बास्केट में कुत्तों को भरकर तस्करी करता था पुलिसवाला

बास्केट में कुत्तों को भरकर तस्करी करता था पुलिसवाला

nidhi awasthi | Publish: May, 18 2018 03:19:38 PM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

उज्जैन से बॉस्केट में रखकर बस में पहुंचाए थे श्वान

इंदौर @न्यूज टुडे. उज्जैन पुलिस में कार्यरत आरक्षक श्वानों की तस्करी कर रहा था। सूचना मिलने के बाद पशुओं के लिए कार्य करने वाली संस्था और पुलिस ने बस को रोका और दो बॉस्केट में रखे एक माह के इन श्वानों को जब्त किया, लेकिन पुलिस आरक्षक पर कार्रवाई नहीं की गई, जो कई शंकाओं को जन्म देता है।

जानकारी के अनुसार पशुओं के लिए काम करने वाली संस्था के पास बुधवार को फोन कर किसी व्यक्ति ने जानकारी दी थी कि उज्जैन से इंदौर आ रही बस के कैबिन में रखी दो बॉस्केट में पालतू श्वान के एक माह के छह बच्चे रखे हुए हैं। कॉल करने वाले ने यह भी बताया कि वह खुद इस बस में सफर कर रहा है। सूचना के बाद संस्था के सदस्यों ने बाणगंगा पुलिस से संपर्क किया। बस को अरविंदो हॉस्पिटल चौराहे पर रोककर तलाशी ली तो बस के कैबिन से बॉस्केट बरामद हुई, जिसमें श्वान के 6 बच्चे मिले। गर्मी और कैबिन में बोनट की तपन के कारण श्वानों की हालत खराब हो गई थी। इस दौरान बाणगंगा थाना प्रभारी तारेश कुमार सोनी भी मौके पर पहुंच गए थे। संस्था के सदस्यों ने मामले में प्रकरण दर्ज करने की बात कही तो वे टाल गए।

ऐसे पता चला पुलिसकर्मी का
जब श्वानों को संस्था द्वारा सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और मामले में प्रकरण दर्ज कराने की बात कही जाने लगी तो उज्जैन से संस्था सदस्यों के पास कॉल आने लगे, तब पता चला कि श्वान उज्जैन पुलिस में डॉग ट्रेनर के रूप में पदस्थ आरक्षक के हैं।

सीएसपी के पास पहुंचे
संस्था के सदस्य परदेशीपुरा सीएसपी हरीश मोटवानी के पास पहुंचे और उन्हें मामले से अवगत कराया। इस पर सीएसपी ने संस्था के सदस्यों से धाराओं के विषय में पूछा तो उन्होंने बताया कि पशु कू्ररता 1960, ट्रांसपोर्ट ऑफ एनीमल रूल 1978, डॉग ब्रिडिंग एंड मार्केटिंग रूल 2017 में प्रकरण दर्ज करने की बात कही। इस पर सीएसपी ने इन धाराओं की जानकारी पुख्ता की, जिससे पता चला कि प्रकरण बनता है।

अनुबंध कर सौंप दिया
गुरुवार को आरक्षक स्वयं ही संस्था के सदस्यों से संपर्क करने के बाद अपने श्वान लेने के लिए आ गया। पहले तो संस्था वालों ने मना कर दिया, लेकिन बाद में वे अनुबंध करने को तैयार हुए। श्वानों को इस शर्त के साथ सौंप दिया कि उनकी देखभाल पूरी तरह से की जाए। साथ ही इन्हें बेचने की स्थिति में सारे नियम कायदों का ध्यान रखा जाए और संस्था द्वारा हर तीन माह में इसकी जानकारी ली जाएगी। साथ ही अन्य शर्तें भी अनुबंध में लिखे जाने के बाद श्वानों को सौंप दिया गया।

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