परमात्मा व संतों का नियमित दर्शन श्रद्धा का प्रतीक

परमात्मा व संतों का नियमित दर्शन श्रद्धा का प्रतीक

Hussain Ali | Updated: 20 Jul 2019, 04:15:02 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

गुरुभक्तों ने किया संतश्री का सत्कार

इंदौर. प्रभु के मंदिर में या किसी भी संत का नियमित दर्शन-वंदन श्रद्धा का प्रतीक है। गुरुवार को पद्मावती शक्तिपीठाधिपति वसंत विजय ने ह्रींकारगिरि तीर्थधाम में चातुर्मास पर्व के दौरान यह बात प्रवचन में कहीं।

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वीरेंद्र कुमार जैन ने बताया, नगीन भाई कोठारी चेरिटेबल ट्रस्ट ह्रींकारगिरि के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में गुरुभक्तों ने यतिवर्य श्रीजी का काम्बली ओढ़ाकर सत्कार किया। इनमें चैन्नई के शांतिलाल चोपड़ा, रमेशचंद बोथरा, रमेश कुमार, शांतिलाल लुंकड़, कीर्ति शाह, ललित ललवानी, बाबूलाल, राजू सोनी, अमेरिका के सुनील गोलिया, ट्रस्टी जय कोठारी शामिल थे। संतश्री ने प्रभु भक्ति में भाव प्रधानता की महिमा भी बताई।

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उन्होंने कहा, एक बच्चा जिस प्रकार अपने मां-पिता से इच्छा पूर्ति की मांग करता है और अभिभावक क्षमता अनुसार उसे पूरी करते ही हैं। उसी प्रकार परमात्मा के सामने अबोध बालक बनकर मन की बात करनी चाहिए। ट्रस्टी विजय कोठारी ने बताया, प्रतिक्रमण व भक्तामर स्तोत्र जाप संतश्री वज्र तिलक की निश्रा में प्रात: 6 बजे से प्रारंभ हुए।

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