स्कूल कर्मचारियों की लिस्ट होगी वेरिफाई

गुरुग्राम (गुडग़ांव) के स्कूल में कर्मचारी द्वारा मासूम बच्चे की हत्या की घटना ने स्थानीय पुलिस को भी सतर्क कर दिया है।

इंदौर. गुरुग्राम (गुडग़ांव) के स्कूल में कर्मचारी द्वारा मासूम बच्चे की हत्या की घटना ने स्थानीय पुलिस को भी सतर्क कर दिया है। डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्रा ने कहा, कई स्कूलों ने काफी समय से कर्मचारियों की जानकारी पुलिस को नहीं दी है। सोमवार को पुलिस टीम अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों में जाएगी।

अगर कर्मचारी पर पुराना आपराधिक मामला दर्ज होने की बात सामने आती है, तो संबंधित पर कार्रवाई भी होगी।कलेक्टर से भी इस संबंध में बात की है। गुडग़ांव के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में 7 साल के बच्चे से दुष्कर्म के प्रयास में कर्मचारी द्वारा गला रेतकर हत्या करने के मामले ने पूरे देश को झझकोर दिया है। गौरतलब है कि देश के कई हिस्सों में इस तरह के मामले पहले भी कई बार आ चुके हैं। इन अपराधों की वजह में हमेशा स्कूल मैनेजमेंट की लापरवाही ही सामने आई है। पत्रिका ने एक्सपर्ट से चर्चा कर जाना किन बातों का ध्यान रख परिजन बच्चों के मन की बात जान सकते हैं। 

व्यवहार पर बारीक नजर रखें
बच्चों में शारीरिक या मानसिक टॉर्चर के लक्षण आसानी से देखे जा सकते हैं। डराए जाने पर बच्चे परिजन को भी कुछ नहीं बताते। ऐसे में बच्चों का गुमसुम रहना, चिड़चिड़ापन, हम उम्र बच्चों के साथ खेलने में रुचि नहीं होना, ठीक से खाना नहीं खाना, कहीं भी जाने पर परिजन को साथ चलने की जिद जैसे व्यवहार पर बारीकी से नजर रखना चाहिए। कोई भी बदलाव आने पर परेशानी जानने की कोशिश करें। उनकी दिनचर्या में शामिल होकर देखें, परेशानी कहां आ रही है।
- डॉ. वीएस पाल, अधीक्षक मेंटल व एमवाय 

बच्चों को जानकारी दें
फिजिकल या सैक्सुअल टॉर्चर के शिकार बच्चे अपनी बात खेल-खेल में ही शेयर करते हैं, इसलिए परिजन को बच्चों के समान ही व्यवहार कर परेशानी जाननी चाहिए। बच्चों की त्वचा बेहद नाजुक होती है, इसलिए किसी भी निशान को अनदेखा न करें। बॉडी पार्ट्स के प्रति वैज्ञानिक रूप से सजगता जरूरी है।
- डॉ. माया वोरा, काउंसलर

अर्जुन रिछारिया Incharge
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