खाने की टेबल पर करते थे क्रिकेट की बातें, गैराज में खेलकर बने 'द वॉल'

  खाने की टेबल पर करते थे क्रिकेट की बातें, गैराज में खेलकर बने 'द वॉल'
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लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की अद्भुत क्षमता वाले राहुल द्रविड़ को पूरे विश्व में द वॉल के नाम से जाना जाता है।


इंदौर। लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की अद्भुत क्षमता वाले राहुल द्रविड़ को पूरे विश्व में द वॉल के नाम से जाना जाता है। 11 जनवरी 1973 को क्रिकेट के इस सितारे का जन्म इंदौर के 'काले' परिवार में हुआ था। अपने जीवन का 44वां बर्थडे मना रहे राहुल को क्रिकेट की विरासत उनके पिता से मिली थी। 


राहुल द्रविड़ के  क्रिकेट के अच्छे-अच्छे सिलेक्टर्स दीवाने रहे हैं। द्रविड़ ने क्रिकेट की दुनिया में कई रिकॉर्ड बनाए हैं। खेल के साथ-साथ उनके शांत और सौम्य व्यक्तित्व के भी लोग कायल रहे हैं। सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर के बाद वे तीसरे ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में दस हजार से अधिक रन बनाए हैं। 

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राहुल द्रविड़ हर क्रिकेट प्रेमी को इसलिए भी बेहद पसंद हैं क्योंकि उन्होंने कभी खुद के लिए कोई खेल नहीं खेला। राहुल हमेशा से पूरी टीम के बारे में सोचते थे। वे टीम के लिए ही खेले और आज भी अंडर 19 क्रिकेट के कोच के रूप में राहुल नई प्रतिभाओं को उभारने में लगे हैं। क्रिकेट की दुनिया में भले ही फैंस के बीच सचिन तेंदुलकर और सौरभ गांगुली ज्यादा पसंद किए जाते हों, लेकिन कोच की पहली पसंद हमेशा टीम में राहुल द्रविड़ हुआ करते थे। उनकी क्रिकेट की ट्रिक्स आज भी कई क्रिकेट स्कूल्स में नए खिलाड़ियों को सिखाई जाती है। 


जैम बनाने वाली एक कंपनी में काम करने वाले पिता शरद द्रविड़ एक सामान्य परिवार से थे। हालांकि वे भी क्रिकेट में माहिर थे। घर के इसी माहौल से राहुल बचपन से ही अच्छे क्रिकेटर रहे। 12 साल की उम्र से ही राहुल ने क्रिकेट खेलने की शुरुआत की थी। 

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राहुल की जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें...

1. पिता से क्रिकेट के गुर सीखने वाले राहुल के घर में पूरे टाइम क्रिकेट का महौल रहता था। उनके पिता एक अच्छे क्रिकेटर थे। वे खाने की टेबल पर घंटों राहुल और उनके भाई के साथ क्रिकेट की चर्चा करते थे। घर में जो भी पत्रिका आती थी वह खेल से संबंधित होती थी। 

2. राहुल का घरेलू नाम जेमी था। राहुल के सारे रिकॉर्ड्स पर इंदौरियन्स को बहुत नाज है। शहर के होलकर स्टेडियम के ड्रेसिंग रूम का नाम राहुल द्रविड़ पर रखा गया है। 

3. राहुल को अपनी नानी स्व. मनोरमा काले से खास लगाव था। बचपन में वह अपनी नानी से शिवाजी महाराज और स्वामी विवेकानंद की कहानियां सुनते थे। स्वामी विवेकानंद की किताबें पढ़ने का उनका लगाव अब भी बरकरार है। 

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4. फिटनेस के मामले में जब राहुल द्रविड़ क्रिकेट खेलते थे तब उनका कोई जवाब नहीं था। पूरी टीम में सबसे ज्यादा स्टेमिना रखने वाले राहुल अपनी हेल्थ को लेकर बहुत कॉन्सियस हैं। लेकिन, अगर उनके सामने गुलाब जामुन आ जाए तो उन्हें डाइट पर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। नाश्ते में इंदौरी पोहा भई उन्हें भाता है।

5. राहुल की मां पुष्पा द्रविड़ उनकी प्रेरणा ही नहीं बल्कि जानी-मानी पेंटर भी हैं। क्रिकेट की बारीकियां तो वे नहीं समझतीं लेकिन राहुल का हर मैच जरूर देखती थीं। 

6. क्रिकेट के अलावा जेमी बास्केटबॉल और फुटबॉल में भी माहिर थे। स्कूल टाइम में उन्होंने फुटबॉल के लिए ट्राफी भी जीती थीं। लेकिन क्रिकेट का जुनून दीवानगी की हद तक था। इसलिए राहुल ने अपना पूरा जीवन क्रिकेट के नाम कर दिया।

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