विश्वविद्यालय कार्यपरिषद में सियासी घमासान, 22 में से सिर्फ 10 सदस्य

नियुक्तियों में राजभवन ने नहीं दिखाई दिलचस्पी

इंदौर. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी कार्यपरिषद मंजूर सदस्यों से आधे से भी कम में चल रही है। कुलाधिपति के नामित छह सदस्यों को छोड़ दें तो इसमें सिर्फ चार सदस्य हैं। रिक्त पद पर नियुक्तियों के लिए यूनिवर्सिटी फिर नामों की पैनल राजभवन को भेजेगी। यूनिवर्सिटी की सर्वोच्च बॉडी कार्यपरिषद में लंबे समय से सदस्यों की नियुक्ति नहीं हो रही है। इससे कई बैठकों में चर्चा औपचारिकता बनकर रह जाती है। हाल ही में हुई कुछ बैठकों में एक-दो सदस्यों की सहमति से ही सेल्फ फाइनेंस कर्मचारियों को एरियर राशि देने और सीईटी व डीईटी जैसी प्रवेश परीक्षाएं ऑनलाइन कराने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे बिना बहस के मंजूर हो गए। यूनिवर्सिटी से जुड़े शिक्षाविद् और पूर्व कार्यपरिषद् सदस्यों के अनुसार अभी जितने भी सदस्य हैं उन पर गैर-शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े सदस्य हावी हैं।

खाली होने से पहले भरे नामित सदस्यों के पद : डीन कोटे के चार और प्राचार्य कोटे के तीन पद रिक्त होने से कार्यपरिषद पर असर पड़ रहा है उनमें हैं। इनकी नियुक्ति के लिए कई बार राजभवन को पत्र लिख चुके हैं। 22 सदस्यीय कार्यपरिषद में सिर्फ कुलाधिपति द्वारा नामित ६ सदस्यों के पद खाली होने से पहले नियुक्ति आदेश जारी हो गए। अंतिम बार दो पद रिक्त होने से पहले कुलाधपति कोटे से नामित डॉ. मोहनलाल छीपा और रागिनी मक्खर का कार्यकाल अप्रैल 2020 तक रहेगा।

अभी ऐसी है कार्यपरिषद
कुलपति नरेंद्र धाकड़ (अध्यक्ष)
4 पद डीन कोटे से (सभी रिक्त)
3 पद विवि कोर्ट से (सभी रिक्त)
2 पद प्रोफेसर के (सभी रिक्त)
4 पद कॉलेज प्राचार्य के (सिर्फ एक सदस्य नामित)
6 पद कुलाधिपति नामित
(सभी 6 भरे)
1 उच्च शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि
1 वित्त विभाग के प्रतिनिधि

&डीन और प्रोफेसर कोटे से भी कार्यपरिषद में नियुक्तियां दी जाती है। सीनियरिटी की सूची राजभवन भिजवाई जा रही है।
जल्द नए सदस्यों की नियुक्ति की उम्मीद है।

-प्रो. नरेंद्र धाकड़, कुलपति
गंभीर मु²ों पर ठीक से नहीं हो पाती चर्चा
कार्यपरिषद में सदस्यों की कमी के कारण कई गंभीर पर भी ठीक से चर्चा नहीं हो पाती। दो साल में ऐसे कई फैसले हुए जिनमें शैक्षणिक अनुभव की कमी देखने को मिली है।

रिव्यू पर हुए दो फाड़
रिजल्ट जारी होने के बाद रिव्यू की प्रक्रिया जारी है। विवाद उठने पर यूनिवर्सिटी ने तीन महीने तक रिजल्ट रोक दिए थे। कार्यपरिषद ने कमेटी की रिपोर्ट दरकिनार कर रिव्यू जारी रखने को मंजूरी दे दी।

ऑनलाइन परीक्षा में गड़बड़ी
कुलपति ने अपने स्तर पर विभागों की प्रवेश परीक्षा सीईटी ऑनलाइन कराने का फैसला ले लिया। ऑडिट में आपत्ति के बाद कार्यपरिषद में मु²ा रखा। काउंसलिंग में भी बड़ी गड़बडिय़ां हुई।

अर्जुन रिछारिया Incharge
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned