अनोखी पहल: तिरस्कार झेल रहे बागबां को अपनों के बीच सम्मान दिला रही पुलिस की ये पंचायत  

अनोखी पहल: तिरस्कार झेल रहे बागबां को अपनों के बीच सम्मान दिला रही पुलिस की ये पंचायत  
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Shruti Agrawal | Updated: 25 May 2017, 11:05:00 AM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

रिश्तों के वो नाजुक मसलें जिन्हें कानून की सख्ती नहीं सुलझा पाई, उन्हें सुलझा रही ये पुलिस पंचायत,  जानिए कैसे अपनों द्वारा तिरस्कृत हो चुके बुजुर्गों को अपनों के बीच फिर सम्मान दिला रही 'पुलिस पंचायत

कृष्णपाल सिंह चौहान @ इंदौर

बच्चों और परिवार के लिए पूरी जिंदगी खपाने वाले माता-पिता जब उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंचते हैं तो घर में उन्हें बोझ समझ लिया जाता है। कई बार संपत्ति तो कई बार पारिवारिक विवाद के चलते बच्चे उन्हें दर-दर भटकने को मजबूर कर देते हैं। एेसे बुजुर्गों को घर में सम्मान वापस दिलाने का बीड़ा 'पुलिस पंचायत ने उठाया है। 

पुलिस मुख्यालय में एएसपी डॉ. प्रशांत चौबे के कक्ष में हर बुधवार यह पंचायत लग रही है। इसमें उन बुजुर्गों को बुलाया जो किसी न किसी वजह से बच्चों द्वारा तिरस्कृत कर दिए गए हैं। उनकों बच्चों के साथ बैठाकर काउंसलिंग करवाई जाती है और आपसी सामंजस्य बैठाकर खुशी-खुशी विदा किया जाता है। पुलिस पंचायत की खास बात यह है कि इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सेवानिवृत्त अधिकारी निभा रहे हैं। इसमें रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट सेशन जज शर्मिष्ठा दवे, रिटा. एडिशनल कलेक्टर एसएस दुबे, बैंक ऑफ इंडिया के रिटा. जीएम डॉ. आरडी यादव, प्रो. जीपी नेमा, विद्युत कंपनी से रिटा. एमके गर्ग व नगर सुरक्षा समिति के अश्विन जैन शामिल है। 

चुनिंदा केस स्टडी 
वैसे तो इस पंचायत ने कई मसले सुलझाएं है, इन्हीं मसलों में से कुछ केस हम आप तक लेकर आए है। आईए इन केस स्टडी को पढ़कर जाने की आखिर कैसे इस नाजुक मसले मेें अहम भूमिका निभा रही है ये पंचायत - 

केस 1 -  एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने पुलिस पंचायत में बताया कि उनके चार बेटे हैं। वर्तमान में उनके घर के सभी हिस्सों में बेटों ने ताला लगा दिया है। मजबूरन वे किराए के मकान में रह रहे हैं। पंचायत ने उनके सभी बेटों को काउंसलिंग के लिए बुलाया। इसके बाद विवाद में चल रही प्रॉपर्टी को बेच सभी बच्चों को समान राशि देने की बात पर सहमति बनी।


केस  2 - एक मामला संयोगितागंज क्षेत्र से आया। एक पिता ने बताया कि बड़ा बेटा सरकारी नौकरी में है, छोटा बेटा बेरोजगार है। छोटा बेटा आए दिन रुपए की मांग कर अपशब्द कहता था। पेनल ने बेरोजगार बेटे की समस्या सुनी और उसकी मांग पर कपड़ा कटिंग की मशीन दिलवाई। मशीन खरीदने के लिए परिवार के अन्य लोगों ने पैसा जमा किया। खुश होकर बेटे ने आमदनी होने पर लौटाने की बात कही।

मिल रही पेनल की मदद
एएसपी प्रोटोकॉल डॉ. प्रशांत चौबे ने बताया कि सीनियर सिटीजन संबंधी एेसे कई प्रकरण होते हैं जिनका समाधान कानून के तहत नहीं होता। एेसे में सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेनल की मदद से इन प्रकरणों का निराकरण करवा रहे हैं।

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