रेरा से रियल एस्टेट कारोबार में दिखने लगी रियलिटी, कम होने लगी शिकायतें

रेरा से रियल एस्टेट कारोबार में दिखने लगी रियलिटी, कम होने लगी शिकायतें

Reena Sharma | Publish: May, 16 2019 12:46:18 PM (IST) | Updated: May, 16 2019 12:49:05 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

पंजीकृत प्रोजेक्ट से प्रतिस्पर्धा करने के लिए पुराने बिल्डर्स-डेवलपर्स के विवाद भी कम हुए

इंदौर. मप्र में रियल एस्टेट कारोबार पर रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरटी (रेरा) का असर नजर आने लगा हैं। दो साल में पूरे प्रदेश में मिली शिकायतों के निराकरण को देखते हुए डेवलपर्स ने अनेक बंद पड़े प्रोजेक्ट को गति देने का काम शुरू कर दिया है। रेरा सदस्यों का मानना है कि शिकायत दर्ज होने की दर में 30 से 35 फीसदी की कमी देखी गई है। बीते कुछ महीनों से इंदौर में हर सुनवाई पर 120 से ज्यादा प्रकरण आते थे। अब यह संख्या 90 के आसपास रह गई है। पूरे प्रदेश में अब 3100 शिकायतें मिलीं, जिनमें 1856 का निराकरण हो गया।

ऑनलाइन शिकायतें लेने वाले रेरा प्राधिकरण में तीन सदस्य प्रॉपर्टी संबंधित शिकायतों का निराकरण करते हैं। इसके लिए दोनों पक्षों को सुन कर कोर्ट के समान निर्णय दिया जाता हैं। प्रदेश में भोपाल मुख्यालय के अलावा इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर में प्राधिकरण सुनवाई करता हैं। इंदौर में महीने में तीन बार सुनवाई होती है, जबकि अन्य स्थानों पर दो बार। गठन होने के बाद ही इंदौर में 500 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हो गई थी। इसके बाद हर जिले मंें जागरूकता आई और अन्य स्थानों से भी शिकायतें आने लगी। प्राधिकरण के अध्यक्ष एंटोनी डिसा का कहना हैं कि रेरा से रियल एस्टेट कारोबार में नियमितता आई है। बिल्डर्स और डेवलपर्स ग्राहक या खरीददार से चर्चा करने लगा हैं।

अब तक 60 फीसदी से ज्यादा शिकायतों का निराकरण कर हो चुका हैं। डेवलपर्स और बिल्डर्स इन फैसलों पर अमल भी कर रहे हैं। ज्यादातर शिकायतें कब्जा नहीं देने, प्रोजेक्ट विकसित नहीं करने, विकास कार्य समय पर नहीं करने, अनुबंध के आधार पर काम नहीं करने की होती हैं। इंदौर में अनेक शिकायतें ऐसी भी मिलीं जिसमें प्रमोटर्स ने राशि ले ली और विकास नहीं किया। डेवलपर्स का कहना है, नियमन बनने से खरीदार और हमारे बीच विश्वास का संकट समाप्त हो गया हैं। लोग अब प्रॉपर्टी खरीदने में रूचि ले रहे हैं।

प्रोजेक्ट में पादर्शिता आने से खरीदार की जरूरत के अनुसार ही प्रोजेक्ट बनाए जा रहे हैं। इससे किए गए वादे पूरे करने में दिक्कत नहीं हो रही हैं। रेरा में रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए डायवर्शन, ले आउट व अन्य स्वीकृति आवश्यक रूप से लेना होती हैं। जिससे प्रोजेक्ट पूरी तरह से वैध होता है, किसी तरह की धोखाधड़ी की संभावना नहीं रहती हैं। रेरा अधिनियम में दोनों पक्षों के लिए प्रावधान किए गए हैं। रेरा ने अब तक 45 प्रकरणों में राशि वापस करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा एक एेसे प्रमोटर्स को नोटिस दे कर काम शुरू करवाया, जिसने लोगों से 80 प्रतिशत पैसा ले लिया था।

प्रोजेक्ट में पादर्शिता आने से खरीदार की जरूरत के अनुसार ही प्रोजेक्ट बनाए जा रहे हैं। इससे किए गए वादे पूरे करने में दिक्कत नहीं हो रही हैं। रेरा में रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए डायवर्शन, ले आउट व अन्य स्वीकृति आवश्यक रूप से लेना होती हैं। जिससे प्रोजेक्ट पूरी तरह से वैध होता है, किसी तरह की धोखाधड़ी की संभावना नहीं रहती हैं। रेरा अधिनियम में दोनों पक्षों के लिए प्रावधान किए गए हैं। रेरा ने अब तक 45 प्रकरणों में राशि वापस करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा एक एेसे प्रमोटर्स को नोटिस दे कर काम शुरू करवाया, जिसने लोगों से 80 प्रतिशत पैसा ले लिया था।

रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट

2179 प्रदेश में

509 इंदौर में

148 नए प्रोजक्ट

361 निर्माणाधीन

547 एजेंट प्रदेश में पंजीकृत

3100 शिकायतें मिलीं अब तक

1856 का हुआ निराकरण

800 से ज्यादा प्रकरण इंदौर में

कारोबार का बेहतर माहौल बने इसलिए बनाएंगे व्यापार नीति

व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल में प्रदेश के मुख्य सचिव एसके मोहंती से मुलाकात कर समस्याएं बताईं। मोहंती ने आश्वस्त किया कि जल्द व्यापार नीति बनाई जाएगी। प्रदेश में व्यापार व रोजगार बढ़ाने के लिए सुविधाएं दी जाएगी। प्रदेश के व्यापारी एसोसिएशन (कैट) के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को भोपाल में मुख्य सचिव चर्चा में काराबारी समस्याएं रखीं। मोहंती ने व्यापारियों से कहा, जल्द ही राज्य व जिला स्तर पर ऐेसा सिस्टम विकसित करेंगे कि व्यापारियों की समस्या का तुरंत निदान हो सके। कैट के अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन ने कहा कि म.प्र. के सभी जिला कलेक्टर 3 महीने में एक बार कैट के माध्यम से व्यापारियों की बैठक आमंत्रित करें और उनकी समस्याएँ जिला स्तर पर निपटना चाहिए। राज्य स्तर पर जो समस्याएं हैं वह विभाग के प्रमुख सचिव बैठक करके उनका निराकरण निकालें। इस अवसर पर उन्होंने देशभर के व्यापारियों के साथ म.प्र. में ट्रेड समिट करने का प्रस्ताव रखा। मोहंती ने सभी बातों को स्वीकृति प्रदान की करते हुए कहा कि जल्द व्यापार नीति तैयार करेंगे जिसमें इन सब बातों का समावेश होगा। प्रतिनिधिमंडल में भूपेन्द्र जैन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैलाश अग्रवाल, राधेश्याम महेश्वरी, प्रदेश संयुक्त सचिव मनोज चौरसिया, विवेक साहू, अजय खंडेलवाल, रविन्द्र जैन, अविचल जैन, राजकुमार जौधानी सहित व्यापारीगण शामिल थे।

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