भोग की थाली से गर्भवती और धात्रियों को मिलेगा पोषण, पूरे जिले में लागू होगी योजना

पोषण की कमी करेंगे दूर : दिल्ली-गुजरात की टीम ने भी किया दौरा

By: रीना शर्मा

Published: 01 Jul 2019, 01:44 PM IST

इंदौर. गर्भवती और धात्रियों में पोषण की कमी दूर करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग पूरे जिले में भोग की थाली (पौष्टिक थाली) योजना चलाएगा। इससे महिलाओं को पौष्टिक आहार मिलेगा, जिससे हीमोग्लोबिन से लेकर आयरन तक की कमी दूर होगी। विभाग ने योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बरदरी गांव में चलाया, जिसके सुखद परिणाम मिले। इसके लिए दिल्ली और गुजरात की टीम ने दौरा किया।

दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं परिवार के सदस्यों के बाद ही भोजन करती हैं, भले ही वह पौष्टिक न हो। पूरा पोषण नहीं मिलने से उनकी सेहत पर सीधा असर होता है, जबकि गर्भवती और धात्रियों को पोषण आहार की बहुत आवश्यकता होती है। पोषण आहार नहीं मिलने का असर बच्चे पर भी नजर आएगा। चुनाव में अफसरों की व्यस्तता के चलते इस योजना को जिले में लागू नहीं किया जा सका था।
तत्कालीन आयुक्त ने भी सराहा : पायलट प्रोजेक्ट देखने विभाग के तत्कालीन आयुक्त डॉ. अशोक भार्गव गांव में पहुंचे। उन महिलाओं के घर भी गए, जहां भोग की थाली लगाई जा रही थी। उन्होंने भी योजना को सराहा।
1839 जिले में आंगनवाड़ी केंद्र
7 परियोजना शहर में
8 परियोजना ग्रामीण में

एक गांव में पायलट प्रोजेक्ट पर शुरू

विभाग ने सबसे पहले महू ग्रामीण परियोजना के तहत शिवनगर ग्राम पंचायत के गांव बरदरी का चयन किया। यहां महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। इनमें 65 गर्भवती और धात्री में हीमोग्लोबिन और आयरन की कमी पाई गई। महिलाओं को समझाया गया, भोजन बनाते समय सबसे पहले भगवान के भोग की थाली निकालें। इसमें घर में बने सभी भोजन का भोग लगाएं। परिवार के सभी सदस्य भोजन कर लें तो अंत में इसी थाली का भोजन करें। योजना की शुरुआत से ही मॉनिटरिंग शुरू की गई। हर सप्ताह इन महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। दूसरे सप्ताह से उनका वजन बढऩे के साथ हीमोग्लोबिन और आयरन की कमी दूर होती दिखाई दी। दो महीने में स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव हुएा।

हालांकि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के साथ ही पर्यवेक्षक और परियोजना अधिकारी महू ग्रामीण सुशीलकुमार भी लगातार मॉनिटरिंग के साथ महिलाओं के परिजन को भी समझाइश दी। इसके बाद परियोजना अधिकारी ने 8 आंगनवाड़ी केंद्रों में भी भोग की थाली को बढ़ाया। वे अपनी परियोजना के तहत आने वाले 126 आंगनवाड़ी केंद्र में लागू कर रहे हैं।

गर्भवती और धात्रियों को पूरा पौष्टिक भोजन मिलने के उद्देश्य से महू के मजदूरों और निम्न वर्ग के ग्रामीणों के बीच भोग की थाली योजना शुरू की थी। इसके काफी अच्छे परिणाम मिले। इसे पूरे जिले में लागू किया जा रहा है।

विष्णुप्रताप राठौर, सहायक संचालक, महिला सशक्तिकरण अधिकारी

रीना शर्मा Desk
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