बैंकों से 1800 करोड़ कर्ज लेकर वापस न करने वाले लोहा व्यापारी को जेल

ऋण वसूली अधिकरण की बड़ी कार्रवाई, 100 करोड़ की वसूली के एक मामले में हुआ था कोर्ट में पेश

इंदौर/जबलपुर. चेहरे पर रईसों के भाव लिए वह आया तो पेशी पर था, लेकिन जैसे ही वह कोर्ट में हाजिर हुआ, उसे नाटकीय तरीके गिरफ्तार कर लिया गया। जब तक कोई कुछ समझ पाता, उसे जेल भेज दिया गया। कोर्ट खुलते ही सुबह करीब 10.30 बजे हुई इस ताबड़ तोड़ कार्रवाई से सिविल लाइंस स्थित ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) परिसर में हडक़ंप मच गया। बाद में लोगों को जानकारी हुई कि वह इंदौर का उद्योगपति राजीव लोचन सोनी था।

सबसे बड़ी कार्रवाई
जानकारों के अनुसार जबलपुर डीआरटी ने ऋण लेकर समय पर अदा न करने वालों के खिलाफ प्रदेश में अब तक की यह सबसे बड़ी कार्रवाई की है। कई बैंकों से करीब 1800 करोड़ रुपए कर्ज लेकर समय पर वापस न करने वाले इंदौर के उद्योगपति राजीव लोचन सोनी को डीआरटी की जबलपुर बेंच ने एक माह के लिए जेल भेज दिया है। सोनी के खिलाफ आईसीआईसीआई बैंक के 100 करोड़ रुपए की वसूली के मामले में डीआरटी ने उसके खिलाफ वारंट जारी किया था।

नाटकीय अंदाज में हुआ घटनाक्रम
सोमवार को स्टेट बार काउंसिल के आह्वान पर वकील अदालतों में पैरवी करने नहीं गए। डीआरटी ने सोनी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था। इस मामले पर सोमवार को सुनवाई होनी थी। वकीलों की हड़ताल के चलते सोनी स्वयं अपना रौब झाड़ते हुए डीआरटी पहुंच गया। उसने जाते ही एक क्लर्क को परिचय दिया। समीप ही खड़े डीआरटी के वसूली निरीक्षक दीपक पचौरी यह सब देख रहे थे। उन्हें सोनी के खिलाफ वारंट की जानकारी थी। यह पुष्टि होते ही कि कुर्सी पर बैठ रहा व्यक्ति उद्योगपति सोनी ही है, उन्होंने तत्काल उसे कुर्सी पर बैठने से रोका और इसकी जानकारी पीठासीन अधिकारी को दी। उनके निर्देश पर सोनी को हिरासत में ले लिया गया।

यह है मामला
इंदौर के समीप पीथमपुर में सोनी इस्पात प्रालि के संचालक सोनी ने 14-15 बैंकों से अलग-अलग समय पर करोड़ों रुपए की राशि कर्ज पर ली। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया प्रमुख है। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, देना बैंक, बैंक ऑफ इंडिया सहित अन्य बैंकों से उसने कुल 1800 करोड़ रुपए का कर्ज लिया। वसूली के लिए बैंकों ने डीआरटी की शरण ली है।

एक माह सिविल जेल की सजा
पीठासीन अधिकारी ने आईसीआईसीआई बैंक के 100 करोड़ रुपए अदा करने का आदेश पालन न करने पर सोनी को एक माह के सिविल कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद उसे केंद्रीय जेल भेज दिया गया।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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