एटीकेटी से दु:खी बीई छात्रा ने परिजन के सामने लगाई फांसी

Arjun Richhariya

Publish: Mar, 14 2018 08:39:43 AM (IST)

Indore, Madhya Pradesh, India
एटीकेटी से दु:खी बीई छात्रा ने परिजन के सामने लगाई फांसी

देर से उठने और पढ़ाई नहीं करने पर जताई थी नाराजगी

इंदौर. परीक्षा में एटीकेटी आने से दु:खी बीई छात्रा ने परिजन की मौजूदगी में ही मंगलवार को फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। जान देने के पहले परिजन ने छात्रा के देर से उठने और पढ़ाई नहीं करने पर नाराजगी जताई थी।

यह बात उसे इतनी नागवार गुजरी कि उसने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया, तब परिजनों ने उसे एेसा करने से रोका। इसके बाद मृतका दूसरे कमरे तक पहुंची और अंदर से दरवाजा बंद कर फांसी लगा ली। माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्य बेटी की गतिविधियों को खिडक़ी से देखते रहे। वे बार-बार उसे यह कदम नहीं उठाने के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन उसने किसी की भी नहीं सुनी।

पेशे से सरकारी अधिकारी पिता ने अपनी बेटी को बचाने के लिए दरवाजा तोडऩे का प्रयास भी किया। वे खिडक़ी तोड़ते वक्त घायल भी हो गए, लेकिन बेटी को बचा नहीं सके। इधर, बदहवास परिजन ने बेटी की आंखें दान करने का निर्णय लिया। एसआई वायएस रघुवंशी के मुताबिक भानुप्रिया (22) पिता रतन सिंह डाबर निवासी ग्रेटर वैशाली नगर ने सुबह करीब 11 बजे घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। परिजन उसे प्राथमिक उपचार के लिए निजी हॉस्पिटल ले गए, जहां से उसे जिला हॉस्पिटल रैफर किया गया। यहां डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
मर्ग कायम कर शव का पीएम करवाकर परिजनों को सौंपा है। मृतक छात्रा के पिता रतन सिंह उद्योग विभाग खरगोन में मैनेजर के पद पर पदस्थ हैं।

बहन से हुआ था विवाद
भानुप्रिया निजी कॉलेज में बीई द्वितीय वर्ष (सिविल) की छात्रा थी। तीन दिन पूर्व उसका रिजल्ट आया था। उसे 2 विषयों में एटीकेटी आई थी। इस कारण वह तनाव में थी। मंगलवार सुबह 10 बजे वह सो कर उठी। बीएएमएस की पढ़ाई कर रही बड़ी बहन नम्रता का उससे कपड़े में सिलाई को लेकर बोलचाल हो गई था। भानुप्रिया गुस्सैल थी। विवाद के बाद उसने कमरे में खुद को बंद कर लिया। दरवाजा नहीं खोलने पर पिता ने खिडक़ी से देखा तो वह दुपट्टे से पंखे पर फंदा डाल रही थी। यह हरकत देख परिजन के हाथ-पैर फूल गए। वे उसे यह न करने के लिए चिल्लाते रहे। पिता ने उसे बचाने के लिए दरवाजा तोडऩे का प्रयास किया।

फंदे से उतारा तो चल रही थीं सांसें...
मां-बहन ने शोर मचाकर घर में किराए से रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र ओंमकार जमरा व ओमप्रकाश देसाई को बुलाया। सभी दरवाजे को तोडऩे का प्रयास करते रहे। विफल होने पर पिता ने कमरे की खिडक़ी का कांच तोड़ा। उनके हाथ पर कई जगह चोटें आईं। बेटी के पास वे पहुंचे तब तक वह फंदे पर झुल चुकी थी। जब उन्होंने बेटी को फंदे से उतारा तो उसकी सांसें चल रही थीं।

बेसुध थी बड़ी बहन
डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही बड़ी बहन नम्रता भी परिजन के साथ जिला हॉस्पिटल में थी। वह बेसुध थी। वह बार-बार मां से कह रही थी, जब भानुप्रिया फंदे पर झूल रही थी तो उसने पैर पकडक़र नीचे से उठाया था, लेकिन फिर भी उसे कोई बचा नहीं सका।

आंखें दान की
गमगीन परिजन ने बेटी की आंखें दान की हैं। उनकी सहमति के बाद हॉस्पिटल में आई बैंक के कर्मचारी पहुंचे थे।

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