पबजी बैन : अल्टरनेट गेम की लग रही युवाओं को लत

मानसिक रोग का शिकार हो रहे किशोर

By: रमेश वैद्य

Published: 09 Jan 2021, 06:52 PM IST

इंदौर. भले ही केंद्र सरकार के निर्देश पर देश में पब्जी गेम बंद हो गया है, लेकिन इसका अल्टरनेट आने के बाद किशोर और युवा इसकी लत का इस कदर शिकार हो रहे हैं कि वे अवसाद में आकर जान देने तक को तैयार हो जाते हैं। मामले में जब पड़ताल करते हुए काउंसलर व मनोरोग चिकित्सक से बात की तो सामने आया कि अधिकांश गेमिंग टॉरगेट और एक्शन गेम इस कदर किशोरों के मस्तिष्क पर हावी हो रहा है, वे हकीकत की दुनिया में जीना छोड़ वच्र्युल गेमिंग दुनिया को ही अपनी जिंदगी मान रहे हैं। इस तरह के केस शहर में काउंसलर और मनोरोग चिकित्सक के पास बढे़ हैं।
‘गेम ही कॅरियर’
शहर के शिक्षक दम्पती ने बताया कि उनकी बेटी दसवीं की टॉपर रही है। वहीं, कुछ साल पहले वह ऑनलाइन पब्जी गेम से खेलना शुरू किया। गेम कि दीवानगी इस कदर हावी हुई कि वह रात-रात भर सोती नहीं और दोपहर में दो बजे उठती। बच्ची के पिता ने बताया कि पब्जी बैन होने पर परिवार के लोग खुश हुए थे, लेकिन कुछ ही दिन में उसने उसका अलर्टनेट गेम ढूंढ निकाला। उस गेम के जरिए उसने देशभर में फ्रैंड बना लिए, उन्हीं की बातें वह मानती है। जब उससे कॅरियर की बात करो तो उसे उसका कॅरियर गेमिंग ही लगता है। वह पांच मिनट भी अपने मोबाइल को नहीं छोड़ती, वह इस हद तक चिड़चिड़ी हो गई कि हम उसे डांटते हैं, तो वह सुसाइड जैसे कदम उठाने पर उतारु हो जाती है। अभी फिलहाल उसका इलाज चल रहा है।
तीन-तीन दिन तक भी नहीं नहाता
कॉ लेज में पढ़ाने वाली टीचर्स ने बताया कि उनका बेटा १२ तक टॉपर था। कॉलेज में एडमिशन के बाद उसे मोबाइल दिया गया। मोबाइल पर वह गेम खेलने क ा एडिक्ट हो गया। अब वह तीन-तीन दिन तक नहाता नहीं, नींद में गेम की स्टेज पार करने की बातें करता है। खाने का भी समय नहीं, दिनभर सिर्फ गेम खेलने में ही लगा रहता है।
आखिर क्यों इतना खो जाते हैं बच्चे?
गेम की लत से बाहर आए रजत ने बताया कि गेम में चैलेंज होने के कारण मैं इसकी तरफ अट्रैक्ट हुआ था। इसमें ग्रुपिंग होती है, लेवल्स को क्रॉस करना होता है और मैं जब स्टेज पार करने के बाद खुशी महसूस करता था । गेम के जरिए मैं खुद को साथियों के बीच में साबित करने की कोशिश करने की जिद में दिन-दिन भर गेम खेलता था। लेकिन जिद और जुनुन के कारण मैं खुद डिप्रेशन में चले गया था। परिवार द्वरा काउंसलिंग के बाद अब मुझे महसूस होता है कि मैं किस दिशा में जा रहा था। इस पूरे दौरान मैंने देखा कि इसकी लत तब तक नहीं लगती जब तक कोई इसे केवल मनोरंजन के लिए खेले, लेकिन जब वे कोई लेवल के लिए खेलना शुरू करते हैं, तो उन्हें इसकी लत लग जाती है। उन्हें चिंता रहती है कि कहीं उनका लेवल न घट जाए, इसलिए वे इसे पूरा दिन खेलने लग जाते हैं।
यह करें परिजन
काउंसलर राजश्री पाठक बताती हैं कि परिजन बच्चों के साथ बात करें, उनके साथ खेले, शारीरिक एक्टिविटी के लिए प्रेरित करें। घर में ही योग व अन्य व्यायाम सिखाएं और करने के लिए प्रोत्साहित करें। मोबाइल और लैपटॉप का कम प्रयोग करने दें। उनके सवालों के जवाब देने का प्रयास करें। डांटे नहीं। बच्चों की दिनचर्या नियंत्रित रखें, देर से सोने और जागने की प्रवृत्ति न पडऩे दें। डिप्रेशन के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। साथ ही यह भी बताया कि मोबाइल, लैप्टॉप जैसे इलेक्टानिक सामान से बच्चों को दूर रखें।

रमेश वैद्य Desk
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