शनि देव 24 को मकर राशि में करेंगे प्रवेश, वृश्चिक राशि को साढ़े साती से मुक्ति, कुंभ राशि पर शुरू हो जाएगी

शनि देव 2049 में वापस मकर राशि में आएंगे। शनि ग्रह पृथ्वी से 85 करोड़ मील दूर और ग्रह का व्यास ढाई लाख मिल माना जाता है।

इंदौर. शनि देव 24 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही जहां वृश्चिक राशि के जातकों को साढ़े साती से मुक्ति मिलेगी, वहीं कुंभ राशि पर साढ़े साती शुरू होगी। अब शनि देव 2049 में वापस मकर राशि में आएंगे। शनि ग्रह पृथ्वी से 85 करोड़ मील दूर और ग्रह का व्यास ढाई लाख मिल माना जाता है। पृथ्वी पर हर मनुष्य पर उनका प्रभाव पड़ता है। शनि की चाल से जहां लोगों के भाग्य बदल जाते हैं, राजयोग तक दिलाते है। शनिदेव को कर्म प्रधान देवता होने के साथ ही न्यायाधीश की उपाधि भी दी जाती है। ज्योतिषी मितेश मालवीय ने बताया, शनिदेव 23 जनवरी की रात्रि 11.37 बजे धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। वे ढाई वर्ष एक राशि में भ्रमण करते हैं। उनकी धीमी चाल के कारण ही मनुष्य के जीवन में अधिकतम 3 बार ही साढ़े साती आती है। शनिदेव के मकर राशि में प्रवेश करने पर वृश्चिक राशि वाले जातकों को साढ़े साती से मुक्ति मिलेगी। वहीं धनु राशि पर साढ़े साती का अंतिम ढैया प्रारंभ होगा। कुंभ राशि वाले जातकों पर साढ़े साती का प्रथम चरण शुरू होगा। कन्या और वृषभ राशि पर से ढैया का असर समाप्त होकर तुला और मिथुन राशि पर ढैया प्रारंभ होगी।

इन राशियों पर रहेगा यह प्रभाव
शनिदेव की शुभता और अशुभता जातक की जन्म पत्रिका में स्थित ग्रहों की स्थिति, दृष्टि और आपसी संबंधों का आकलन कर ज्ञात की जा सकती है। शनिदेव जन्मपत्रिका में जहां बैठते हैं, उस भाव को बढ़ाते है और जहां उनकी दृष्टि पड़ती है, उस भाव को खराब करते हैं। वृषभ और तुला राशि वालों के लिए शनिदेव कारकेश अर्थात बहुदा लाभप्रद रहते हैं। अश्विनी, मघा, मूल, विशाखा, पुनर्वसु नक्षत्र पर उत्तम फ ल और पुष्य, अनुराधा, मृगशिरा, धनिष्ठा व भरणी नक्षत्र पर अशुभ फ ल देता है। मकर के शनि मेष, कर्क, सिंह, कन्या, वृश्चिक, मीन राशियों के लिए लाभदायक हैं। मिथुन, कुंभ पर अशुभ तथा धनु, मकर व तुला पर सम प्रभाव पड़ेगा।

भारत के शत्रु होंगे परास्त
शनिदेव का मकर राशि में प्रवेश राजगृही व शश योग को बनाता है। भारत की कर्क राशि है और शनि सप्तम भाव में प्रवेश करेंगे, जो कि भारत की आंतरिक व बाहरी स्थिति को मजबूत बनाता है। दूसरे देश से व्यवहार मित्रता और सहयोग प्राप्त होगा। शत्रु परास्त होंगे। राजनीतिक दलों में उलटफेर होगा। दल-बदल की स्थिति बनेगी। भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।

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shatrughan gupta
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