पाकिस्तान से 1964 में जान बचाकर भागा परिवार 53 साल बाद देवास में कुछ यूं मिला 

पाकिस्तान से 1964 में जान बचाकर भागा परिवार 53 साल बाद देवास में कुछ यूं मिला 

पाकिस्तान में हिंदुओं के प्रति अत्याचार से तंग होकर छोड़ा था पूर्व पाक, अब कहलाता है बांग्लादेश। 53 साल बाद कुछ यूं मिल गए भाई-बहन।

देवास। 1964 का पूर्वी पाकिस्तान जो अब बांग्लादेश है...हम वहीं रहते थे। आज भी वह समय याद कर हमारी आत्मा सिहर जाती है। यह कहना है जगन्नाथ और माधव का। वे बताते हैं कि लगातार हो रहे अत्याचार औऱ आतंक से परेशान हो 1964 में उनके परिवार के नौ सदस्यों ने भारत का रुख किया। बीच रास्ते में ही उनकी तीन बहनें बिछुड़ गईं। 

बहनों को ढ़ूंढने की नाकाम कोशिश करने के बाद बाकी का परिवार रायपुर में आकर रहने लगा। 1975 में इस तीन भाई 'कृष्णा मंडल, जगन्नाथ, माधव मंडल और रेखा मंडल  देवास आकर रहने लगे। अपनी बहनों से मिलने की आस खो चुके इन भाइयों के लिए उनका एक दोस्त निर्मल शील 'भगवान' बनकर आए। दरअसल निर्मल का ससुराल उड़ीसा में है।

brother and sister

 वे उड़ीसा एक टूर पर गए थे जहां उन्हें इन बहनों के परिवार की जानकारी मिली। उनकी कोशिशों से यह परिवार एक दूसरे से मिल पाया औऱ जब भाई-बहन मिले तो उनकी आंखों में 53 साल का हर पल जीवंत हो उठा। आसुओं की धारा में बिछुड़ने का गम बह गया और मिलन की खुशी से आंखें चमकने लगी।



वाक्या कुछ इस तरह है अपने भाईयों से बिछुड़ने के बाद बहने ( उमा, शैफाली और स्व. कांदबनी) किसी तरह महाराष्ट्र पहुंची और वहां नई जिंदगी की शुरुआत की। दिल में परिवार से बिछुड़ने का गम था उन्हें ढ़ूंढने की कोशिश की लेकिन नाकामयाबी हासिल होने पर जिंदगी का नया अध्याय शुरू किया। मन के एक कोने में बिछड़े परिवार से मिलने की आस जिंदा थी। इसलिए उमा जब भी किसी से मिलती उन्हें अपना दुखड़ा सुनाती और कोशिश करती कि शायद किसी को उनके परिवार की कोई जानकारी हो और इस बार उनकी कोशिशें रंग लाईं।


umma

 वे किसी काम से उड़ीसा गईं थीं वहां उनकी मुलाकात अपने भाईयों के दोस्त औऱ भाईयों के साथ ही बंगाली कॉलोनी में रहने वाले निर्मल से हुई। निर्मल भी उमा के भाईयों जगन्नाथ और माधव की कहानी जानता था। जैसे ही उमा ने उन्हें अपनी आपबीती सुनाई उन्होंने कहा " मैं जानता हूं आपके भाईयों को। वो मेरी कॉलोनी में ही रहते हैं।" बस फिर क्या था...बहन के अरमानों को पंख लग गए औऱ वे अपने भाईयों से मिलने देवास आ गईं औऱ ऐसे 53 साल बाद पाकिस्तान ( अब बांग्लादेश) में बिछड़े भाई-बहन देवास में मिल गए। 


umma

 





















उमा उसकी बेटी सपना राय के साथ आया उनका पोता तापस कार्तिक राय बेहद खुश था। उसने पत्रिका को बताया कि नानी हमेशा कहा करती थीं मेरा परिवार नहीं रहा...वे अपनी धुंधली यादों के सहारे जिंदा थीं। अब मैं उनके इस भरतमिलाप का वीडियो बना रहा हूं। जिससे उनके भाईयों के स्नेह की खुशबू हम अपने साथ महाराष्ट्र लेकर जाएं। 

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