ऐसे मामले में लगातार संबंधित की जानकारी ली जाती है ताकि वे फिर इस तरह के कदम के बारे में न सोचे। कोई व्यक्ति तनाव में दिखे तो उसे लेकर परिवार को भी निगरानी करने की जरूरत है। कोरोनाकाल में मामले बढे है जिसे देखते हुए संजीवनी इकाई के केंद्र दूसरे थानों में व रेंज के अन्य जिलों में भी खोलने की तैयारी है।
हरिनारायणाचारी मिश्रा, आइजी।

प्रमोद मिश्रा Reporting
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