scriptsoon as house work starts, they become active start doing blackmail | मकान का काम शुरू होते ही करने लगते है ब्लैकमेल | Patrika News

मकान का काम शुरू होते ही करने लगते है ब्लैकमेल

सीएम हेल्पलाइन को बना रखा कमाई का अड्डा भेजने के बाद वापस ले लेते शिकायत, अफसर भी है परेशान

इंदौर

Published: February 23, 2022 11:24:11 am

इंदौर। आरटीआई के नाम पर ब्लैकमैलिंग और अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ कलेक्टर ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सभी अफसरों को सूची बनाकर मुकदमे दर्ज कराने का बोला गया है। नगर निगम में भी ब्लैकमेलर लोगों की बड़ी लंबी कतार है, जो मकान का काम शुरू होते ही अवैध निर्माण होने की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में कर देते हैं। बाद में जब वसूली हो जाती है तो शिकायत वापस ले ली जाती है।
मकान का काम शुरू होते ही करने लगते है ब्लैकमेल
मकान का काम शुरू होते ही करने लगते है ब्लैकमेल
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हेल्पलाइन तैयार करने के पीछे उद्देश्य था कि आम जनता को राहत हो जाएगी। उसकी अफसर सुनवाई नहीं कर रहे हैं तो ऐसे लोगों पर निगरानी रखी जा सकेगी। शिकायत की वजह से जनता का काम अफसर तुरंत कर दें। बकायदा इसके लिए चार लेवल बनाए गए, जिसमें छोटे से लेकर प्रमुख सचिव तक को शामिल किया गया है। समय-समय पर मुख्यमंत्री खुद उसकी समीक्षा करते हैं। उसके आधार पर कई बार अफसरों को फटकार भी पड़ जाती है।
सीएम हेल्पलाइन का फायदा आम जनता तो दूर सबसे ज्यादा ब्लैकमेलर उठा रहे हैं। ऐसे लोगों से सभी विभागों के अफसर त्रस्त हैं तो नगर निगम में होने वाली शिकायतों से आम जनता भी पीडि़त है, खास तौर पर मकान बनवाने वाले। जैसे-तैसे बैंक से लोन लेने और अपनी जमा पूंजी लगाने के बाद व्यक्ति मकान बनाना शुरू करता है। जैसे ही मकान की छत डल जाती है और प्लास्टर का काम शुरू होने आता है, वैसे ही ब्लैकमेलर का काम शुरू हो जाता है। मकान मालिक का नाम-पता निकालने के बाद सीएम हेल्प लाइन में अवैध निर्माण की शिकायत दर्ज कर दी जाती है।
जैसे ही शिकायत निगम के पोर्टल पर पहुंचती है, वैसे ही मजबूरी में निगम के अफसरों को सक्रिय होना पड़ता है। मकान मालिक को तुरंत नोटिस थमा दिया जाता है। बिल्डिंग इंस्पेक्टर तो मकान मालिक की मजबूरी को समझ जाता है लेकिन सीएम हेल्पलाइन का हवाला देकर हाथ टेक देता है। मकान मालिक को मजबूर होकर शिकायतकर्ता से संपर्क करना पड़ता है। फिर खेल शुरू होता है तोड़-बट्टे का। लाखों रुपए से बात शुरू होती है और जितने में मामला सेट हो जाए। सेटिंग होने के बाद में ब्लैकमेलर शिकायत वापस भी ले लेता है।
बांट रखे अपने-अपने क्षेत्र

मकान निर्माण करने वालों को ब्लैकमेल करने की बीमारी कुछ क्षेत्र में ना होकर पूरे शहर में फैली हुई है। ये काला धंधा पूरी ईमानदारी से होता है, क्योंकि सभी के अपने-अपने क्षेत्र बंधे हैं। ब्लैकमेलर एक दूसरे के क्षेत्र की शिकायत नहीं करते। कलेक्टर मनीष सिंह को चाहिए कि निगम अफसरों को निर्देश देकर अवैध निर्माण की शिकायत करने वालों की
भी फेहरिस्त तैयार करवाएं। ऐसे लोगों का बड़ा आंकड़ा निकलकर आ सकता है।
खेल में बड़े खिलाड़ी भी

इस खेल में नगर निगम के कुछ पूर्व पार्षद भी शामिल हैं, जो कोई भी व्यावसायिक बिल्डिंग बनना शुरू होती है तो सक्रिय हो जाते हैं। सांठगांठ के चलते उनके पास खुद-ब-खुद नक्शा पहुंच जाता है। बकायदा खुद के लेटरपेड का इस्तेमाल करके शिकायत सभी संबंधितों को कर दी जाती है।
पूर्व विधायक बोले - जनहित में काम करने वाले भी हो रहे बदनाम

पहली बार एक्टिविस्ट जो आरटीआई के नाम पर ब्लैकमेल करते हैं, उन पर एफआईआर दर्ज हो रही है। इससे वास्तविक रूप से जनहित में काम करने वाले एक्टिविस्ट भी बदनाम होने से बचेंगे। कुछ लोग सूचना के अधिकार का गलत उपयोग कर रहे हैं। उन पर मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई सराहनीय कदम है। ये बात पूर्व विधायक गोपीकृष्ण
नेमा ने कही। कहना है कि सूचना के अधिकार में आवेदन लगाकर कुछ लोग अधिकारियों व कर्मचारियों को ब्लैकमेल कर रहे हैं। उन्होंने धंधा ही बना लिया है। मांग करते हुए कहा कि शहर के उद्योगपति, बिल्डर व बड़ा व्यापार करने वालों को ब्लैकमेल कर धन वसूलने के कई प्रकरणों को सुना जाता है। आरटीआई में इंदौर विकास प्राधिकरण, नगर निगम और हाउसिंग बोर्ड आदि विभागों से जानकारी निकाल कर संबंधित पक्ष को डराया जाता है। ये लोग सीएम
हेल्पलाइन का दुरुपयोग करते हैं। कार्रवाई कर ब्लैकमेल करने वालों को संदेश दिया है। वहीं, प्रताडि़त होने वालों को सार्वजनिक रूप से भी आमंत्रित करें ताकि वे निर्भय होकर अपनी बात रख सके व पीड़ा सुना सके। सामने आने वाले नामों पर बाद में कठोर कार्रवाई की जाए। ये करने से कानून के दुरुपयोग और ब्लैकमेल बंद करने का इंदौर एक
नया इतिहास रचेगा।

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