एसिड अटैक सर्वाइवर की तस्वीर देखी तो तीन दिन नींद नहीं आई

एसिड अटैक सर्वाइवर की तस्वीर देखी तो तीन दिन नींद नहीं आई

Hussain Ali | Updated: 10 Jul 2019, 08:30:00 AM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

ऑथर रिया शर्मा ने बताई दास्तान, कैसे उन्होंने एनजीओ की शुरुआत की

इंदौर.दिल दहलाने वाले धमकियां भी कभी रिया और सोनी को कमजोर नहीं कर पाई। एक ने खुद एसिड अटैक झेला और दूसरी इनसे बचती रही। इसके बाद भी दोनों एसिड अटैक का शिकार हुई महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए चट्टान की तरह खड़ी हैं। फिक्की फ्लो के कार्यक्रम में जब दोनों ने अपनी कहानी साझा की तो श्रोताओं ने जोरदार तालियां बजाकर इनके हौसले को सलाम किया।

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मैं एकेडमिक्स में अच्छी नहीं थी तो सोचा आर्ट एंड डिजाइन में कुछ क्रिएटिव किया जाए। उस फील्ड में उतना बेहतर नहीं कर पाई तो यूके गई और वहां फैशन डिजाइनिंग की फील्ड में करियर बनाने का सोचा। मुझे लगा मेरा फैशन सेंस अच्छा तो मैं बेहतर कर पाऊंगी, लेकिन मुझे वो भी आसान नहीं लगा। एक दिन इंटरनेट पर इंडिया में वुमन्स राइट्स मूवमेंट को पढ़ा तो उसके बारे में दिलचस्पी बढ़ी। मैंने एक एसिड अटैक सर्वाइवर की तस्वीर देखी तो मेरा दिल दहल गया। मुझे लगा ये बाकी चीजों की तरह मुझे पांच मिनट से ज्यादा परेशान नहीं करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उस वक्त मुझे तीन दिन तक नींद नहीं आई। जब ये बात मैंने अपने प्रोफेसर को बताई तो उन्होंने मुझे हाथ कैमरा दिया और कहा कि इंडिया जाओ और इस सब्जेक्ट पर फिल्म बनाओ। मैंने कहा, इसका फैशन से कोई रिश्ता नहीं तो प्रोफेसर का जवाब था, फैशन सिर्फ खुद को एक्सप्रेस करने का एक माध्यम होता है। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करना चाहिए लेकिन मैंने अपनी दिल की सुनी और इंडिया आ गई। जब पहली बार एसिड अटैक सर्वाइवर से बात की तो वह मुझे काफी शांत लगी। मुझे ऐसा महसूस हुआ कि इस दुनिया में इतनी मजबूत महिलाएं भी होती हैं, जो इतना दर्द सहन करने के बाद भी खुद को सहज रख पाती है। मैं जब एसिड अटैक सर्वाइवर सोनी से मिली तो वो मुझे काफी क्यूट लगीं।

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मैं अपनी डॉक्यूमेंट्री बनाने पर फोकस कर रही थी तभी बेंगलुरु से कॉल आया कि एक एसिड अटैक का केस आया है क्या आप मदद कर सकती हंै? मुझे लगा मैं खुद 21 साल की हूं, क्या मदद कर पाऊंगी लेकिन दिल ने कहा जाना चाहिए और मैं फ्लाइट से तुरंत वहां गई। मैंने पहली बार गर्वमेंट हॉस्पिटल का वार्ड देखा था और इसने मेरी जिंदगी बदल दी। मुझे वहां हसीना नाम की एक लडक़ी मिली, जो खुद एसिड अटैक सर्वाइवर थी। उसने सनग्लास पहना था। वो देख नहीं पाती थी लेकिन सारे काम बिना छड़ी की मदद से कर रही थी। इस बात ने मुझे आश्चर्य में डाल दिया। उस वार्ड ने मेरी जिंदगी बदल दी। कम बेड होने की वजह लोग जमीन पर थे। एक एसिड अटैक सर्वाइवर की स्थिति इतनी बुरी थी कि उसे देखकर पहचान करना मुश्किल था कि वो लडक़ी है या लडक़ा। उसके सिर पर बचे थोड़े से बालों से ही इस बात का पता लगाया जा सकता था। सब कुछ बहुत डरावना था।

उस दिन हसीना ने मुझसे कहा, मुझे पता है आप हम लोगों की मदद करोगी क्योंकि आप हम जैसी नहीं हो और हमारा दर्द समझती हो। उस दिन मैंने उनकी मदद का निश्चय किया और अपनी डॉक्यूमेंट्री मेक लव नॉट स्कार्स के नाम से एनजीओ शुरू किया। उस वक्त कुछ नहीं पता था लेकिन सब सीखा क्योंकि दूसरों की जिम्मेदारी आपको ज्यादा जिम्मेदार बना देती है। इस जर्नी में मुझे धमकियों भरे कॉल आते थे। ये लोग कहते थे तुम बहुत खूबसूरत हो, अगर तुम पर अटैक हो तो तुम इनकी मदद करना भी भूल जाओगी। उस वक्त एक सर्वाइवर ने मुझे हौसला दिया और फिर मैंने कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा। मैं आज लड़कियों से सिर्फ यही कहना चाहती हूं कि अपनी स्किल्स से ज्यादा प्यार करें। अगर आप ऐसा करेंगी तो लोगों को समझ आएगा कि वो आपके बाहरी सौंदर्य को बिगाड़ सकते हैं पर आपको अंदर से नहीं तोड़ सकते।
- रिया शर्मा (ऑथर एंड फाउंडर ऑफ मेक लव नॉट स्कार्स)

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