कुत्तों से परेशान होकर हाईकोर्ट में लगाई याचिका

कुत्तों से परेशान होकर हाईकोर्ट में लगाई याचिका

Uttam Rathore | Publish: Sep, 11 2018 11:08:37 AM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

नगर निगम के ठोस कार्रवाई न करने पर नेता प्रतिपक्ष ने उठाया कदम, आए दिन लोगों पर हो रहे हमले

इंदौर.
कुत्तों के आंतक का मुद्दा कई बार निगम परिषद की बैठक में पार्षदों ने उठाया। आम जनता ने ढेरों शिकायत सीएम-महापौर हेल्पलाइन सहित जिम्मेदार अफसरों से कर रखी है, इसके बाद भी निगम नसबंदी के अलावा कुत्तों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। इसके चलते अब हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कुत्तों से मुक्ति दिलाने की मांग की गई है।

निगम में नेता प्रतिपक्ष फौजिया अलीम ने कांग्रेस पार्षद दल की तरफ से यह याचिका दायर कराई है, जिसे एडवोकेट अंनुशमन श्रीवास्तव और शेख अलीम के माध्यम से लगाया गया है। इसमें उन्होंने निगम द्वारा की जा रही कुत्तों की नसबंदी पर सवाल उठाया कि यह काम होने के बावजूद कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जांच होना चाहिए कि वाकई में कुत्तों की नसबंदी हो रही या नहीं, कुत्तों के द्वारा लोगों को काटे जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इनके आंतक को रोकने की ठोस कार्रवाई होना चाहिए।

रात में लोगों की निंद करते है खराब
शहर की कॉलोनी-मोहल्लों, प्रमुख मार्गों और चौराहों पर झूंड बनाकर घूमने वाले कुत्तों के आंतक के चलते आए दिन होने वाले हमलों से शहर की जनता खासी परेशाना है।हमले के साथ-साथ यह कुत्ते गली-मोहल्लों में रात-रातभर भौंकते रहते है। इससे लोगों की निंद अलग खराब होती है। कुत्तों के लपकने और काटने की घटना का शिकार शहर का हर तीसरा या चौथा व्यक्ति हो रहा है। खासकर महिला, बच्चें और बुजुर्ग लोग।


डॉग हाउस बनाने की मांग पर ध्यान नहीं
नेता प्रतिपक्ष अलीम ने कहा कि कांग्रेस पार्षद दल आवारा कुत्तों को पकडऩे और इन्हें डॉग हाउस में रखने के संबंध में महापौर मालिनी गौड़ सहित निगम अफसरों से मांग पिछले ३ से ४ वर्षों से की जा रही है, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया।

हर महीने 2800 शिकार
याचिका में बताया गया कि इस वर्ष जनवरी से अगस्त तक आवारा कुत्तों से काटने वाले पीडि़तों की संख्या चौंकाने वाली है। यह आंकड़ा रोजाना करीब 90 से 100 के आसपास है। इस तरह हर महीने 2800 लोग कुत्तों का शिकार हो रहे हैं।

पर्याप्त वैक्सीन नहीं
शहर में एक ही शासकीय अस्पताल हुकुमचंद पॉली क्लिनिक (लाल अस्पताल) में इलाज होता है, लेकिन यहां भी पर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, जबकि न्यायालय ने आदेश दिया है कि कुत्ते के काटने का इलाज तत्काल हो और शहर के सभी शासकीय अस्पताल में वैक्सीन उपलब्ध रहे। न्यायालय के आदेश का पालन स्वास्थ्य विभाग नहीं कर रहा और न ही निगम प्रशासन ध्यान दे रहा है।

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