कभी भी गिर सकता है 42 साल पुराना सरवटे बस स्टैंड

निगमायुक्त ने किया दौरा, तकनीकी रिपोर्ट देख माना कमजोर हो चुकी बिल्डिंग

इंदौर. एमएस होटल हादसे से सीख लेकर नगर निगम ने ४२ वर्ष पुराने सरवटे बस स्टैंड को जमींदोज करने का निर्णय लिया है। ‘पत्रिका’ ने लोकहित में लगातार यह मुद्दा उठाया, जिसके परिणाम स्वरूप निगमायुक्त आशीष सिंह मंगलवार को सरवटे बस स्टैंड का दौरा करने पहुंचे। भवन की स्थिति देख चौंक गए।

उन्होंने हाथोंहाथ इस भवन को तोडऩे के साथ नया भवन का प्लान बनाकर काम करने के निर्देश दिए। निगमायुक्त सरवटे बस स्टैंड के ऊपरी हिस्से पर चढऩे लगे तो सीढिय़ां हिल रही थीं। जैसे-तैसे पहली मंजिल पर पहुंचे तो बालकनी को देख घबरा से गए। बालकनी कमजोर होने से हिल रही थी। निगमायुक्त बोले, बिल्डिंग तो कभी भी गिर जाएगी। बिल्डिंग के कई हिस्से, दीवारें टूटी और जर्जर अवस्था में देख निगमायुक्त ने तय किया कि इस बिल्डिंग को गिराकर नया बस स्टैंड तैयार किया जाए। हालांकि इसे कब तक गिराया जाएगा, यह स्पष्ट नहीं किया है।

पिलर में उतारा बरसात का पानी
निगमायुक्त आशीष सिंह सरवटे बस स्टैंड की बिल्डिंग की छत पर पहुंचे तो वहां और बुरी स्थिति थी। छत पर जमा होने वाले बारिश के पानी को निकालने के लिए पिलर में ही छेद कर रखे थे। इसके कारण पानी सीधे पिलर में रिसता रहता है। कचरा अडऩे से पानी छत पर ही फैला रहता है, जिससे बिल्डिंग को काफी नुकसान पहुंचा।

नई डिजाइन तैयार करने को कहा
सरवटे बस स्टैंड की छत के प्लास्टर का बड़ा हिस्सा गत माह गिर गया था। महापौर मालिनी गौड़ ने जांच के आदेश दिए तो निगम ने तकनीकी जांच करवाई। निगमायुक्त को अफसरों ने बिल्डिंग की जांच रिपोर्ट दिखाई तो वे चौंक गए। रिपोर्ट में बिल्डिंग को काफी कमजोर बताया गया है। निगमायुक्त ने बस स्टैंड की जगह बनने वाली नई बिल्डिंग की डिजाइन तैयार करने के निर्देश दिए। नई बिल्डिंग का डिजाइन नए आर्किटेक्ट से करने को भी कहा है।

42 साल में खत्म हो गई बिल्डिंग
बस स्टैंड की बिल्डिंग 1976 में बनी थी। इसकी देखरेख का जिम्मा पहले मप्र रोड राज्य पथ परिवहन निगम के पास था, जो नगर निगम के सहयोग से यह काम करता था। परिवहन निगम के खत्म होने के बाद पूरी जिम्मेदारी निगम के पास आ गई। एमएस होटल हादसे के बाद से कमजोर हो चुकी इस बिल्ंिडग को गिराने की बात उठ रही है।

यहां के लिए चलती हैं बसें
सरवटे बस स्टैंड से उज्जैन, देवास, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, रतलाम, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, भोपाल सहित मनमाड़, पुणे, नासिक, शिर्डी सहित महाराष्ट्र रूट के साथ ही कोटा और राजस्थान रूट की बसें भी चलती हैं। यहां से 250 से ज्यादा बसों की आवाजाही होती है।

बस स्टैंड की हालत खराब है। इसकी जगह नए बस स्टैंड को बनाने की तैयारी है। जल्द नई डिजाइन तैयार कर बस स्टैंड का काम शुरू कराएंगे।
- आशीष सिंह, निगमायुक्त

अर्जुन रिछारिया Incharge
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