इशारों में बयां हुआ दिल में बसा देशभक्ति का जज्बा

साइन लैंग्वेज में राष्ट्रगान की प्रस्तुति आज सुबह २६ जनवरी को सुबह ८.३० बजे प्रेस कॉम्प्लेक्स के गार्डन में दी गई।

इंदौर. उडऩे के लिए पंख नहीं हौसला जरूरी होता है। ठीक उसी तरह देशप्रेम भी भावनाओं से व्यक्त किया जा सकता है। इसे व्यक्त करने की भाषा नहीं होती। इसी तरह देशप्रेम की भावना को साइन लैंग्वेज में जाहिर करने के लिए श्री राजाराम सेनानी स्कूल के ६०० सामान्य और आनंद मूक-बधिर संस्था के १०० बच्चों को एक सप्ताह से प्रशिक्षण दिया गया था। साइन लैंग्वेज में राष्ट्रगान की प्रस्तुति आज सुबह २६ जनवरी को सुबह ८.३० बजे प्रेस कॉम्प्लेक्स के गार्डन में दी गई। रोटरी क्लब ऑफ इंदौर संकल्प की पहल से सामान्य बच्चों को सांकेतिक भाषा में राष्ट्रगान का प्रशिक्षण आनंद मूक-बधिर संस्था की मोनिका ज्ञानेंद्र पुरोहित, गोकुल नरवाल, सुरेश जमरे, भेरूसिंह डाबी दे रहे हैं। कृष्णबाग स्थित श्री राजाराम सेनानी स्कूल में रोज सभी सामान्य बच्चों को इक_ा कर जन-गण-मन अधिनायक...सिखाया गया है। इसके जरिए समानता के अधिकार का भी संदेश दिया जा रहा है। राष्ट्रगान के बाद भारत माता की जय...नारे और शहीदों को श्रद्धांजलि भी साइन लैंग्वेज में ही दी गई। संस्था के संस्थापक सुधींद्र मोहन ने कहा, रोटरी क्लब पूरे विश्व में हैं, इसलिए सभी देशों में यह वीडियो भेजकर सामान्य बच्चों से साइन लैंग्वेज में वहां का राष्ट्रगान करने की अपील करेंगे।
ज्ञानेंद्र पुरोहित ने कहा, विश्व का प्रथम मूक-बधिर इंटरेक्ट क्लब भी बनाया गया है। इस ग्रुप में विश्व के १२ से १८ साल तक के मूक-बधिर बच्चों को जोड़ा जाएगा और हर स्कूल के सामान्य बच्चों को साइन लैंग्वेज सिखाई जाएगी, ताकि हर साल २६ जनवरी के दिन वे मूक बधिर बच्चों के साथ साइन लैंग्वेज में राष्ट्रगान की प्रस्तुति दें।

 

republic day event 2018

अपना ही गणतंत्र है बंधु!
कभी ‘गांव का ग्वाला’ जैसा,
कभी ‘शहर की बाला’ जैसा,
कभी ‘जीभ पर ताला’ जैसा,
कभी ‘शोर की शाला’ जैसा,
रुकता-चलता यंत्र है बंधु!
अपना ही गणतंत्र है बंधु!
कभी ‘पांव का छाला’ जैसा,
कभी ‘जोश की ज्वाला’ जैसा,
कभी ‘एकदम आला’ जैसा,
‘उत्सव का उजियाला’ जैसा,
खट्टा-मीठ? तंत्र ?? है बंधु!
अपना ही गणतंत्र है बंधु!
कभी ‘धनिक की माली’ जैसा,
कभी ‘श्रमिक की थाली’ जैसा,
कभी ‘भोर की लाली’ जैसा,
कभी ‘अमावस काली’ जैसा
साझे का संयंत्र है बंधु!
अपना ही गणतंत्र है बंधु!
कभी ‘जाप की माला’ जैसा,
कभी ‘प्रेम की प्याला’ जैसा,
‘बच्चन की मधुशाला’ जैसा
‘धूमिल और निराला’ जैसा
जन-गण-मन का मंत्र है बंधु!
अपना ही गणतंत्र है बंधु!
- प्रो. अजहर हाशमी

अर्जुन रिछारिया Incharge
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