मौत के मुंह से निकल घर लौटी महिला

मौत के मुंह से निकल घर लौटी महिला

Lakhan Sharma | Updated: 04 Jun 2019, 11:11:04 AM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

- २ साल से प्राइवेट पार्ट में था बाइक का हैंडल

- २१ दिन पहले एमवाय अस्पताल में हुई थी सर्जरी

लखन शर्मा @ इंदौर। एमवाय अस्पताल के डॉक्टरों पर आए दिन मरीजों का इलाज न करने के आरोप लगते हैं, लेकिन कई डॉक्टर ऐसे हैं जो मरीजों को मौत के मुंह से निकाल लाते हैं। २१ दिन पहले ऐसी ही एक महिला की सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने की थी। महिला के प्राइवेट पार्ट में उसके पति ने विवाद के बाद शराब पिलाकर बाइक का हैंडल डाल दिया था। महिला दो साल से उसे लेकर घूम रही थी। कई बार दूसरों से मदद मांगी, लेकिन किसी ने उसकी बात पर यकीन नहीं किया। पिछले दिनों एमवाय में १८ डॉक्टरों की टीम ने ४ घंटे की सर्जरी के बाद हैंडल निकाला था। महिला की कल छुट्टी हो गई और वह सकुशल घर लौट गई।

इंदौर के 71 नंबर स्कीम में रहने वाली पीडि़त महिला का दो साल पहले पति से दूसरी महिला से संबंध रखने की बात पर विवाद हुआ था। उस वक्त दोनों नशे में थे। पति ने महिला के प्रायवेट पार्ट में बाइक का हैंडल डाल दिया था। तब से महिला दर्द भोग रही थी, कई निजी अस्पतालों में भी उसके दर्द को गंभीरता से नहीं लिया गया। कई दिनों तक पुलिस के चक्कर काटने के बाद गत दिनों केस दर्ज किया गया और महिला को इलाज के लिए एमवाय अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों ने पहले महिला का एक्स-रे करवाया जिसमें पता चला कि उसके पेट में दोपहिया वाहन का हैंडल का रबर वाला टुकड़ा है। इसके बाद मरीज का सीटी स्कैन कराया गया जिसमें वाहन का हैंडल बच्चेादानी, पेशाब की थैली और छोटी आंत के मध्य पाया गया। महिला का इलाज महिला रोग व प्रसूति विभाग के डॉ. सोमेन भट्टाचार्य व यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. संकल्प जोशी ने शुरू किया। जांच में बाइक का हैंडल शरीर में होने की पुष्टि हुई। सर्जरी विभाग डॉ. आरके माथुर, डॉ. सोनिया मोजेस, डॉ. शशिकुमार शर्मा, डॉ. सचिन वर्मा और एनेस्थिसिया विभाग के डॉ. केके अरोरा, डॉ. मनीष बनारे, डॉ. पारुल जैन सहित 18 डॉक्टरों की टीम ऑपरेशन के लिए तैयार की गई। टीम ने 4 घंटे ऑपरेशन कर महिला के पेट से हैंडल निकाला। लंबे समय से हैंडल बच्चेदानी में था जिसके चलते बच्चेदानी में इंफेक्शन फैल गया था। बच्चेदानी को भी निकालना पड़ा है। पेशाब की थैली में गंभीर चोट होने से डीजे स्टंट डालकर उसे रिपेयर किया गया। साथ ही छोटी आंत की भी मरम्मत करनी पड़ी। एमजीएम मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. ज्योति बिंदल और एमवाय अस्पताल अधीक्षक डॉ. पीएस ठाकुर भी महिला की सतत निगरानी करते रहे। महिला की सुविधा के लिए प्रायवेट रूम तक उपलब्घ करवाया। कल महिला को अस्प्ताल से सकुशल घर भेजा गया। वह अस्पताल आई तो रोते रोते थी, लेकिन मुस्कुराकर लौटी।

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