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corona/44 फीसदी घट गई सैंपलिंग

शहर में कोरोना संक्रमण के कम होने के साथ ही लोगों ने राहत की सांस ली है। फरवरी माह में संक्रमण दर घटकर एक प्रतिशत से नीचे चली गई थी। अब सिर्फ शहर में संचालित किए जा रहे फीवर क्लीनिक से ही सैंपल लिए जा रहे हैं। पिछले दो दिनों में लिए जा रहे सैंपलों की संख्या में काफी कमी आई है।

इंदौर

Published: March 07, 2022 07:40:32 pm

इंदौर. शहर में कोरोना संक्रमण के कम होने के साथ ही लोगों ने राहत की सांस ली है। धार्मिक, सामाजिक व राजनीतिक समेत सभी तरह के आयोजन अब फिर से उत्साह के साथ होने लगे हैं। साथ ही नाइट कफ्र्यू भी हटा दिया गया है। फरवरी माह में संक्रमण दर घटकर एक प्रतिशत से नीचे चली गई थी। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एक मार्च से पिछले दो वर्ष से की जा रही रैपिड रिस्पांस टीम की सेवाएं समाप्त कर दीं।
शहरभर में जगह-जगह से लिए जाने वाले मैदानी अमले द्वारा सैंपलिंग बंद कर दी गई है। अब सिर्फ शहर में संचालित किए जा रहे फीवर क्लीनिक से ही सैंपल लिए जा रहे हैं। इस वजह से पिछले दो दिनों में लिए जा रहे सैंपलों की संख्या में काफी कमी आई है। सैंपल कम होने व संक्रमित मरीज न के बराबर होने के बावजूद संक्रमण दर फिर से बढक़र एक प्रतिशत के ऊपर जा चुकी है। फरवरी के अंतिम 4 दिनों की तुलना मार्च के शुरुआती 4 दिनों से करें तो पिछले 4 दिनों में करीब 44 फीसदी तक सैंपलिंग घटी है। इसे देखते हुए अब फिर से सैंपलिंग टीमें लगाई गई हैं। फिलहाल 45 टीमों को अलग-अलग क्षेत्रों में सैंपलिंग का काम दिया गया है।
संक्रमण दर में
हुआ इजाफा
शहर में संक्रमण दर की सही स्थिति का अंदाजा रोजाना लिए गए सैंपलों के आधार पर ही लगाया जा सकता है। सैंपलिंग कम होने के कारण संक्रमित कम होने के बावजूद संक्रमण दर बढ़ गई। बुधवार को पॉजिटिव सिर्फ 17 ही मिले थे, लेकिन जांच में मात्र १२६८ सैंपल होने से संक्रमण दर 1.३४ प्रतिशत पर पहुंच गई।
corona/44 फीसदी घट गई सैंपलिंग
corona/44 फीसदी घट गई सैंपलिंग
संक्रमण दर स्थिर रखना जरूरी
विशेषज्ञ डॉक्टरों की मानें तो कोरोना काल के पिछले 2 वर्षों में यह बात सच साबित हुई है कि संक्रमण दर को नियंत्रित व स्थिर रखने के लिए ज्यादा सैंपलिंग जरूरी है। ऐसे में एक बार फिर संक्रमण दर कम होने पर सैंपलिंग घटाने से संक्रमण दर बढऩे की आशंका रहती है। संक्रमित को ढूंढऩे से संक्रमण फैलने से रोका जा सकता है।
4 दिन में 14 हजार सैंपल ही ले पाए
एक मार्च से सैंपलिंग टीमें हटाए जाने का असर रोजाना लिए जाने वाले सैंपलों की संख्या पर भी दिखा। जहां फरवरी माह में रोजाना करीब 6 से 7 हजार सैंपल लिए गए, वहीं मार्च के पहले ही दिन यह संख्या 4 हजार तक पहुंच गर्ई। दूसरे दिन घटकर 3 हजार और अगले दिन मात्र 12६८ सैंपल ही लिए गए। इस तरह मार्च के 4 दिन में मात्र १४ हजार २८० सैंपल लिए गए, जबकि फरवरी के अंतिम दिनों में २५ हजार ५६८ सैंपल लिए गए।
पिछले 3 दिनों में सैंपलिंग की संख्या में कमी आने के चलते आरआरटी टीमें बढ़ाई गई हैं। हालांकि यह पहले के मुकाबले इस बार कम टीमें रहेंगी। फिलहाल 45 टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में सैंपलिंग का कार्य करेंगी।
- डॉ. बीएस सैत्या, सीएमएचओ

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