पिलर के मुद्दे पर 15 दिन में फैसला लें पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव: हाई कोट

- याचिकाकर्ता अतुल शेठ के रिप्रेजेंटेशन पर होगी पीएस के समक्ष सुनवाई

इंदौर. डिजाइन के चक्कर में पिछले करीब तीन महीने से उलझे बंगाली चौराहा फ्लाय ओवर ब्रिज को लेकर दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। जस्टिस सुजोय पॉल और जस्टिस प्रणय वर्मा की युगल पीठ ने पीडब्ल्यूडी विभाग के प्रमुख सचिव को याचिकाकर्ता अतुल शेठ के रिप्रेजेंटेशन पर फैसला लेने के आदेश के साथ ही याचिका निराकृत कर दी। बिना पिलर के ब्रिज के दोनों हिस्से जोडऩे की मांग याचिका में की है। एक तरफ कोर्ट ने मामले में सुनवाई के आदेश दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ बुधवार रात से चौराहे पर पिलर का काम शुरू हो गया है। शेठ की मांग है, चौराह पर बिना पिलर के ब्रिज के दो हिस्सों को जोडऩे को लेकर क्षेत्रीय जनता ने मामला उठाया था। मुद्दा सरकार तक भी पहुंचा थी। सरकार ने ब्रिज की डिजाइन को लेकर आइआइटी दिल्ली से सुझाव लिया था, लेकिन उसके बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पहले एक पिलर डालकर ब्रिज को जोड़ा जा रहा था, अब दो पिलर बन रहे हैं। इसके साथ ही रोटरी का भी निर्माण होगा। चौराहे पर यातायात सुगम रहे इसके चलते पिलर को लेकर विरोध है, वह समस्या तो जस की तस है। शेठ का कहना है, पिलर बनने से बंगाली चौराहा सहित आसपास का ट्रैफिक बदहाल होगा। आने वाले समय में चौराहे के पास ही मेट्रो का स्टेशन भी बनना है, जिससे वहां पर लोड और बढ़ेगा। इसे देखते हुए बिना पिलर के पुल के दोनों हिस्सों को जोडऩा चाहिए। शेठ ने बताया, सरकार के अफसरों ने पुल की डिजाइन के बजाए चौराहे के यातायात को लेकर आइआइटी मुंबई से सुझाव मांगे हैं, जबकि मुद्दा पुल की डिजाइन का है। पत्र में बिना पिलर पुल का काम पूरा करने को लेकर आइआइटी से पूछा ही नहीं गया।

विकास मिश्रा
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