EOW में शिकायत के बाद सामने आया SDO का घोटाला

कलेक्टर ने मौजूदा गाइड लाइन से पैसा जमा करवाने का दिया आदेश, आश्रय निधि जमा करवाए बगैर एसडीओ ने जारी की विकास अनुमति

मोहित पांचाल

इंदौर। कॉलोनी में मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे रहवासियों ने ईओडब्ल्यू में गंभीर शिकायत की थी। जब जांच हुई तो कई घोटाले सामने आ गए। कॉलोनाइजर से साठगांठ के चलते एसडीओ ने आश्रय निधि जमा करवाए बगैर ही विकास अनुमति जारी कर दी। बाद में बेतरतीब विकास हुआ और कार्य पूर्णता का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया। खुलासे के बाद कलेक्टर ने सख्त कार्रवाई करते हुए मौजूदा गाइड लाइन से आश्रय निधि जमा करवाने का फैसला किया है।

मामला पिगडम्बर सर्वे नंबर 23/2-3 और 28/1 की जमीन पर अशोक वाटिका कॉलोनी का है। इसका निर्माण कॉलोनाइजर रमेशचंद मित्तल ने किया है। यहां एक प्लॉट आर्मस्ट्रांग गुप्ता ने भी खरीदा। वादे अनुरूप कॉलोनी का विकास नहीं किया गया, इस पर गुप्ता ने ईओडब्ल्यू में शिकायत कर दी।

जहां से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने कलेक्टर लोकेश जाटव को मामले में जांच कर कार्रवाई करने को कहा। कलेक्टर ने तहसीलदार सुदीप मीणा, टीएंडसीपी के विजय जगताप, आरआई रामजी तिवारी, पीएचई के रामजी तिवारी और पटवारी योगेश वसुनिया का जांच दल गठन किया। दस्तावेजों की जांच करने के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे किए, जिसमें कई घोटाले सामने आ गए।

सामने आया आश्रय निधि घोटाला
कॉलोनी निर्माण की अनुमति लेने पर एसडीओ द्वारा दो विकल्प दिए जाते हैं। एक तो गरीबों के मकान बनाकर सस्ते में दे या आश्रय निधि जमा करवा दें। मित्तल ने आश्रय निधि जमा कराने का विकल्प चुना था। शिकायत के बाद जब परियोजना अधिकारी शहरी विकास अभिकरण इंदौर से आश्रय निधि की जानकारी ली गई तो चौंकने वाला खुलासा हुआ।

कॉलोनाइजर ने इस अवधि में आश्रय निधि की राशि जमा नहीं की थी। सक्षम प्राधिकारी एसडीओ को विकास अनुज्ञा प्रदान करने के पूर्व इस शर्त का पालन कराया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एसडीओ और कॉलोनाइजर की साठगांठ नजर आ रही है। मजेदार बात ये है कि एसडीओ ने बाद में कार्य पूर्णता का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया।

नक्शा निरस्त करने को तैयार टीएंडसीपी
अशोक वाटिका में टीएंडसीपी से जो नक्शा पास हुआ है, उसमें प्रस्तावित सीवरेज और ओवरहेड टैंक के स्थान में परिवर्तन कर दिया गया। जब टीएंडसीपी से जानकारी मांगी गई तो कहना था कि भूमि विकास नियम-2012 के नियम-25 में स्वीकृत अभिन्यास को रीवोक किया जा रहा है। इस पर जिला प्रशासन ने माना कि रीवोक की कार्रवाई तब हो सकती थी, जब काम चल रहा था।

विकास कार्य पूर्ण होने के कई वर्षों के बाद कार्रवाई किस तरह की जाएगी। कॉलोनाइजर पर वर्तमान में निवासरत रहवासियों पर कार्रवाई का असर होगा। टीएंडसीपी ने इस तरह के उल्लंघन के बाद कॉलोनाइजर पर कार्रवाई के लिए कोई प्रावधान नहीं बताया। एसडीओ ने जब कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया, तब इसकी जांच होना चाहिए थी।

आज की गाइडलाइन से भरना होगी
मामले में कलेक्टर जाटव ने चौंकाने वाला फैसला करते हुए साफ कर दिया कि कॉलोनाइजर ने चयनित किए गए विकल्प अनुसार आश्रय निधि शुल्क की राशि जमा नहीं की है। उसका निर्धारण वर्तमान में प्रचलित राशि के हिसाब से किया जाए।

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Mohit Panchal
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