इंदौरी पोहा और शिकंजी की ब्रांडिंग में सहयोग का वादा

इंदौरी पोहा और शिकंजी की ब्रांडिंग में सहयोग का वादा

Reena Sharma | Publish: Jul, 20 2019 01:21:04 PM (IST) | Updated: Jul, 20 2019 01:34:35 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

नमकीन-मिष्ठान एसोसिएशन को कलेक्टर का आश्वासन, इंदौरी व्यंजन को जियोग्राफिकल इंडीकेशन दिलाने की तैयारी

इंदौर. बजट में पारंपरिक वस्तुओं और व्यंजनों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की घोषणा के बाद चार इंदौरी व्यंजनों को जियोग्राफिकल इंडिकेशन दिलाने की पहल तेजी से आगे बढ़ रही है। एमएसएमई मंत्रालय से अनुमति के बाद प्रशासन ने भी पूरे सहयोग का वादा किया है।

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कलेक्टर ने नमकीन-मिष्ठान एसोसिएशन इंदौर के प्रतिनिधिमंडल को सभी वस्तुओं के इतिहास के लिए सरकारी दस्तावेजों की तलाश कर आवेदन के साथ लगाने में पूरी मदद का आश्वासन दिया है। कलेक्टर ने कहा है कि यदि ऑर्गेनिक फूड का भी उपयोग करेंगे तो इसे भी जीआई टैग मिल सकेगा।

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शुक्रवार को एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कलेक्टर लोकेशकुमार जाटव से मुलाकात कर जीआई टैग के लिए किए जा रहे आवेदन की जानकारी देते हुए सहयोग मांगा। सचिव अनुराग बोथरा ने कलेक्टर को बताया, मालवा-निमाड़ अंचल में अनेक व्यंजनों का महत्व स्थानीय कम्युनिटी और क्षेत्र विशेष से जुड़ा है। मालवा के लड्डू-बाफले, चूरमा-बाटी, निमाड़ की खिचड़ी-कुरबड़ी, मक्का-ज्वार की रोटी-अंबाड़ी की भाजी, आदिवासी अंचल के दाल-पानिए, इंदौरी व्यंजनों में नाश्ता पोहा, शिकंजी, लौंग सेंव, खट्टा-मीठा मिक्चर की अलग पहचान है।

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पर्यटक इन क्षेत्रों में इनका मजा लेते हैं। व्यंजनों की पहचान स्थानीय कौशल पर निर्भर है, इसलिए व्यावसायिककरण नहीं हो रहा है। इनकी पहचान और पसंद के बाद भी कारोबारी को लाभ नहीं हो रहा है, जबकि हमारे उत्पाद गुणवत्ता व स्वाद के कारण अनेक देशों में लोकप्रिय हैं।

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पूरी दुनिया में हो रहा है इंदौरी व्यंजनों का एक्सपोर्ट

इंदौरी व्यंजनों के नाम से इनका एक्सपोर्ट दुनिया में हो रहा है। देश के अलग-अलग इलाकों में बिक रहे हैं, जबकि उनमें से 70% का निर्माण इंदौर में नहीं होता। इन व्यंजनों को जियोग्राफिकल इंडिकेशन मिलन से शहर को काफी फायदा होगा। प्रतिनिधिमंडल के साथ मौजूद एमएसएमई के सहायक संचालक निलेश त्रिवेदी ने जीआई टैग की जरूरी प्रक्रिया बताते हुए कहा, बौद्धिक संपदा अधिकार कार्यालय चेन्नई में आवेदन करेंगे।

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इसके लिए दस्तावेजी प्रमाण के लिए निगम-प्रशासन के पास मौजूद प्रमाण उपलब्ध करवाने का आग्रह किया। कलेक्टर ने पहल को अच्छा बताते हुए इसमें सहयोग के लिए आश्वस्त किया। इस मौके पर एसोसिएशन अध्यक्ष विकास जैन, श्याम शर्मा, प्रकाश जोशी, राजकुमार गुप्ता, अनिल सैनी, सुरेंद्र डाकलिया सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।

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ऐसी है प्रक्रिया

- भारत सरकार का उद्योग-व्यापार संवर्धन विभाग प्रदान करेगा।

- जियोग्राफिकल इंडिकेशन गुड्स अधिनियम 1999 के तहत जियोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री के लिए चेन्नई ऑफिस में आवेदन देना होगा।

- दस्तावेजी प्रमाण, लोकप्रियता के कारण, इतिहास, मार्केट आदि की जानकारी देंगे।

- विभाग से एक टीम दावे का परीक्षण करने इंदौर आएगी।

- ग्लोबल स्तर पर आपत्तियां बुलवाकर देखेंगे दावा कितना मजबूत है।

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वर्तमान में व्यापार

- नमकीन-मिठाई का कारोबार असंगठित है।

- 4000 से ज्यादा इकाइयां हैं।

- इनसे 1000 करोड़ रुपए का सालाना कारोबार।

- 1.25 लाख लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार।

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