3 साल के मासूम को हुई जापानी बिमारी मोया-मोया, धुआं हुई दिमाग की नसें, डॉक्टर्स ने कुछ यूं बचाई जान 

पद्रेश में पहली बार इंदौर के डॉक्टर्स ने की मोया-मोया बिमारी की सफल सर्जरी, एक अन्य केस में विंड पाइप ट्रेकिया जर्सरी कर मरीज को दिया जीवनदान, जानिए कैसे इन दो जटिल ऑपरेशन्स में डॉक्टर्स ने पाई सफलता 

इंदौर. शहर के एक निजी हॉस्पिटल में दो जटिल ऑपरेशन हुए। पहले ऑपरेशन में तीन साल के बच्चे को मोया-मोया बीमारी से बचाने के लिए उसके ब्रेन की सफल बायपास सर्जरी की गई। तो दूसरे ऑपरेशन में विंड पाइप (गले से फेफड़ों के बीच हवा का रास्ता) से सवा इंच का ट्रेकिया रिमूव कर मरीज की जान बचाई गई,  ये दोनों ही ऑपरेशन सेंट्रल इंडिया में पहली बार हुए। पढि़ए दोनों मरीजों की कश्मकश भरी दास्तान-  


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सफल सर्जरी से खुश मासूम अनमोल

अनमोल के ब्रेन का बायपास
तीन साल का मासूम अनमोल डांगी अपना दायां हाथ नहीं उठा पाता था। सीहोर निवासी उसके माता-पिता अस्पतालों के चक्कर काट कर परेशान थे। शरीर का एक हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। एक जांच में पता चला, अनमोल को रेयर बीमारी मोया-मोया है। इसमें उसके दिमाग की महीन नसें धुएं के समान होने से रक्तप्रवाह बेहद धीमा हो गया था। एक सप्ताह पहले अनमोल के ब्रेन का बायपास किया गया। इसमें कान के दाहिने हिस्से की टिपीटेड नस को निकालकर दिमाग की मीडिल सैरेब्रल आर्टरी से जोड़ा गया। इससे नसों में रक्त प्रवाह शुरू हो गया और कुछ ही दिनों में अनमोल के शरीर का लकवाग्रस्त हिस्सा काम करने लगा। 

जापानी बीमारी है
अस्पताल के डायरेक्टर न्यूरो साइंसेस डॉ. रजनीश कछारा ने कहा, मोया-मोया बीमारी अकसर जापान में होती है। हाल में भारत में भी इसके केस सामने आने लगे हैं। इसमें ब्रेन की नसें सिकुड़ जाती हैं। इससे रक्त प्रवाह में समस्या होती है। किसी-किसी मरीज में अल्टरनेट चैनल खुलने से रक्त प्रवाह शुरू हो जाता है, यदि ऐसा नहीं होता तो ऑपरेशन करना होता है। यह ऐसा ही केस था।

 
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ऑपरेशन के बाद रवि सोलंकी 


14 जनवरी को 27 वर्षीय रवि सोलंकी की तेज रफ्तार जिंदगी में अचानक ब्रेक लग गया। एक्टिवा से हुए रोड एक्सीडेंट के बाद 15 दिन आईसीयू में अटकी जिंदगी फिर पटरी पर आना शुरू हुई। शारीरिक और मानसिक चोटों से उभरे सिविल इंजीनियर रवि ने फिर से काम पर जाना शुरू ही किया था, सांस लेने में तकलीफ  होने लगी। कुछ ही समय में रवि के लिए सांस लेना व खाना-पीना भी दूभर हो गया। सिटी स्कैन और एमआरआई में पता चला विंड पाइप में कराइना के 2.50 सेंटीमीटर ऊपर बड़ा ब्लॉकेज था। सुई के सिरे के बराबर महीन छेद से वह जैसे-तैसे वह सांस ले पा रहा था।

 दरअसल एक्सीडेंट के बाद वेंटिलेटर पर रखने के दौरान ऑक्सीजन देने के लिए उसके विंड पाइप में ट्रेक्योस्ट्रॉमी की गई थी। इससे उस जगह के आसपास टिशू डेवलप होने से ब्लॉकेज हो गया था। इसे हटाने के लिए प्रदेश में पहली बार ट्रेकियल रिसेक्शन एंड रिकंस्ट्रक्शन ऑपरेशन किया गया। अभी तक दिल्ली या चेन्नई जैसी मेट्रो सिटी में ही होता था। शहर में इसे मेंदाता हॉस्पिटल के चीफ  कार्डियक सर्जन डॉ. संदीप श्रीवास्तव ने सफलता पूर्वक अंजाम दिया।

जब हार्ट ट्रांसप्लांट कर दिया तो यह क्यों नहीं
सर्जरी के बाद डॉ. श्रीवास्तव ने कहा, प्रदेश में अभी तक ऐसे ऑपरेशन हुए नहीं हैं, इसलिए हमने सोचा जब हार्ट ट्रांस्प्लांट कर लिया है, तो ट्रेकिया ऑपरेशन क्यों नहीं कर सकते। हमने गुडग़ांव से बैकअप टीम भी बुलवाई थी। अब मरीज अच्छा रिस्पांस कर रहा है।

खाना खाया
रवि की मां रेखा सोलंकी ने कहा, दुर्घटना के बाद से रवि बार-बार अस्पताल में भर्ती हो रहा था। ऑक्सीजन मॉस्क लगाते तो ठीक हो जाता। मंगलवार को उसका ऑपरेशन हुआ। बुधवार को उसने अच्छे से खाना खाया है।




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Shruti Agrawal
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