कैट ने बनाया कचरा निपटान का नया मॉडल

1 रुपए रोज प्रति घर से भी कम खर्च में हो रहा निष्पादन

अभिषेक वर्मा@ इंदौर. देश-दुनिया में वैज्ञानिक रिसर्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला आरआर कैट कचरा निपटान में भी मिसाल बन चुका है। यहां कचरे से हर दिन इतनी बायोगैस तैयार की जाती है, जिससे २०० लोगों के लिए नाश्ता तैयार हो जाए। इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में खाद भी मिल रही है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक घर से करीब २४ रुपए माह, यानी हर दिन एक रुपए से भी कम खर्च हो रहा है। यह जानकारी प्रो. गणेश कावडिय़ा द्वारा आरआर कैट के कचरा निष्पादन पर किए गए शोध में शोध में सामने आई है।

राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (आरआर कैट) पर हुए इस शोध में प्रो. कावडिय़ा के साथ डॉ. वसीम खान व नेहा गुप्ता ने भी सहयोग किया है। कैट परिसर में करीब एक हजार घर हैं। इनसे रोज औसत ४०० किलो कचरा निकलता है। गेस्ट हाउस से हर दिन करीब १०० किलो कचरा निकल रहा है। हर दिन इतने कचरे का निपटान बड़ी चुनौती बना हुआ था। जुलाई २०१४ में कचरे के सही निष्पादन के उद्देश्य से निसर्ग-रुना बायोगैस प्लांट लगवाया गया, जो अब बड़े फायदे का सौदा बन चुका है।

ऐसे बना फायदे का सौदा
प्लांट के लिए ठेकेदार को ३० हजार रुपए माह भुगतान किया जाता है। इसके बदले करीब ४ हजार ८०० रुपए की बायोगैस और ६ हजार रुपए की खाद मिल रही है। इसके अलावा १० हजार ८०० रुपए की सब्सिडी है। इस लिहाज से एक घर पर अभी २४.४ रुपए रुपए महीने का खर्च आ रहा है। वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम से अच्छी खाद भी तैयार हो रही है।

राजा रामन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केन्द्र (RRCAT) मध्य प्रदेश के इन्दौर के बाहरी हिस्से में सुखनिवास गांव के पास स्थित है। यह भारत सरकार के परमाणु उर्जा विभाग के अन्तरगत स्थापित एक अनुसंधान एवं विकास केन्द्र है। इसकी स्थापना १९८५ में तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने की थी।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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